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Gorakhpur News: संतकबीरनगर के दो अस्पताल संचालकों को भेजा गया नोटिस
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ठगी के शिकार इंश्योरेंस कंपनियों ने विवेचक से साधा संपर्क
गोरखपुर। चर्चित डिसेंट हॉस्पिटल ठगी प्रकरण में जांच का दायरा अब संतकबीरनगर तक पहुंच गया है। फर्जी क्लेम और उपचार दिखाकर लाखों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने संतकबीरनगर जिले के दो निजी अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किया है। वहीं, ठगी के शिकार कई इंश्योरेंस कंपनियों ने विवेचक से संपर्क साधकर धोखाधड़ी में शामिल अस्पतालों और एजेंटों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, डिसेंट हॉस्पिटल के माध्यम से दर्जनों बीमा कंपनियों से फर्जी तरीके से क्लेम निकालने और इलाज के नाम पर कागजात में हेराफेरी कर रकम वसूलने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो संतकबीरनगर के विवेकानंद हॉस्पिटल और वैष्णवी हॉस्पिटल में भी फर्जी क्लेम की पोल खुल गई। जांच में सामने आया है कि विवेकानंद हॉस्पिटल ने पिछले एक वर्ष में 32 फर्जी मरीजों के नाम पर करीब 16 लाख रुपये के इंश्योरेंस क्लेम लिए हैं। रामगढ़ताल पुलिस की जांच टीम जब दोनों अस्पतालों में पहुंची तो इसके पहले ही दोनों अस्पतालों के संचालक मौके से भाग गए। जांच टीम ने विवेकानंद हॉस्पिटल से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। वहीं, वैष्णवी हॉस्पिटल से मिले कागजात और रजिस्टर की गहन जांच जारी है।
विवेचक ने अब इन अस्पतालों के रजिस्टर और रिकॉर्ड मांगे हैं, ताकि फर्जी भर्ती और बिलिंग का मिलान किया जा सके। विवेचक ने दोनों अस्पताल संचालकों को नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। पुलिस के मुताबिक, अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराओं में नामजद केस दर्ज किया जाएगा।
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कोट
ठगी का शिकार हुई बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पुलिस को ठोस दस्तावेज सौंपे हैं। जिनमें फर्जी क्लेम की राशि और संबंधित एजेंटों के नाम शामिल हैं। पूरे प्रकरण की छानबीन की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संतकबीरनगर व आसपास के अन्य अस्पतालों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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गोरखपुर। चर्चित डिसेंट हॉस्पिटल ठगी प्रकरण में जांच का दायरा अब संतकबीरनगर तक पहुंच गया है। फर्जी क्लेम और उपचार दिखाकर लाखों रुपये की ठगी के मामले में पुलिस ने संतकबीरनगर जिले के दो निजी अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किया है। वहीं, ठगी के शिकार कई इंश्योरेंस कंपनियों ने विवेचक से संपर्क साधकर धोखाधड़ी में शामिल अस्पतालों और एजेंटों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, डिसेंट हॉस्पिटल के माध्यम से दर्जनों बीमा कंपनियों से फर्जी तरीके से क्लेम निकालने और इलाज के नाम पर कागजात में हेराफेरी कर रकम वसूलने का खुलासा हुआ था। पुलिस ने जब जांच आगे बढ़ाई तो संतकबीरनगर के विवेकानंद हॉस्पिटल और वैष्णवी हॉस्पिटल में भी फर्जी क्लेम की पोल खुल गई। जांच में सामने आया है कि विवेकानंद हॉस्पिटल ने पिछले एक वर्ष में 32 फर्जी मरीजों के नाम पर करीब 16 लाख रुपये के इंश्योरेंस क्लेम लिए हैं। रामगढ़ताल पुलिस की जांच टीम जब दोनों अस्पतालों में पहुंची तो इसके पहले ही दोनों अस्पतालों के संचालक मौके से भाग गए। जांच टीम ने विवेकानंद हॉस्पिटल से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। वहीं, वैष्णवी हॉस्पिटल से मिले कागजात और रजिस्टर की गहन जांच जारी है।
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विवेचक ने अब इन अस्पतालों के रजिस्टर और रिकॉर्ड मांगे हैं, ताकि फर्जी भर्ती और बिलिंग का मिलान किया जा सके। विवेचक ने दोनों अस्पताल संचालकों को नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। पुलिस के मुताबिक, अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उनके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की धाराओं में नामजद केस दर्ज किया जाएगा।
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ठगी का शिकार हुई बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पुलिस को ठोस दस्तावेज सौंपे हैं। जिनमें फर्जी क्लेम की राशि और संबंधित एजेंटों के नाम शामिल हैं। पूरे प्रकरण की छानबीन की जा रही है। जरूरत पड़ने पर संतकबीरनगर व आसपास के अन्य अस्पतालों को भी जांच के दायरे में लाया जाएगा।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी