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Gorakhpur News: टूट गई मरीज की सांसों की डोर, शव के लिए भी लगानी पड़ी गुहार- जेआर पर कार्रवाई नहीं
Wed, 24 Apr 2024 11:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Apr 2024 11:29 AM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज
- फोटो : सोशल मीडिया
गोरखपुर में जिस मरीज के इलाज में लापरवाही की बात पर बीआरडी के जूनियर डॉक्टरों ने तीमारदार को पीट दिया था, सोमवार देर शाम उसकी मौत हो गई। लेकिन जूनियर डाॅक्टरों की दबंगई ऐसी कि परिजनों को उसके शव के लिए गुहार लगानी पड़ी।
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देर रात शव इस शर्त पर दिया गया कि परिजन चुपचाप घर जाकर इसका अंतिम संस्कार कर देंगे। मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। वहीं इस मामले में पुलिस ने दोनों तरफ से तहरीर होने के बावजूद केवल डॉक्टर के आरोप पर तीमारदार के खिलाफ ही केस दर्ज किया है।
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वहीं, कॉलेज प्रशासन ने तीन दिन बाद भी इस प्रकरण में कोई जांच शुरू नहीं की है। संतकबीरनगर जिले के बेलौली गांव के रहने वाले रामसेवक त्रिपाठी को पेट दर्द की शिकायत पर खलीलाबाद जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।
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रामसेवक को मेडिसिन इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। रामसेवक के साथ आए उनके दामाद सहजनवा क्षेत्र के भड़सार गांव निवासी रमेश मिश्र बताते हैं कि रविवार सुबह करीब 11 बजे वेंटिलेटर बंद था।
हमने वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से केवल इतना पूछा कि मशीन बंद क्यों है? डॉक्टर इतनी सी बात पर भड़क गए और मरीज को लेकर किसी प्राइवेट अस्पताल जाने को कहने लगे। इस पर हमने भी प्रतिवाद करते हुए कहा कि यहां कोई सीनियर डॉक्टर नहीं है, आप ठीक से इलाज कीजिए।
मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। इस पर डॉक्टर भड़क गए और गाली देते हुए कालर पकड़ लिया। अपने बचाव में हमने उनका हाथ पकड़कर झटका दिया तो उनका आला (स्टेथोस्कोप) गिर गया। कुछ लोगों ने हमें पकड़कर वार्ड से बाहर कर दिया।
मामला बीआरडी मेडिकल कॉलेज गेट पर स्थित पुलिस चौकी में गया तो वहां हमने अपनी ही गलती मान ली लेकिन इसके बाद डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती और सोमवार शाम को उनके ससुर की मौत हो गई।
मृतक रामसेवक के बेटे संदीप सदमे में है। डॉक्टरों के व्यवहार ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। पिता के अंतिम कर्म में लगे संदीप घटना का जिक्र छिड़ते ही फफक पड़े।
बोले, क्या बताएं भाई। पिताजी को इलाज कराने लेकर गए थे, वहां तो बड़ी मुश्किल से लाश मिली। डॉक्टर यह भी देने को तैयार नहीं हो रहे थे। इलाज भी नहीं किया, मेरे जीजा को मारा और मुकदमा भी दर्ज कराया। वे बोल रहे थे कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
बहुत प्रेशर बनाओगे तो सारे डॉक्टर मिलकर हड़ताल कर देंगे। इसके बाद कई कर्मचारियों ने सुझाव दिया कि शिकायत करने से कहीं कुछ नहीं होगा, चुपचाप शव लेकर जाओ और क्रियाकर्म कर लो। हमें भी यही उचित लगा, गांव आकर क्रिया कर्म कर रहे हैं।
अब एसएसपी से मिलकर देंगे तहरीर
मृतक के दामाद रमेश मिश्रा का कहना है कि मेरे साथ जो घटना हुई, उसमें भी मैं समझौता करने को तैयार था। यहां तक कि पुलिस चौकी में यह तक कहा कि अगर खींचतान में स्टेथोस्कोप टूट गया है तो उसका भी दो-चार हजार रुपये दे दूंगा।
लेकिन इसके बाद डॉक्टर गाली देने लगे और कहा कि यह मशीन 25 हजार की आएगी। ससुर के इलाज के लिए मैं वहां से चुपचाप हट गया। यहां तक कि ससुर की मौत के बाद केवल डॉक्टरों के दुर्व्यवहार के डर से दुबारा मेडिकल कॉलेज भी नहीं गया। हमें ऐसा लगता है कि विवाद के बाद से डॉक्टरों ने हमारे मरीज का कोई इलाज नहीं किया।
इस वजह से मरीज की मौत हुई है, क्योंकि रविवार सुबह तक उनकी हालत ठीक थी। उन्हें जूस भी दिया गया था। वहां सीसीटीवी कैमरा लगा है, उसकी रिकार्डिंग देखी जा सकती है। हमारे पास अब यही विकल्प बचा है कि बुधवार को एसएसपी से मिलकर तहरीर देंगे। अगर वहां से केस दर्ज नहीं हुआ तो फिर कोर्ट का सहारा लेंगे। क्योंकि तीन दिन बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन न तो घटना की जानकारी ली, न ही किसी ने खेद जताया।
सीएमएस डॉ बीएन शुक्ला ने बताया कि मरीज के तीमारदार व डॉक्टर के बीच हुए विवाद की जानकारी दोनों पक्ष में से किसी ने भी अभी तक नहीं दी है। रही बात शव का पोस्टमार्टम कराने की तो, वह ऐसे केस में ही होता है, जिसमें पुलिस का हस्तक्षेप हो, या संदेह के आधार पर घरवाले ऐसा चाहते हों।
पीड़ित पक्ष को अगर पोस्टमार्टम कराना होता तो वह पुलिस की मदद ले सकते थे। पुलिस की निगरानी में पोस्टमार्टम हो जाता। लेकिन, वह अपनी इच्छा से शव लेकर गए। जब तक पीड़ित पक्ष सामने आकर कॉलेज या अस्पताल के जिम्मेदार अफसर को अपना लिखित शिकायती पत्र नहीं देता, इसकी जांच क्या होगी।