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Gorakhpur News: हर माह मानचित्र स्वीकृत कर जीडीए कमाएगा साढ़े पांच करोड़
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शासन के निर्देश पर शुरू हो रही है शमन प्रक्रिया
अवैध निर्माण के मानचित्र संशोधन के साथ होंगे स्वीकृत
गोरखपुर। जीडीए में शमन यानी मानचित्रों को शुल्क लेकर स्वीकृत करने का काम फिर शुरू हो रहा है। इसके लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। अवैध निर्माण को वैध करके जीडीए हर माह साढ़े पांच करोड़ रुपये कमाएगा।
अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में शासन की ओर से भी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस पर शमन की प्रक्रिया पुन: शुरू करने का निर्णय लिया गया। अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण अब अंतिम विकल्प होगा। इससे पहले मकान मालिक अपने अवैध निर्माण को वैध कराने के लिए आवेदन करेंगे, जिसे जीडीए के अफसर अतिरिक्त शुल्क लेकर स्वीकृत कर सकेंगे।
सचिव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि स्वीकृत मानचित्र के सापेक्ष यदि अन्य निर्माण कर लिया गया है तो प्राधिकरण 10 फीसदी निर्माण को नियमित कर सकता है। उसके लिए शमन शुल्क जमा कराया जाएगा। ऐसा निर्माण जिनका शमन नहीं हो सकता उसे तोड़ने के लिए भवन स्वामी को 15 दिन का वक्त दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त यदि किसी ने बिना मानचित्र स्वीकृत कराए भवन निर्माण कर लिया है तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक मानचित्र बनवाने और शमन कराने के लिए मौका मिलेगा।
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अवैध निर्माण के मानचित्र संशोधन के साथ होंगे स्वीकृत
गोरखपुर। जीडीए में शमन यानी मानचित्रों को शुल्क लेकर स्वीकृत करने का काम फिर शुरू हो रहा है। इसके लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। अवैध निर्माण को वैध करके जीडीए हर माह साढ़े पांच करोड़ रुपये कमाएगा।
अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण से संबंधित उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में शासन की ओर से भी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इस पर शमन की प्रक्रिया पुन: शुरू करने का निर्णय लिया गया। अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण अब अंतिम विकल्प होगा। इससे पहले मकान मालिक अपने अवैध निर्माण को वैध कराने के लिए आवेदन करेंगे, जिसे जीडीए के अफसर अतिरिक्त शुल्क लेकर स्वीकृत कर सकेंगे।
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सचिव उदय प्रताप सिंह ने बताया कि स्वीकृत मानचित्र के सापेक्ष यदि अन्य निर्माण कर लिया गया है तो प्राधिकरण 10 फीसदी निर्माण को नियमित कर सकता है। उसके लिए शमन शुल्क जमा कराया जाएगा। ऐसा निर्माण जिनका शमन नहीं हो सकता उसे तोड़ने के लिए भवन स्वामी को 15 दिन का वक्त दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त यदि किसी ने बिना मानचित्र स्वीकृत कराए भवन निर्माण कर लिया है तो उसे भी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक मानचित्र बनवाने और शमन कराने के लिए मौका मिलेगा।
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