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गोरखपुर विश्वविद्यालय: 2019-20 के शोधार्थियों पर लागू होगा सीबीसीएस, गोविवि ने अधिसूचना जारी कर 10 क्रेडिट कोर्स करना किया अनिवार्य
Wed, 10 Nov 2021 12:17 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 10 Nov 2021 12:17 PM IST
सार
गोविवि ने अधिसूचना जारी कर 10 क्रेडिट कोर्स करना किया अनिवार्य, विश्वविद्यालय के फैसले से जल्द प्री-पीएचडी परीक्षा की उम्मीदों पर पानी फिरा।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने मंगलवार को 2019-20 के शोधार्थियों पर विरोध के बावजूद सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना के मुताबिक हर शोधार्थी को 10 क्रेडिट का कोर्स करना अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय के इस फैसले से प्री-पीएचडी परीक्षा का बीते दो साल से इंतजार कर रहे शोधार्थियों की जल्द परीक्षा की उम्मीद पर पानी फिर गया है।
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सीबीसीएस लागू होने से शोधार्थियों को पहले 10 क्रेडिट की कक्षाओं का मानक पूरा करना होगा तब परीक्षा दे पाएंगे। उन्हें रिसर्च मेथडोलॉजी और कंप्यूटर एप्लीकेशन का पांच-पांच क्रेडिट का कोर्स करना होगा। पाठ्यक्रम को सीबीसीएस में बदलने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों से रिसर्च मेथडोलॉजी और कंप्यूटर एप्लीकेशन कोर्स को लेकर संचालित की गई कक्षाओं की जानकारी मांगी है, जिससे जरूरत के मुताबिक एक महीने में अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन करके क्रेडिट के मानक को पूरा किया जा सके।
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विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि क्रेडिट मानक पूरा करने के बाद ही परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। हालांकि विश्वविद्यालय ने परीक्षाओं के आयोजन की योजना दिसंबर-जनवरी में बनाई है लेकिन इतने कम समय में यह कैसे संभव हो सकेगा, इसका उसके पास कोई ठोस जवाब नहीं है। यही नहीं विश्वविद्यालय ने इन शोधार्थियों को पीएचडी आर्डिनेंस-2020-21 को अपनाने का विकल्प दिया है।
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शोधार्थियों ने किया था धरना-प्रदर्शन
शोधार्थियों ने छह महीने का कोर्स ढाई साल तक लटके रहने पर कई बार कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन किया और धरना दिया। बावजूद इसके सीबीसीएस थोपे जाने से शोधार्थी काफी हैरान हैं। उनका कहना है कि किसी भी पुराने कोर्स पर नई प्रणाली लागू करना अनुचित और अन्यायपूर्ण है। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय में छठ के बाद हंगामा हो सकता है। विद्यार्थियों का कहना है कि यह निर्णय उन पर थोपा गया है।