कैसे होगा कोरोना पर वार: टीकाकरण में गोरखपुर प्रदेश में 74वें स्थान पर, शासन नाराज
गोरखपुर में लक्ष्य का 96.23 फीसदी ही कोरोनारोधी टीका लग पाया है। 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाने में पिछड़ने से शासन नाराज है।
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18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को कोरोनारोधी टीका लगाने में गोरखपुर प्रदेश में 74वें स्थान पर है। जबकि देवरिया 73वें स्थान पर है। मुख्यमंत्री का जिला होने के बावजूद गोरखपुर में टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग तेजी नहीं ला पा रहा है। इस पर शासन ने नाराजगी जताई है। वहीं, बस्ती मंडल के जिलों की भी स्थिति काफी खराब है।
जानकारी के मुताबिक, कोरोनारोधी टीकाकरण में गोरखपुर और बस्ती मंडल की स्थिति काफी खराब है। दोनों मंडलों में सबसे खराब स्थिति गोरखपुर की है। इसके बाद देवरिया का नंबर आता है। बस्ती मंडल में स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का जिला 63वें स्थान पर है। वहीं, कुशीनगर 60वें नंबर पर है।
गोरखपुर जिले में 18 वर्ष से अधिक उम्र के 34 लाख 88 हजार लोगों को टीका लगना है। जबकि 33 लाख 56 हजार 485 लोगों को टीका लग पाया है। यह लक्ष्य का 96.23 फीसदी है। इसके बाद गोरखपुर प्रदेश में नीचे से दूसरे स्थान पर आ गया है। गोरखपुर से खराब स्थिति अमरोहा की है। अमरोहा में 95.35 फीसदी लोगों को टीका लग सका है।
प्रदेश में पहले नंबर पर गौतमबुद्धनगर है, यहां लक्ष्य के सापेक्ष 130.44 फीसदी लोगों को टीका लगा है। दूसरे स्थान पर शाहजहांपुर है, यहां 112.9 फीसदी लोगों को टीका लगा है। प्रदेश के 75 में से 50 जिले शत-प्रतिशत या उससे अधिक लक्ष्य हासिल कर चुके हैं।
गोरखपुर-बस्ती मंडल की स्थिति खराब
गोरखपुर-बस्ती मंडल के सात जिलों की स्थिति ठीक नहीं है। बस्ती मंडल में बस्ती जिले का प्रदर्शन सबसे अच्छा है, यहां 101.19 फीसदी लोगों को टीका लगा है। दूसरे स्थान पर संतकबीरनगर है, यहां 100.53 फीसदी लक्ष्य हासिल हो चुका है। कुशीनगर में 99.48, सिद्धार्थनगर में 99.45, महाराजगंज में 99.37 और देवरिया में 96.48 फीसदी लोगों को टीका लगा है।
टीकाकरण में सबसे खराब प्रदेश के पांच जिले
जनपद टीकाकरण प्रतिशत में
अमरोहा 95.35
गोरखपुर 96.23
देवरिया 96.48
एटा 97.98
मुरादाबाद 98.29
टीकाकरण नोडल अधिकारी डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि कोरोनारोधी टीकाकरण की संख्या बढ़ाने के लिए सचल दस्ते तैनात किए गए हैं, जो छूटे लोगों के घरों तक जाकर टीका लगा रहे हैं। टीका लगाने के लिए अब स्कूलों का सहारा लिया जा रहा है। जल्द ही लक्ष्य हासिल हो जाएगा।