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Gorakhpur News: तस्करी यूं ही चली तो फिर कहावत बदलेगी-ऊंट नहीं, इंसान के मुंह में जीरा
Thu, 25 Apr 2024 07:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी
संवाद न्यूज एजेंसी
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 25 Apr 2024 07:26 AM IST
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जीरा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कुछ समय पहले ही जीरे को लेकर कहावत बदलती दिखाई दे रही थी। लगने लगा था कि भाव इतने बढ़ेंगे तो लोग जीरा खाना भूल जाएंगे। तब ऊंट नहीं, इंसान के मुंह में जीरा बोला जाएगा। जीरे के दाम 510 रुपये तक पहुंचे और आम लोगों के बीच भी ऐसा कोहराम मचा कि महंगाई की सूची में एक और मुद्दा जुड़ गया था।
सरकारी तंत्र ने मशक्कत और सख्ती से इसे अब 280 रुपये पर तो ला दिया, मगर तस्करी नहीं थमी तो फिर भाव उछाल ले सकते हैं। फिर जीरे को लेकर कहावत बदल ही जाएगी।
नेपाल सीमा पर धरपकड़ के साथ एक और खेल साफ हो गया कि तस्करी के चक्कर जमाखोरी बढ़ी और जमकर दाम बढ़ाए थे। अंदाजा इसी से लगा लें कि इसी हफ्ते नेपाल सीमा पर जीरा तस्करों से भारी मात्रा में बरामदगी हुई है।
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पूछताछ में भेद खुला कि 280 रुपये में मंडी में बिक रहा जीरा नेपाल में 850 रुपये तक बिक रहा है। यही वजह है कि जमाखोर धड़ल्ले से तस्करी कर जीरा नेपाल भेज रहे हैं। चिंता की बात यह है कि सरकारी तंत्र जरा भी चूका तो फिर जमाखोर इसके भाव बढ़ाने से चूकेंगे नहीं।
भारत से बड़े पैमाने पर जीरे की तस्करी नेपाल में हो रही है। इस तस्करी का सारा खेल गोरखपुर मंडी से जुड़ा है। गाेरखपुर से नेपाल बार्डर तक पहुंचते ही जीरा दोगुना, जबकि सीमा पार होते ही करीब तीन गुना महंगा बिकने लगता है। भंसार बचाने के लिए तस्करों के माध्यम से यह माल सीमा पार कराया जाता है।
तस्करों से खुले खेल के मुताबिक गुजरात की बड़ी मंडी ऊंझा से जीरा गोरखपुर मंडी में आ रहा है। वहां से ट्रकों में जीरा आता है। गोरखपुर की थोक मंडी में जीरा 280 रुपये में बिक रहा है, जो नेपाल बॉर्डर सोनौली जाते ही भारतीय क्षेत्र में 350-500 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
इसके अवैध कारोबार में लगे व्यापारी वहां जीरा को अवैध गोदामों में रखते हैं और कैरियर के माध्यम से उसे बॉर्डर पार कराते हैं। सीमा पार होते ही वही जीरा 850 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। समय-समय पर रेट घटता-बढ़ता रहता है।
नेपाल सीमा से हर हफ्ते दो करोड़ की तस्करी
बुधवार को गोरखपुर किराना मंडी में जीरा के कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि जीरा में बड़ा खेल चल रहा है। नेपाल में जीरा और काली मिर्च की खपत अधिक है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण भारत के अलावा अन्य देशों से नेपाल में मसाले सहित अन्य पदार्थों का आयात बहुत कम कर दिया गया है।
भारतीय क्षेत्र से ही ये सामान जाते हैं, तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं। एक अन्य व्यापारी ने बताया कि गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर पर हर सप्ताह दो करोड़ रुपये का जीरा नेपाल बॉर्डर तक जाता है। जीरा पर भंसार 50 रुपये किलो है। भंसार बचाने के लिए तस्करों को नेटवर्क काम कर रहा है।
चायपत्ती में भी मिलावट
प्रदेश में सात माह पहले चायपत्ती में मिलावट की जांच पर जोर दिया गया था, क्योंकि इसमें नमूनों में हानिकारक तत्व मिले थे, लेकिन इसकी जांच ठप है। चायपत्ती में भूरे रंग के छोटे-छोटे टुकड़े मिलाने से चाय गाढ़ी हो जाती है और स्वाद भी अच्छा होता है, लेकिन यह सेहत के लिए हानिकारक है।
मंडी के चायपत्ती व्यापारी अनिल बजाज ने बताया कि थोक बाजार में चायपत्ती 90 से 250 रुपये किलो तक बिक रही है। गुणवत्ता की परख लोगों को खुद करनी होगी।
अब होगी मसालों की गुणवत्ता की जांच
अभी हाल ही में एक एशियाई देश ने भारत के दो प्रतिष्ठित ब्रांड के मसालाें पर रसायनिक तत्व होने के कारण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया ने एफएसएसएआई को सभी पिसे हुए मसालों की जांच कर बीस दिन के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
