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एचओ कोटा : अब सभी ट्रेनों में होगी कन्फर्म टिकट की रैंडम जांच
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रेलवे बोर्ड ने मांगी डिटेल, मंत्रालय से एचओ कोटा में एजेंट की भूमिका भी जांची जाएगी
कोटा आवंटन सेल में अधिकृत रेलकर्मी ही जाएंगे, बाकी पर लगी रोक
गोरखपुर। रेल राज्यमंत्री के पीए के पैड पर एचओ कोटा आवंटित कराने और प्रत्येक यात्री से 5500 रुपये लेने के आरोपों की जांच अब रेलवे बोर्ड अपने स्तर से कराएगा। इस संबंध में बोर्ड ने डिटेल मांगी है। साथ ही अब हर ट्रेन में एचओ कोटा से कन्फर्म हुए टिकट की रैंडम जांच टीटीई करेंगे और यात्री से फॉर्म भरवाएंगे।
एचओ कोटा के तहत टिकट कन्फर्म कराने में हो रही गड़बड़ी को देखते हुए रेल प्रशासन ने सख्ती बरती है। एचओ कोटा आवंटन सेल में अधिकृत रेलकर्मी ही जाएंगे। दूसरे विभागों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
रेल अफसर के फर्जी लेटरहेड पर कोटा के तहत टिकट कन्फर्म कराने के बाद अब रेल मंत्रालय से आए फैक्स के जरिये एचओ कोटा के लिए लेटरहेड पर पांच यात्रियों से रुपये लेने के मामले में सख्ती बरती गई है। पहले दिल्ली और मुंबई की कुछ ट्रेनों में रैंडम जांच हो रही थी, लेकिन अब सभी ट्रेनों में एचओ कोटा से कन्फर्म हुए टिकट की जांच करने को कहा गया है।
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इसके अलावा हर सप्ताह एक कामर्शियल विभाग के अधिकारी की भी ट्रेन में जांच के लिए ड्यूटी लगाई जाएगी। वह ट्रेन में यात्री के पास जाएंगे और फीडबैक लेंगे। गड़बड़ी पकड़े जाने पर कोटा आवंटित कराने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छह जून को काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में एक ही पीएनआर पर पांच यात्रियों का टिकट एचओ कोटा से कन्फर्म किया गया। इसके लिए रेल मंत्रालय से फैक्स आया था। ट्रेन में जब यात्री ने रैंडम जांच के तहत यात्री से पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने एक एजेंट को प्रति टिकट 5500 यानी कुल 27500 रुपये दिए थे।
इस मामले में रेलवे बोर्ड ने टिकट की डिटेल मांगी है, ताकि पता चल सके कि पांचों यात्री एक परिवार के हैं या अलग-अलग। इसके बाद रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम जांच करेगी।
एक अफसर की भूमिका संदिग्ध...मामला रफा-दफा
रेलवे में एचओ कोटा से टिकट कन्फर्म कराने के मामले पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले एक अफसर की भूमिका संदिग्ध मिली थी। उनके लेटरहेड पर कई टिकट एचओ कोटा से कन्फर्म हुए। पता चला कि किसी एजेंट ने टिकट कन्फर्म करवाए। मामला अफसर का था, इसलिए जांच आगे नहीं बढ़ी और मामला रफा-दफा कर दिया गया। अब उस अफसर की ओर से भेजे गए एचओ कोटा पर खास निगरानी रखी जा रही है।
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कोटा आवंटन सेल में अधिकृत रेलकर्मी ही जाएंगे, बाकी पर लगी रोक
गोरखपुर। रेल राज्यमंत्री के पीए के पैड पर एचओ कोटा आवंटित कराने और प्रत्येक यात्री से 5500 रुपये लेने के आरोपों की जांच अब रेलवे बोर्ड अपने स्तर से कराएगा। इस संबंध में बोर्ड ने डिटेल मांगी है। साथ ही अब हर ट्रेन में एचओ कोटा से कन्फर्म हुए टिकट की रैंडम जांच टीटीई करेंगे और यात्री से फॉर्म भरवाएंगे।
एचओ कोटा के तहत टिकट कन्फर्म कराने में हो रही गड़बड़ी को देखते हुए रेल प्रशासन ने सख्ती बरती है। एचओ कोटा आवंटन सेल में अधिकृत रेलकर्मी ही जाएंगे। दूसरे विभागों और बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
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रेल अफसर के फर्जी लेटरहेड पर कोटा के तहत टिकट कन्फर्म कराने के बाद अब रेल मंत्रालय से आए फैक्स के जरिये एचओ कोटा के लिए लेटरहेड पर पांच यात्रियों से रुपये लेने के मामले में सख्ती बरती गई है। पहले दिल्ली और मुंबई की कुछ ट्रेनों में रैंडम जांच हो रही थी, लेकिन अब सभी ट्रेनों में एचओ कोटा से कन्फर्म हुए टिकट की जांच करने को कहा गया है।
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इसके अलावा हर सप्ताह एक कामर्शियल विभाग के अधिकारी की भी ट्रेन में जांच के लिए ड्यूटी लगाई जाएगी। वह ट्रेन में यात्री के पास जाएंगे और फीडबैक लेंगे। गड़बड़ी पकड़े जाने पर कोटा आवंटित कराने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छह जून को काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में एक ही पीएनआर पर पांच यात्रियों का टिकट एचओ कोटा से कन्फर्म किया गया। इसके लिए रेल मंत्रालय से फैक्स आया था। ट्रेन में जब यात्री ने रैंडम जांच के तहत यात्री से पूछताछ की तो पता चला कि उन्होंने एक एजेंट को प्रति टिकट 5500 यानी कुल 27500 रुपये दिए थे।
इस मामले में रेलवे बोर्ड ने टिकट की डिटेल मांगी है, ताकि पता चल सके कि पांचों यात्री एक परिवार के हैं या अलग-अलग। इसके बाद रेलवे बोर्ड की विजिलेंस टीम जांच करेगी।
एक अफसर की भूमिका संदिग्ध...मामला रफा-दफा
रेलवे में एचओ कोटा से टिकट कन्फर्म कराने के मामले पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो कुछ दिनों पहले एक अफसर की भूमिका संदिग्ध मिली थी। उनके लेटरहेड पर कई टिकट एचओ कोटा से कन्फर्म हुए। पता चला कि किसी एजेंट ने टिकट कन्फर्म करवाए। मामला अफसर का था, इसलिए जांच आगे नहीं बढ़ी और मामला रफा-दफा कर दिया गया। अब उस अफसर की ओर से भेजे गए एचओ कोटा पर खास निगरानी रखी जा रही है।