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एम्स : मेडिकल कॉलेज के मेस का संचालन करने वाली एजेंसी पर होगी कार्रवाई
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अचानक पहुंचे कार्यकारी निदेशक ने कमियों को चिन्हित किया
नई बनी पांच सदस्यीय कमेटी इन कमियों को दूर कराने के उपाय सुझाएगी
एजेंसी को जारी होगा कारण बताओ नोटिस, एमओयू की शर्तों के अनुसार होगी कार्रवाई
गोरखपुर। एम्स के मेडिकल कॉलेज के मेस की गुणवत्ता नहीं सुधर रही है। लगातार मिल रही शिकायतों की जांच के लिए सोमवार सुबह एम्स के कार्यकारी निदेशक अकेले मेस पहुंचे तो कई खामियां दिखीं। उन्होंने मेस संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी करने, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को निर्माण से संबंधित कमियों को दूर कराने और पांच सदस्यीय विशेष कमेटी को पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण में एजेंसी पर एमओयू की शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
पिछले सप्ताह एम्स के मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले 60 से अधिक छात्र-छात्राओं को फूड प्वाॅइजनिंग हो गई थी। छानबीन में पता लगा कि इसमें से करीब 30 लोगों ने चिकन बिरयानी खायी थी। फूड प्वाॅइजनिंग के चलते 19 छात्र-छात्राओं की तबीयत अधिक खराब हुई थी, जिन्हें एम्स के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनी थी। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सोमवार की सुबह कार्यकारी निदेशक सीधे एम्स के मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में बने किचन में पहुंचे। वहां काफी गंदगी दिखी। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता, सामानों की स्थिति भी ठीक नहीं दिखी।
शाम को निदेशक ने बताया कि निरीक्षण में गंभीर कमियां मिली हैं। इस पर कारण बताओ नोटिस भेजकर पांच दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। एजेंसी की तरफ से जवाब मिलने के बाद इस मामले में अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
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अन्य से भी हुआ है जवाब-तलब
नई एजेंसी चयन में बरती गई लापरवाही को कार्यकारी निदेशक ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी के पास नेशनल लेवल का पंजीकरण है। लेकिन स्थानीय स्तर का पंजीकरण होना भी जरूरी था, फिर भी इसकी अनदेखी कैसे हो गई। इस पर भी जवाब तलब किया गया है। इसके अलावा एम्स के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को भी निर्देश दिए गए हैं कि परिसर में जलनिकासी समेत निर्माण से संबंधित अन्य कमियों को तत्काल दूर कराएं। इसके बाद मेस से संबंधित मरम्मत की जिम्मेदारी मेस संचालन करने वाली एजेंसी की होगी। किसी भी हाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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नई बनी पांच सदस्यीय कमेटी इन कमियों को दूर कराने के उपाय सुझाएगी
एजेंसी को जारी होगा कारण बताओ नोटिस, एमओयू की शर्तों के अनुसार होगी कार्रवाई
गोरखपुर। एम्स के मेडिकल कॉलेज के मेस की गुणवत्ता नहीं सुधर रही है। लगातार मिल रही शिकायतों की जांच के लिए सोमवार सुबह एम्स के कार्यकारी निदेशक अकेले मेस पहुंचे तो कई खामियां दिखीं। उन्होंने मेस संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी करने, इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को निर्माण से संबंधित कमियों को दूर कराने और पांच सदस्यीय विशेष कमेटी को पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। इस प्रकरण में एजेंसी पर एमओयू की शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
पिछले सप्ताह एम्स के मेडिकल कॉलेज व नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल में रहने वाले 60 से अधिक छात्र-छात्राओं को फूड प्वाॅइजनिंग हो गई थी। छानबीन में पता लगा कि इसमें से करीब 30 लोगों ने चिकन बिरयानी खायी थी। फूड प्वाॅइजनिंग के चलते 19 छात्र-छात्राओं की तबीयत अधिक खराब हुई थी, जिन्हें एम्स के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनी थी। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सोमवार की सुबह कार्यकारी निदेशक सीधे एम्स के मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में बने किचन में पहुंचे। वहां काफी गंदगी दिखी। इसके अलावा खाने की गुणवत्ता, सामानों की स्थिति भी ठीक नहीं दिखी।
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शाम को निदेशक ने बताया कि निरीक्षण में गंभीर कमियां मिली हैं। इस पर कारण बताओ नोटिस भेजकर पांच दिन के अंदर जवाब मांगा गया है। मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। एजेंसी की तरफ से जवाब मिलने के बाद इस मामले में अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई होगी।
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अन्य से भी हुआ है जवाब-तलब
नई एजेंसी चयन में बरती गई लापरवाही को कार्यकारी निदेशक ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने कहा कि एजेंसी के पास नेशनल लेवल का पंजीकरण है। लेकिन स्थानीय स्तर का पंजीकरण होना भी जरूरी था, फिर भी इसकी अनदेखी कैसे हो गई। इस पर भी जवाब तलब किया गया है। इसके अलावा एम्स के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट को भी निर्देश दिए गए हैं कि परिसर में जलनिकासी समेत निर्माण से संबंधित अन्य कमियों को तत्काल दूर कराएं। इसके बाद मेस से संबंधित मरम्मत की जिम्मेदारी मेस संचालन करने वाली एजेंसी की होगी। किसी भी हाल में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।