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शिखा दुबे हत्याकांड : पांच मई को सुनवाई... अलग हो चुका है दीपू
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इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में पूजा की हत्या कर शिखा के पहनाए गए थे कपड़े
कैंट इलाके की रहने वाली शिखा और उसके प्रेमी दीपू व ट्रांसपोर्ट कारोबारी पर हत्या का आरोप
गोरखपुर। इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुए चर्चित शिखा दुबे हत्याकांड की अगली सुनवाई सिविल कोर्ट के एडीजे -2 की कोर्ट में पांच मई को होगी। 14 साल से चल रहे इस केस में कई गवाहों की गवाही हो चुकी है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक दीपू और शिखा जमानत पर बाहर आने के बाद अलग-अलग रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि शिखा लखनऊ में किसी निजी कंपनी में काम कर रही है।
सोनभद्र की पूजा की हत्या करके उसे शिखा के कपड़े पहनाकर उसका रूप दिया गया था। मामले में शिखा दुबे, उसके प्रेमी दीपू और ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव को पुलिस ने आरोपी बनाया था। वहीं शिखा दुबे के अधिवक्ता बच्चू सिंह ने बताया कि इस केस में विवेचक सेवानिवृत अश्वनी सिन्हा की गवाही अहम है। बीमारी की वजह छह माह से उनकी गवाही नहीं हो सकी है। विवेचक अश्वनी सिन्हा ने बातचीत में बताया कि गुड़गांव में कैंसर का इलाज करा रहा हूं। बीमारी की वजह से बोलने में परेशानी होती है। बताया कि इस केस का पर्दाफाश करने के लिए पूरी टीम ने बहुत मेहनत की थी। मेरी भी इच्छा है कि आरोपियों को सजा दिलवाउं।
शिखा का नहीं पूजा का था शव
वारदात 11 जून 2011 की है। सिंघड़िया में एक युवती का शव मिला था। कद-काठी और उम्र से अनुमान लगाया गया कि शव इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से लापता युवती शिखा दुबे का है। शिखा के पिता को बुलाया गया। रिश्तेदार भी जुटे, सबने माना कि शव शिखा का ही है। पिता रामप्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर बेटी की हत्या की आशंका जताई और केस दर्ज करा दिया। शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। पुलिस की जांच में पता चला कि दीपू भी घर से लापता है। छानबीन में पुलिस को खबर मिली कि दीपू सोनभद्र में है। पुलिस टीम सोनभद्र पहुंची तो वहां उसके साथ शिखा भी मिली। पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर गोरखपुर ले आई। दोनों से पूछताछ में पता चला कि शव सोनभद्र की पूजा (25) का था।
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कैंट इलाके की रहने वाली शिखा और उसके प्रेमी दीपू व ट्रांसपोर्ट कारोबारी पर हत्या का आरोप
गोरखपुर। इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुए चर्चित शिखा दुबे हत्याकांड की अगली सुनवाई सिविल कोर्ट के एडीजे -2 की कोर्ट में पांच मई को होगी। 14 साल से चल रहे इस केस में कई गवाहों की गवाही हो चुकी है। वहीं, सूत्रों के मुताबिक दीपू और शिखा जमानत पर बाहर आने के बाद अलग-अलग रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि शिखा लखनऊ में किसी निजी कंपनी में काम कर रही है।
सोनभद्र की पूजा की हत्या करके उसे शिखा के कपड़े पहनाकर उसका रूप दिया गया था। मामले में शिखा दुबे, उसके प्रेमी दीपू और ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव को पुलिस ने आरोपी बनाया था। वहीं शिखा दुबे के अधिवक्ता बच्चू सिंह ने बताया कि इस केस में विवेचक सेवानिवृत अश्वनी सिन्हा की गवाही अहम है। बीमारी की वजह छह माह से उनकी गवाही नहीं हो सकी है। विवेचक अश्वनी सिन्हा ने बातचीत में बताया कि गुड़गांव में कैंसर का इलाज करा रहा हूं। बीमारी की वजह से बोलने में परेशानी होती है। बताया कि इस केस का पर्दाफाश करने के लिए पूरी टीम ने बहुत मेहनत की थी। मेरी भी इच्छा है कि आरोपियों को सजा दिलवाउं।
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शिखा का नहीं पूजा का था शव
वारदात 11 जून 2011 की है। सिंघड़िया में एक युवती का शव मिला था। कद-काठी और उम्र से अनुमान लगाया गया कि शव इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से लापता युवती शिखा दुबे का है। शिखा के पिता को बुलाया गया। रिश्तेदार भी जुटे, सबने माना कि शव शिखा का ही है। पिता रामप्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर बेटी की हत्या की आशंका जताई और केस दर्ज करा दिया। शव का अंतिम संस्कार भी कर दिया। पुलिस की जांच में पता चला कि दीपू भी घर से लापता है। छानबीन में पुलिस को खबर मिली कि दीपू सोनभद्र में है। पुलिस टीम सोनभद्र पहुंची तो वहां उसके साथ शिखा भी मिली। पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर गोरखपुर ले आई। दोनों से पूछताछ में पता चला कि शव सोनभद्र की पूजा (25) का था।
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