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रिंग रोड : सहारा एस्टेट की तरफ बनेगा ताल फ्रंट और बोट जेटी
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कुनराघाट से सहारा एस्टेट तक बन रहा रिंग रोड
गोरखपुर। रामगढ़ताल के किनारे कुनराघाट से सहारा एस्टेट तक रिंग रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) यहां डबल लेन की सड़क बनाने के साथ ही ताल फ्रंट और बोट जेटी का निर्माण भी कराएगा। इसके बन जाने से देवरिया बाईपास रोड स्थित कॉलोनीवासियों को आवागमन में सहूलियत तो मिलेगी ही साथ में ताल फ्रंट और जेटी का आनंद भी ले सकेंगे।
रिंग रोड के इस पैच पर 3.50 किमी में मिट्टी भराई का काम करीब किया जा चुका है। वहीं 500 मीटर तक सड़क बनाने के लिए गिट्टी भी डाली जा चुकी है। साथ ही ताल की तरफ पाइलिंग के बाद कंक्रीट और स्टील की बीम ढाली जा रही है। इसी बीम पर स्टील की रेलिंग लगाई जाएगी। सड़क निर्माण में करीब 28 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शुक्रवार को जीडीए के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार ने मौके का निरीक्षण किया और जरूरी दिशा निर्देश दिए। इस सड़क के निर्माण में काश्तकारों की जमीन भी है, जिसके लिए प्राधिकरण समझौते के आधार पर रजिस्ट्री करा कर मुआवजा दे रहा है। डीएम की ओर से मुआवजे के रूप में 3.50 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर तय की गई है। कुछ भू स्वामियों ने रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि उपलब्ध करा दी है।
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गोरखपुर। रामगढ़ताल के किनारे कुनराघाट से सहारा एस्टेट तक रिंग रोड का निर्माण कार्य चल रहा है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) यहां डबल लेन की सड़क बनाने के साथ ही ताल फ्रंट और बोट जेटी का निर्माण भी कराएगा। इसके बन जाने से देवरिया बाईपास रोड स्थित कॉलोनीवासियों को आवागमन में सहूलियत तो मिलेगी ही साथ में ताल फ्रंट और जेटी का आनंद भी ले सकेंगे।
रिंग रोड के इस पैच पर 3.50 किमी में मिट्टी भराई का काम करीब किया जा चुका है। वहीं 500 मीटर तक सड़क बनाने के लिए गिट्टी भी डाली जा चुकी है। साथ ही ताल की तरफ पाइलिंग के बाद कंक्रीट और स्टील की बीम ढाली जा रही है। इसी बीम पर स्टील की रेलिंग लगाई जाएगी। सड़क निर्माण में करीब 28 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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शुक्रवार को जीडीए के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार ने मौके का निरीक्षण किया और जरूरी दिशा निर्देश दिए। इस सड़क के निर्माण में काश्तकारों की जमीन भी है, जिसके लिए प्राधिकरण समझौते के आधार पर रजिस्ट्री करा कर मुआवजा दे रहा है। डीएम की ओर से मुआवजे के रूप में 3.50 करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर तय की गई है। कुछ भू स्वामियों ने रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि उपलब्ध करा दी है।
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