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गोरखपुर में फर्जी परवाना: 52 लोगों ने किया फर्जीवाड़ा...मास्टरमाइंड नाटा ने पत्नी और मां के नाम कराई जमीन
Wed, 15 Oct 2025 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Oct 2025 01:00 AM IST
सार
सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) के पेशकार अंकुर श्रीवास्तव की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 19 फरवरी 2025 को सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई फर्जीवाड़ा के और मामले सामने आते गए।
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फर्जी तरीके से कागज तैयार करवाए गए
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नदी के किनारे की जमीनों पर फर्जी परवाना आदेश (नामांतरण) से नाम दर्ज कराने के मामले में पुलिस की जांच में 52 लोगों के नाम सामने आए हैं। सूत्रों की माने तो कुशीनगर के शिवपुर निवासी सुखदेव पाल उर्फ नाटा ही मास्टर माइंड है। उसने अपने, पत्नी और मां के नाम से भी फर्जीवाड़ा करके दस्तावेजों में जमीन करवा ली है। पुलिस जल्द ही चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है।
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फरवरी 2025 में फर्जी परवाना के जरिये जमीन हस्तांतरण का मामला सामने आया था। रुद्रपुर, देवरिया के 11 और खड्डा, कुशीनगर के तीन मामले पकड़े गए थे जिनमें लोगों ने फर्जी परवाना के आधार पर दूसरे की जमीन अपने नाम करा ली।
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सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) के पेशकार अंकुर श्रीवास्तव की तहरीर पर कैंट पुलिस ने 19 फरवरी 2025 को सभी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का केस दर्ज किया था। पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई फर्जीवाड़ा के और मामले सामने आते गए।
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अब तक 52 लोगों के नाम सामने आए हैं जिन्होंने फर्जीवाड़ा किया है। पुलिस ने सभी मामलों में साक्ष्य भी जुटा लिए हैं। अब तक 40 एकड़ से ज्यादा जमीन का फर्जीवाड़ा पकड़ में आ चुका है। इन जमीनों के बारे में तहसील स्तर पर शिकायत हुई थी लेकिन मामले की जांच दबा दी गई।
सूत्रों की मानें तो रुद्रपुर और खड्डा तहसील में छह से ज्यादा प्राइवेट कर्मचारी और अधिवक्ताओं पर भी संदेह है जिन्होंने फर्जीवाड़े में मदद की है। पुलिस अब इनसे भी पूछताछ करने की तैयारी में है।
नाटा ने अपने गांव के लोगों के नाम भी कराया फर्जीवाड़ा
पुलिस की विवेचना में सामने आया है कि महराजगंज के शिवपुर गांव का रहने वाला सुखदेव पाल उर्फ नाटा ने तहसीलकर्मियों से मिलकर फर्जीवाड़ा शुरू किया। पहले उसने फर्जी परवाना आदेश के माध्यम में अपने नाम जमीन हस्तांरित कराई फिर पत्नी और मां का नाम खतौनी में चढ़वाया।
इसके बाद उसने अपने गांव के ही तीन अन्य लोगों के नाम दस्तावेजों में चढ़वा लिया। इसकी पैरवी करने खुद वही आता था। कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उसने अपना नेटवर्क रुद्रपुर में भी फैला लिया और वहां भी फर्जीवाड़ा में मदद की।
फर्जी परवाना प्रकरण में जांच के दौरान कुछ और लोगों के नाम संदिग्ध मिले हैं। सभी के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं जल्द ही जांच पूरी कर ली जाएगी: अनुराग सिंह, सीओ कैंट