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Gorakhpur News: दूध सप्लाई वाहन में मछली..फिर भी नौ ट्रांसपोर्टरों पर ही खाद्य लाइसेंस

Thu, 27 Feb 2025 01:12 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2025 01:12 AM IST
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Gorakhpur News: Fish in milk supply vehicle...yet food license only on nine transporters
100 ट्रांसपोर्ट कर रहे हैं खाद्य सामग्री की ढुलाई, भंडारण और ढुलाई के लिए जरूरी है लाइसेंस
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शहर में कई बार ऐसे मामले पकड़े गए हैं, जहां बिना लाइसेंस के कराया गया था भंडारण
गोरखपुर। सब्जी, दूध, घी, तेल, फल आदि जितनी भी खाद्य सामग्रियां हैं, उनके परिवहन और भंडारण के लिए भी खाद्य सुरक्षा विभाग से लाइसेंस की जरूरत होती है। शहर में ऐसे करीब 100 ट्रांसपोर्टर हैं, जो रोजाना खाद्य सामग्रियां ढोते हैं, लेकिन इनमें से केवल नौ के पास ही खाद्य सामग्रियों के परिवहन और भंडारण की अनुमति है। ऐसा तब है जब होटल में दूध सप्लाई कर रहे वाहन में मछली मिलने पर बखेड़ा हो चुका है। दरअसल, बिना अनुमति के चलने वाले ट्रांसपोर्टर खाद्य सामग्री की स्वच्छता और शुद्धता का ख्याल नहीं रखते। अब विभाग अभियान चलाकर पंजीकरण बढ़ाएगा।
खाद्य सामग्री की स्वच्छता और शुद्धता बनी रहे, इसके लिए परिवहन व भंडारण के लिए नियम तय किए हैं। जैसे कि दूध, ब्रेड और हरी सब्जी आदि जल्द खराब होने वाली सामग्री ऐसे वाहन से ढोए जाएंगे, जिसमें फ्रीजर की व्यवस्था हो तो वहीं आलू-प्याज, दाल, आटा जैसी खाद्य सामग्री का परिवहन ऐसे वाहन से होगा, जिसमें वातावरण शुष्क हो।
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इसी प्रकार मछली, मांस, अंडा ढोने वाले वाहनों से शाकाहारी सामग्री नहीं ढोई जा सकती, लेकिन इनका कहीं कोई ख्याल नहीं रखा जाता। पिछले सप्ताह शहर के एक होटल को दूध की सप्लाई देने जा रही गाड़ी की जांच की गई तो पता लगा कि जिस ट्रे में दूध के पैकेट रखे हैं, उसमें पहले मछली आई थी। वहां से खाली हुए ट्रे में दूध का पैकेट डाल दिया गया था। यह खाद्य सामग्री की शुद्धता और स्वच्छता मानकों का खुला उल्लंघन है।
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इससे पहले पकड़ी गई काली मिर्च और चायपत्ती का भंडारण परिवहन के लाइसेंस पर किया गया था, जबकि खाद्य सामग्री भंडारण के लिए खाद्य सुरक्षा का लाइसेंस होना चाहिए। खाद्य सुरक्षा विभाग में केवल नौ ट्रांसपोर्टरों ने ही अपना पंजीकरण कराया है।

विभाग के पास रहेगी वाहनों की जानकारी
नौसड़ में पकड़ी गई चायपत्ती के प्रकरण की जांच में यह तथ्य सामने आया कि ट्रांसपोर्टर अपने गोदाम को अधिकृत बताते हुए यहां से शहर के अलावा देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज से लेकर कानपुर तक माल भेज रहा था। जिस जगह पर चायपत्ती का भंडारण किया गया था, वहां खाद्य सामग्री की शुद्धता के लिए जो मानदंड होने चाहिए, वे नहीं थे। इसी प्रकार लालडिग्गी इलाके में पुरानी मछली मंडी के पास एक ट्रांसपोर्टर के गोदाम से काली मिर्च मंगाने और बेचने का धंधा चल रहा था। उसके पास भी लाइसेंस नहीं था। खाद्य सुरक्षा विभाग में पंजीकरण नहीं होने की वजह से यहां कोई जांच भी नहीं होती थी।


वर्जन
इसके लिए ट्रांसपोर्टरों को जागरूक किया जाएगा। उन्हें अपने पंजीकरण के साथ विभाग काे केवल यह बताना होता है कि वे किस-किस गाड़ी नंबर से सामान ढोने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा गोदाम कहां है, जिससे कि वहां जांच कर आए सामान की गुणवत्ता व शुद्धता की जानकारी की जा सके।
-डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग
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