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हौसला: प्रशासन ने नहीं दी मदद, अपने खर्च से बनवा रहे नाव
Thu, 09 Sep 2021 04:17 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 09 Sep 2021 04:17 PM IST
सार
मंझरिया गांव के कैलाश 25 हजार खर्च कर ग्रामीणों के लिए बनवा रहे नाव
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मंझरिया के कैलाश की नाव तैयार करते कारीगर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर के बाढ़ग्रस्त मंझरिया में प्रशासन ने नाव नहीं दी तो गांव वालों की सुविधा के लिए कैलाश अपने खर्च पर नाव बनवा रहे हैं। नाव बनवाने के लिए उन्हें 25 हजार रुपये से अधिक खर्च करना पड़ रहा है। मलौली बांध के उत्तर स्थित मंझरिया गांव राप्ती नदी की बाढ़ से घिर गया है। गांव में करीब तीन सौ परिवार हैं।
कैलाश बताते हैं कि गांव में चार लोगों के पास नाव है, इसलिए प्रशासन ने नाव नहीं दी। मुख्य मार्ग से करीब सौ मीटर दूर स्थित इस गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ नाव ही माध्यम है। तीन सौ परिवारों के सदस्यों को लाने ले जाने के लिए चार नावें कम पड़ रही थीं। अपने इस्तेमाल और गांव वालों की सुविधा के लिए, उन्होंने नाव बनवाने का फैसला किया। चार दिन में नाव तैयार हो जाएगी तो गांव वालों को सुविधा होगी। गांव के पढ़ने वाले बच्चों के लिए नाव खासतौर पर उपलब्ध रहेगी, ताकि उन्हें यूनिवर्सिटी, कॉलेज जाने में दिक्कत न हो। नाव बना रहे कारीगर किशन ने बताया कि नाव की लागत 25 हजार रुपये आएगी। नाव में एक बार में अधिकतम दस लोग बैठ सकेंगे।
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कैलाश बताते हैं कि गांव में चार लोगों के पास नाव है, इसलिए प्रशासन ने नाव नहीं दी। मुख्य मार्ग से करीब सौ मीटर दूर स्थित इस गांव से बाहर निकलने के लिए सिर्फ नाव ही माध्यम है। तीन सौ परिवारों के सदस्यों को लाने ले जाने के लिए चार नावें कम पड़ रही थीं। अपने इस्तेमाल और गांव वालों की सुविधा के लिए, उन्होंने नाव बनवाने का फैसला किया। चार दिन में नाव तैयार हो जाएगी तो गांव वालों को सुविधा होगी। गांव के पढ़ने वाले बच्चों के लिए नाव खासतौर पर उपलब्ध रहेगी, ताकि उन्हें यूनिवर्सिटी, कॉलेज जाने में दिक्कत न हो। नाव बना रहे कारीगर किशन ने बताया कि नाव की लागत 25 हजार रुपये आएगी। नाव में एक बार में अधिकतम दस लोग बैठ सकेंगे।
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