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Gorakhpur News: जंगल की आजादी के आगे चिड़ियाघर की खातिर भी देती है तनाव

Sat, 10 May 2025 01:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 01:00 AM IST
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Gorakhpur News: In front of the freedom of the forest, the sake of the zoo also creates tension
बब्बर शेर पटौदी भी बीमारः शक्करबाग से आने के बाद से ही बीमार है पटौदी, कैनाइन डिस्टेंपर से उबरने के बाद भी दिखता है असर
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इटावा लायन सफारी में भी हुआ था इलाज, औसत उम्र पार कर गया है पटौदी, खुराक भी हो गई कम
गोरखपुर। जंगल की आजादी भोग चुके बब्बर शेर जब चिड़ियाघर आते हैं तो यहां बाड़े की कम जगह की वजह से वे सुस्त हो जाते हैं। शिकार वाले भोजन के आगे बर्तन में रखकर दिया गया मांस भी उन्हें रास नहीं आता, बल्कि ऐसा माहौल उनमें तनाव बढ़ाता है। शेर पटौदी का भी यही हाल है। एक बार वह कैनाइन डिस्टेंपर (संक्रामक बीमारी) से उबर चुका है। इसके बाद से ही वह अक्सर बीमार रहता है। सालभर में एक बार उसका इलाज जरूर होता है।
पटौदी को गुजरात के जूनागढ़ स्थित शक्करबाग प्राणि उद्यान से इटावा लायन सफारी में लाया गया था। गुजरात में ही एक बार उसे कैनाइन डिस्टेंपर हुआ था। इलाज के बाद वह ठीक हो गया। लेकिन, इसके बाद से वह पहले की तरह फिट नहीं रहता। इटावा सफारी में भी उसकी तबीयत खराब हुई थी। गोरखपुर आने के बाद साल में एक बार वह बीमार पड़ जाता है। महीनेभर इलाज के बाद वह ठीक होता है।
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पटौदी यहां हमेशा सुस्त नजर आता है। बाड़े में उसकी गतिविधियां भी कम रहती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि चिड़ियाघर में आने के बाद ज्यादातर बब्बर शेर सुस्त हो जाते हैं। यहां उन्हें कम जगह मिलती है। पटौदी करीब 15 वर्ष का हो चुका है। यही एक शेर की औसत उम्र भी होती है। बूढ़ा होने की वजह से भी वह अक्सर बीमार रहता है। इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) की टीम ने उसका इलाज किया है। लेकिन, उसकी स्थिति अभी भी बहुत ठीक नहीं है।
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मनपसंद भोजन के लिए भी रहते हैं परेशान
बब्बर शेर जंगल में अपनी पसंद के अनुसार जानवर का शिकार कर उसका मांस खाते हैं। वहां वह अलग-अलग प्रकार के जानवरों का मांस खाते हैं। लेकिन, चिड़ियाघर में उन्हें एक ही तरह का मांस दिया जाता है। यह भी कारण है कि वह एक समय के बाद कम भोजन करते हैं। एक तरह का मांस खाकर उनका मन भर जाता है।
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