फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakshpeethadhishwar changed the political history of Uttar Pradesh

संत और सियासत : गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने बदला उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास

Fri, 25 Mar 2022 02:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा टीपी शाही, गोरखपुर
टीपी शाही, गोरखपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 25 Mar 2022 02:36 AM IST
सार

मुख्यमंत्री के घोषित चेहरे पर दोबारा चुनाव जीते, फिर विधायक दल के नेता चुने गए।
 

विज्ञापन
Gorakshpeethadhishwar changed the political history of Uttar Pradesh
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश का राजनीतिक इतिहास बदल दिया। यह पहला मौका है, जब भाजपा का कोई मुख्यमंत्री पांच वर्षों का कार्यकाल पूरा करके दोबारा चुनाव जीता और विधायक दल का नेता चुना गया। शुक्रवार को लखनऊ के इकाना स्टेडियम में दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ भी लेंगे। ऐसा उत्तर प्रदेश की राजनीति में 37 वर्षों बाद होगा। इससे पहले किसी मुख्यमंत्री ने दोबारा कुर्सी नहीं संभाली है। 

विज्ञापन


शहर विधानसभा क्षेत्र से 1.03 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से चुनाव जीतने वाले गोरक्षपीठाधीश्वर राजनीति के अजेय योद्धा हैं। वह 1998 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं। पांच बार गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से सांसद रहे हैं। 2017 में एमएलसी बने और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। 2022 के विधानसभा चुनाव का एलान हुआ तो शहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतर गए। मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी थी। लिहाजा, पूरे प्रदेश व देश के दूसरे राज्यों में चुनाव प्रचार पर जोर देना पड़ा। गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा समय नहीं दे सके, फिर भी जनता ने बड़े अंतर से चुनाव जिताकर लखनऊ भेज दिया। 
विज्ञापन


गोरक्षपीठ से लगाव बरकरार
योगी आदित्यनाथ ने पांच वर्षों तक मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन गोरक्षपीठ से लगाव बरकरार रहा। वह पीठ के हर महत्वपूर्ण कार्यक्रम में हिस्सा लेते हैं। पूजा-अर्चना करते हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन


उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में हुआ जन्म
योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के पंचूर गांव में हुआ। हिंदुत्व के प्रति बचपन से ही लगाव था। लिहाजा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की शाखा में जाने लगे। कॉलेज के दिनों में योगी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े रहे। 

एबीवीपी के कार्यक्रम में हुई थी महंत अवेद्यनाथ से मुलाकात 
एबीवीपी के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गए योगी आदित्यनाथ की दिल्ली में ही तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं गोरखपुर के सांसद ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से मुलाकात हुई थी। महंत अवेद्यनाथ मुख्य अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में गए थे। योगी वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संबोधन के दौरान सबका ध्यान खींचा। हिंदुत्व पर दिए गए भाषण से महंत अवेद्यनाथ बहुत प्रभावित हुए और कार्यक्रम के समापन के बाद अवेद्यनाथ ने योगी को अपने पास बुलाया। योगी से परिचय पूछे। योगी ने जब बताया कि वह उत्तराखंड के पंचूर के रहने वाले हैं तो उनके प्रति उनका लगाव और बढ़ गया। उसी समय अवेद्यनाथ ने योगी से दोबारा मिलने को कहा। इस बीच योगी ने अवेद्यनाथ से कई बार मुलाकात की है। 

योगी की सेवा से खुश थे महंत अवेद्यनाथ
बताया जाता है कि जब महंत अवेद्यनाथ की तबीयत खराब हुई तो योगी कुशलक्षेम पूछने पहुंच गए। महंत अवेद्यनाथ की सेवा भी की। इससे प्रभावित होकर ही अवेद्यनाथ ने योगी को गोरखपुर बुलाया और कहा कि यदि देश व समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो सांसारिक मोह त्याग दें। उसमें कुछ नहीं है। उस वक्त योगी ने कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी बात पर मनन करते हुए अपने गांव चले गए।

