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Gorakhpur News: स्कूल और एसडीएम कार्यालय में एक ही समय उपस्थित मिले अध्यापक
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शिक्षक के दो जगह हस्ताक्षर से खुला फर्जीवाड़ा, कोर्ट में पेश साक्ष्यों के बाद हुआ निलंबन
कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर विभाग को दिया जांच के आदेश, नए जांच में दोष साबित
गोरखपुर। शिक्षा विभाग में एक शिक्षक का उपस्थिति को लेकर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्राथमिक विद्यालय असिलाभार उरुवा के सहायक अध्यापक राजेश सिंह का एक ही दिन में दो जगह उपस्थिति है। एक ही दिन विद्यालय और एसडीएम कार्यालय में भी उपस्थित होने का हस्ताक्षर मिला है। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में खंड शिक्षा अधिकारी ने राजेश सिंह को क्लीन चिट दे दी, लेकिन शिकायतकर्ता देवेंद्र प्रताप सिंह ने मामले को कोर्ट तक पहुंचाया। शिकायतकर्ता राजेश सिंह का भाई है। दोनों में बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राजेश सिंह शिक्षण कार्य से दूर रहकर व्यवसायिक कार्यों में शामिल रहते हैं। न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि 12 सितंबर और एक अक्तूबर 2024 को राजेश सिंह एसडीएम कार्यालय में उपस्थित थे। उन्होंने वहां शपथ पत्र दाखिल किया था। इसके बावजूद विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में उनके हस्ताक्षर मौजूद थे।
कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर शिक्षा विभाग ने दोबारा जांच शुरू की। इस बार जांच में पुष्टि हुई कि राजेश सिंह ने विद्यालय में झूठी उपस्थिति दर्ज की थी। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह (बीएसए) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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10 मार्च को जारी निलंबन आदेश के अनुसार, जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक राजेश सिंह को वेतन नहीं मिलेगा। उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, बशर्ते वे कोई अन्य व्यवसाय, व्यापार या सेवायोजन में संलग्न न हों। बीएसए ने कहा कि इसी तरह के अन्य मामलों की भी जांच की जाएगी।
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कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर विभाग को दिया जांच के आदेश, नए जांच में दोष साबित
गोरखपुर। शिक्षा विभाग में एक शिक्षक का उपस्थिति को लेकर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। प्राथमिक विद्यालय असिलाभार उरुवा के सहायक अध्यापक राजेश सिंह का एक ही दिन में दो जगह उपस्थिति है। एक ही दिन विद्यालय और एसडीएम कार्यालय में भी उपस्थित होने का हस्ताक्षर मिला है। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू की।
शुरुआती जांच में खंड शिक्षा अधिकारी ने राजेश सिंह को क्लीन चिट दे दी, लेकिन शिकायतकर्ता देवेंद्र प्रताप सिंह ने मामले को कोर्ट तक पहुंचाया। शिकायतकर्ता राजेश सिंह का भाई है। दोनों में बंटवारे को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राजेश सिंह शिक्षण कार्य से दूर रहकर व्यवसायिक कार्यों में शामिल रहते हैं। न्यायालय में पेश किए गए साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि 12 सितंबर और एक अक्तूबर 2024 को राजेश सिंह एसडीएम कार्यालय में उपस्थित थे। उन्होंने वहां शपथ पत्र दाखिल किया था। इसके बावजूद विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में उनके हस्ताक्षर मौजूद थे।
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कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर शिक्षा विभाग ने दोबारा जांच शुरू की। इस बार जांच में पुष्टि हुई कि राजेश सिंह ने विद्यालय में झूठी उपस्थिति दर्ज की थी। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह (बीएसए) ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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10 मार्च को जारी निलंबन आदेश के अनुसार, जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक राजेश सिंह को वेतन नहीं मिलेगा। उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, बशर्ते वे कोई अन्य व्यवसाय, व्यापार या सेवायोजन में संलग्न न हों। बीएसए ने कहा कि इसी तरह के अन्य मामलों की भी जांच की जाएगी।