इस आदेश के बाद व्यापारियों में भी हलचल मच गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष (2023-24) में 35 नमूनों की जांच की थी, जिसमें एक रिपोर्ट में हानिकारक रंग पाया गया था।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा कुमार गुंजन ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निरंतर जांच की जा रही है। नमूने फेल होने पर कार्रवाई की जा रही है। जीरा, काली मिर्च में मिलावट की जांच की जाएगी, जबकि पिसे हुए मसालों के भी नमूने लिए जाएंगे।
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सरकारी तंत्र ने मशक्कत और सख्ती से इसे अब 280 रुपये पर तो ला दिया, मगर तस्करी नहीं थमी तो फिर भाव उछाल ले सकते हैं। फिर जीरे को लेकर कहावत बदल ही जाएगी।
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नेपाल सीमा पर धरपकड़ के साथ एक और खेल साफ हो गया कि तस्करी के चक्कर जमाखोरी बढ़ी और जमकर दाम बढ़ाए थे। अंदाजा इसी से लगा लें कि इसी हफ्ते नेपाल सीमा पर जीरा तस्करों से भारी मात्रा में बरामदगी हुई है।
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पूछताछ में भेद खुला कि 280 रुपये में मंडी में बिक रहा जीरा नेपाल में 850 रुपये तक बिक रहा है। यही वजह है कि जमाखोर धड़ल्ले से तस्करी कर जीरा नेपाल भेज रहे हैं। चिंता की बात यह है कि सरकारी तंत्र जरा भी चूका तो फिर जमाखोर इसके भाव बढ़ाने से चूकेंगे नहीं।
भारत से बड़े पैमाने पर जीरे की तस्करी नेपाल में हो रही है। इस तस्करी का सारा खेल गोरखपुर मंडी से जुड़ा है। गाेरखपुर से नेपाल बार्डर तक पहुंचते ही जीरा दोगुना, जबकि सीमा पार होते ही करीब तीन गुना महंगा बिकने लगता है। भंसार बचाने के लिए तस्करों के माध्यम से यह माल सीमा पार कराया जाता है।
तस्करों से खुले खेल के मुताबिक गुजरात की बड़ी मंडी ऊंझा से जीरा गोरखपुर मंडी में आ रहा है। वहां से ट्रकों में जीरा आता है। गोरखपुर की थोक मंडी में जीरा 280 रुपये में बिक रहा है, जो नेपाल बॉर्डर सोनौली जाते ही भारतीय क्षेत्र में 350-500 रुपये प्रति किलो बिक रहा है।
इसके अवैध कारोबार में लगे व्यापारी वहां जीरा को अवैध गोदामों में रखते हैं और कैरियर के माध्यम से उसे बॉर्डर पार कराते हैं। सीमा पार होते ही वही जीरा 850 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। समय-समय पर रेट घटता-बढ़ता रहता है।
नेपाल सीमा से हर हफ्ते दो करोड़ की तस्करी
बुधवार को गोरखपुर किराना मंडी में जीरा के कारोबार से जुड़े एक व्यापारी ने बताया कि जीरा में बड़ा खेल चल रहा है। नेपाल में जीरा और काली मिर्च की खपत अधिक है। अंतरराष्ट्रीय समझौतों के कारण भारत के अलावा अन्य देशों से नेपाल में मसाले सहित अन्य पदार्थों का आयात बहुत कम कर दिया गया है।
भारतीय क्षेत्र से ही ये सामान जाते हैं, तस्कर इसका फायदा उठा रहे हैं। एक अन्य व्यापारी ने बताया कि गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर पर हर सप्ताह दो करोड़ रुपये का जीरा नेपाल बॉर्डर तक जाता है। जीरा पर भंसार 50 रुपये किलो है। भंसार बचाने के लिए तस्करों को नेटवर्क काम कर रहा है।
चायपत्ती में भी मिलावट
प्रदेश में सात माह पहले चायपत्ती में मिलावट की जांच पर जोर दिया गया था, क्योंकि इसमें नमूनों में हानिकारक तत्व मिले थे, लेकिन इसकी जांच ठप है। चायपत्ती में भूरे रंग के छोटे-छोटे टुकड़े मिलाने से चाय गाढ़ी हो जाती है और स्वाद भी अच्छा होता है, लेकिन यह सेहत के लिए हानिकारक है।
मंडी के चायपत्ती व्यापारी अनिल बजाज ने बताया कि थोक बाजार में चायपत्ती 90 से 250 रुपये किलो तक बिक रही है। गुणवत्ता की परख लोगों को खुद करनी होगी।
अब होगी मसालों की गुणवत्ता की जांच
अभी हाल ही में एक एशियाई देश ने भारत के दो प्रतिष्ठित ब्रांड के मसालाें पर रसायनिक तत्व होने के कारण प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद स्पाइसेस बोर्ड ऑफ इंडिया ने एफएसएसएआई को सभी पिसे हुए मसालों की जांच कर बीस दिन के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
इस आदेश के बाद व्यापारियों में भी हलचल मच गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने बीते वित्तीय वर्ष (2023-24) में 35 नमूनों की जांच की थी, जिसमें एक रिपोर्ट में हानिकारक रंग पाया गया था।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा कुमार गुंजन ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निरंतर जांच की जा रही है। नमूने फेल होने पर कार्रवाई की जा रही है। जीरा, काली मिर्च में मिलावट की जांच की जाएगी, जबकि पिसे हुए मसालों के भी नमूने लिए जाएंगे।