सांसारिक सुखों को त्यागकर बने उत्तराधिकारी
योगी आदित्यनाथ एमएससी प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे, तभी सांसारिक सुखों को त्यागने का फैसला कर लिए। उन्होंने अपने माता-पिता से कहा कि अब नौकरी करनी है। यही कहकर गोरखपुर आ गए। गुरु महंत अवेद्यनाथ से मिले और कहा कि वह अब योग धारण कर यहीं रहेंगे। कुछ दिनों तक मंदिर में सामान्य व्यक्ति की तरह रहे, फिर योग की दीक्षा लेकर गोरक्षपीठ के उत्तराधिकारी बन गए। 

राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बन गए
गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी बनने के बाद ही योगी आदित्यनाथ की सक्रियता बढ़ गई। गोरखनाथ मंदिर के अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे। 1998 में लोकसभा चुनाव का एलान हुआ तो तत्कालीन अवेद्यनाथ ने असमर्थता जताई। अवेद्यनाथ ने योगी का नाम आगे बढ़ाया और राजनीतिक उत्तराधिकारी भी बना दिया। योगी ने नामांकन कराया और राजनीति की पटरी पर सरपट दौड़ने लगे। पहला चुनाव 25 हजार मतों के अंतर से जीतकर दिल्ली पहुंच गए। वह 26 वर्ष की उम्र में सांसद बने। 1999 में ही दोबारा लोकसभा चुनाव हुआ तो भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को दोबारा चुनाव मैदान में उतार दिया।

भितरघात ने बनाया मजबूत
योगी के राजनीति में बढ़ते कद से भाजपा के तमाम दिग्गज असहज हो गए। नतीजतन, भितरघात होने लगा। तमाम नेता उन्हें चुनाव हराने के प्रयास में जुट गए। भितरघात की वजह से ही 1999 का चुनाव योगी सात हजार वोट से जीत सके। इसका मतलब रहा कि 1998 के चुनाव से जीत का अंतर कम हो गया। वह पांच वर्षों तक सांसद रहे। सड़क से संसद तक संघर्ष के बल पर अपना कद बड़ा कर लिए। 2004 का लोकसभा चुनाव हुआ तो वह करीब डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत गए। यह सिलसिला लगातार जारी रहा। गोरखपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद चुने गए। 

हिंदू युवा वाहिनी का गठन
गोरखपुर का सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की राजनीति में सक्रियता बढ़ाई। मऊ और आजमगढ़ दंगों के बाद संघर्ष किए। साथ ही हिंदू युवा वाहिनी (हिंयुवा) का गठन कर दिए। हर बूथ, सेक्टर व मंडल के साथ ही उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संगठन खड़ा कर दिए। इससे मजबूती मिली और उनकी राजनीतिक पारी अजेय होती चली गई। 

नाराजगी पड़ी थी भाजपा को भारी
2002 के विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यनाथ की नाराजगी का खामियाजा कद्दावर नेता शिव प्रताप शुक्ला को भुगतना पड़ा था। हुआ यह था कि किसी बात से नाराजगी बढ़ी और योगी ने हिंदू महासभा के टिकट पर डॉ. आरएमडी अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतार दिया। भाजपा ने खूब जोर लगाया, लेकिन चुनाव परिणाम आया तो शिवप्रताप शुक्ला को हार का सामना करना पड़ा। इसकी जानकारी शीर्ष नेतृत्व को भी थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यह योगी के राजनीतिक कद को दर्शाता है। 


हिंदू सम्मेलन से दिखाई ताकत
योगी आदित्यनाथ ने हिश्व हिंदू महासंघ के बैनर तले हिंदू सम्मेलन कराके अपनी ताकत दिखाई थी। बताया जाता है कि भाजपा का सम्मेलन लखनऊ में हुआ था। इसमें भाजपा के सभी राष्ट्रीय नेता आए। इसी दिन योगी ने गोरखपुर में हिंदू सम्मेलन किया। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कई नेताओं ने योगी के साथ मंच साझा किया। लखनऊ से ज्यादा भीड़ गोरखपुर के हिंदू सम्मेलन में रही। इस घटना के बाद भी भाजपा ने योगी को 2004, 2009, 2014 में लोकसभा का प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा। 2017 के विधानसभा चुनाव में शानदार जीत मिली तो पार्टी ने उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed