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कोरोना से जंग: गोरखपुर जिला अस्पताल में अब होंगे वेंटिलेटर के 50 बेड, इंसेफेलाइटिस की तर्ज पर होगा कोरोना का इलाज
Sun, 30 May 2021 10:25 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 30 May 2021 10:25 AM IST
सार
जिला अस्पताल में 17 से बढ़कर 50 वेंटिलेटर के बेड होंगे। सभी सामुदायिक केंद्र को विभाग कर रहा चाक-चौबंद।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिला अस्पताल में पहले से मौजूद 17 वेंटिलेटर बेड की संख्या में इजाफा करके उसे 50 किया जा रहा है। सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि जिस तरह से सघन इंतजामों और कड़ी निगरानी की बदौलत इंसेफेलाइटिस का उन्मूलन किया गया। उसी तर्ज पर कोविड की तीसरी लहर पर काबू पाने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
सीएमओ ने बताया कि जिले में 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी ) हैं। यहां इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बने हुए हैं। अब इनका उपयोग कोविड के उपचार में होगा। इसी तरह गगहा, चौरीचौरा और पिपरौली में तीन-तीन बेड के पीडियाट्रिक वेंटिलेटर वार्ड तैयार किए जा चुके हैं। कहा कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए पहले ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम को लगाया गया था।
बच्चों और बड़ों को बुखार होने पर वह पहले उन्हें सीएचसी पर भर्ती कराती थी, वहां हालत न सुधरने पर जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता था। ठीक उसी प्रकार यदि गांवों में किसी को भी बुखार अथवा कोरोना का लक्षण दिखता है तो तत्काल मोबाइल वैन जाकर उनकी जांच करती है और फिर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। यदि लक्षण मामूली हैं तो वहीं पर दवा की किट देकर होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है।
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सीएमओ ने बताया कि जिले में 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी ) हैं। यहां इंसेफ्लाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बने हुए हैं। अब इनका उपयोग कोविड के उपचार में होगा। इसी तरह गगहा, चौरीचौरा और पिपरौली में तीन-तीन बेड के पीडियाट्रिक वेंटिलेटर वार्ड तैयार किए जा चुके हैं। कहा कि इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए पहले ग्रामीण इलाकों में आशा कार्यकर्ता और एएनएम को लगाया गया था।
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बच्चों और बड़ों को बुखार होने पर वह पहले उन्हें सीएचसी पर भर्ती कराती थी, वहां हालत न सुधरने पर जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता था। ठीक उसी प्रकार यदि गांवों में किसी को भी बुखार अथवा कोरोना का लक्षण दिखता है तो तत्काल मोबाइल वैन जाकर उनकी जांच करती है और फिर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। यदि लक्षण मामूली हैं तो वहीं पर दवा की किट देकर होम आइसोलेशन में रहने की सलाह दी जाती है।
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