फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur News: 40 years ago, Chhath was celebrated at a few places, today there are countless ghats.

Gorakhpur News: 40 साल पहले गिने चुने जगहों पर होती थी छठ, आज अनगिनत घाट

Sun, 26 Oct 2025 02:15 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 26 Oct 2025 02:15 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur News: 40 years ago, Chhath was celebrated at a few places, today there are countless ghats.
धीरे-धीरे बढ़ी छठ महापर्व की प्रासंगिकता, लोगों में बढ़ी आस्था
विज्ञापन


बुद्धिजीवियों ने कहा बिहार व कुशीनगर के लोग ही जिले में ज्यादा करते थे छठ

गोखपुर। धीरे-धीरे छठ पर्व की प्रासंगिकता बढ़ी है। बुद्धिजीवियों ने कहा कि बिहार व कुशीनगर के लोग ही जिले में पहले ज्यादा छठ करते थे। इससे यहां के लोगों में भी धीरे-धीरे आस्था बढ़ने लगी। 40 साल पहले शहर के कुछ ही जगहों पर लोग छठ लोग मनाते थे। लेकिन इस समय छठ की बढ़ती महत्ता को लेकर लगभग हर घर में मनाया जा रहा है। इससे घाटों पर जगह नहीं मिल रही। लोग गली मोहल्लों में अनगिनत कृत्रिम घाट बनाकर छठ पूजा कर रहे हैं।

रेलवे सुरक्षा बल के एएसआई पद से वर्ष 2017 में सेवानिवृत्त बिहार के निवासी जलेश्वर मिश्र का कहना है कि रेलवे में नौकरी लगने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे के क्षेत्रों में सेवा का अवसर मिला। बिहार से परिवार को गोरखपुर लाए, पहले यहां छठ सभी नहीं करते थे। हमारे घर छठ होता था इसमें आसपास के लोग शामिल होते थे। साथ में घाट पर जाते थे। रेलवे सुरक्षा बल कॉलोनी में निवास के दौरान वर्ष 1992 व 1993 में रामगढ़ताल में छठ करने हम सब जाते थे। वहां लगभग 10 के आसपास ही संख्या होती थी। धीरे-धीरे छठ की महत्ता जैसे-जैसे बढ़ी यह लोक आस्था का महापर्व लोगों की आस्था का केंद्र बन गया। आज रामगढ़ताल ही नहीं सूर्यकुंड धाम, मानसरोवर, भीम सरोवर, राप्ती तट सहित शहर के लगभग 400 से ज्यादा कृत्रिम घाट पर यह सूर्योपासना का पर्व होता है।
विज्ञापन

वहीं बेतियाहाता हनुमान मंदिर के महंत आचार्य राम नारायण त्रिपाठी ने बताया कि सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं। जिनकी पूजा करने से सुख समृद्धि आती है। पहले इसका प्रचलन बिहार में था। जैसे-जैसे बिहार के लोग जिले में निवास करने लगे, छठ करने से यहां के लोगों में भी आस्था बढ़ने लगी। यहां भी छठ महापर्व होने लगा। पहले की अपेक्षा इस समय शहर में छठ महापर्व ज्यादा होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed