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बीआरडी : एमआरआई जांच के लिए फरवरी तक करें इंतजार
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच फरवरी तक फुल
तत्काल जांच के लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर होना पड़ रहा निर्भर
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दो महीने तक के स्लॉट बुक हो गए हैं। ऐसे में तत्काल जांच कराने आये मरीजों को निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में स्थित एमआरआई जांच केंद्र में एक ही मशीन है। यहां एक दिन में 20 से 25 मरीजों की एमआरआई जांच हो पाती है। कुछ महीने पहले मशीन खराब हो जाने के कारण भी जांच नहीं हो पा रही है। अब फरवरी माह के अंत तक लंबी वेटिंग के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल के लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर जांच करवाना पड़ रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए 2500 से 4500 रुपये लगते हैं। जबकि निजी केंद्रों में दोगुनी राशि का भुगतान करना पड़ता है। इसके कारण मरीजों को आर्थिक रूप से परेशानी होती है।
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डॉक्टर ने तत्काल एमआरआई जांच कराने के लिए कहा था। फरवरी तक इंतजार करने को कहा गया है। तत्काल जांच की कोई व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में निजी एमआरआई केंद्र पर जा रहा हूं।
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गुड्डू सिंह, तीमारदार
- न्यूरोसर्जरी विभाग में डाॅक्टर को दिखाया था, डॉक्टर ने एमआरआई जांच करवाकर रिपोर्ट दिखाने के लिए कहा। यहां पर जांच करवाने के लिए दो महीने इंतजार करना होगा। ऐसे में बीमारी और बढ़ जाएगी। निजी केंद्र में पैसे अधिक लग रहे हैं।
साहिबा बानो, मरीज
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तत्काल जांच के लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर होना पड़ रहा निर्भर
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दो महीने तक के स्लॉट बुक हो गए हैं। ऐसे में तत्काल जांच कराने आये मरीजों को निजी जांच केंद्रों में जाना पड़ रहा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू चिकित्सालय में स्थित एमआरआई जांच केंद्र में एक ही मशीन है। यहां एक दिन में 20 से 25 मरीजों की एमआरआई जांच हो पाती है। कुछ महीने पहले मशीन खराब हो जाने के कारण भी जांच नहीं हो पा रही है। अब फरवरी माह के अंत तक लंबी वेटिंग के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल के लिए मरीजों को निजी केंद्रों पर जांच करवाना पड़ रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच के लिए 2500 से 4500 रुपये लगते हैं। जबकि निजी केंद्रों में दोगुनी राशि का भुगतान करना पड़ता है। इसके कारण मरीजों को आर्थिक रूप से परेशानी होती है।
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डॉक्टर ने तत्काल एमआरआई जांच कराने के लिए कहा था। फरवरी तक इंतजार करने को कहा गया है। तत्काल जांच की कोई व्यवस्था न होने के कारण मजबूरी में निजी एमआरआई केंद्र पर जा रहा हूं।
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गुड्डू सिंह, तीमारदार
- न्यूरोसर्जरी विभाग में डाॅक्टर को दिखाया था, डॉक्टर ने एमआरआई जांच करवाकर रिपोर्ट दिखाने के लिए कहा। यहां पर जांच करवाने के लिए दो महीने इंतजार करना होगा। ऐसे में बीमारी और बढ़ जाएगी। निजी केंद्र में पैसे अधिक लग रहे हैं।
साहिबा बानो, मरीज