गोरखपुर: विदेशों में बेचते थे गोरखपुर से चोरी की गई कार, कार समेत दो गिरफ्तार, चरस भी बरामद
आरोपी सॉफ्टवेयर की मदद से कार चोरी की घटना को अंजाम देते थे। सॉफ्टवेयर को हर दो महीने में अपडेट करना पड़ता है। सॉफ्टवेयर की कीमत करीब तीन लाख रुपये है।
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शहर से कार चोरी कर विदेशों में बेचने वाले दो युवकों को कैंट पुलिस ने शनिवार को कूड़ाघाट के पास से गिरफ्तार करके जेल भिजवा दिया। उनके कब्जे से 2.8 किग्रा चरस और एक डॉक्टर के यहां से चुराई गई कार समेत दो चौपहिया बरामद हुए। पता चला है कि चुराए गए वाहन पहले नगालैंड ले जाए जाते, वहां से उन्हें पड़ोसी देशों भूटान व म्यांमार में बेच दिया जाता था।
आरोपियों की पहचान असम के अभयपुर निवासी खलूल रहमान और बिहार के शिकारपुर निवासी शेख मुबारक के रूप में हुई है। गिरोह का सरगना नगालैंड निवासी शब्बीर उर्फ डेविड और कृष सेमा है। एसपी सिटी सोनम कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि शनिवार को कैंट पुलिस ने इस गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से हाल ही में नंदानगर इलाके से चोरी हुई डॉ. प्रवीण की कार बरामद की गई। दोनों अपनी कार से आते थे। कहीं कार खड़ी रहती थी, उसकी रेकी करते थे। इसके बाद ड्राइविंग सीट का शीशा तोड़कर एक सॉफ्टवेयर के जरिए कार को चालू करके ले जाते थे। असम के नार्थ लखीमपुर जिले के ललोक क्षेत्र का रहने वाला, इनका एक साथी रामप्रताप सिंह फरार हो गया। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगी हैं।
सीसीटीवी कैमरे से मिली थी मदद
एसपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि 17 जनवरी 2021 की रात को नंदानगर से डॉ. प्रवीण सिंह की कार चोरी हुई थी। सीसीटीवी फुटेज में दो युवक कार चोरी करते और देवरिया रोड के एक पेट्रोल पंप पर तेल भराते हुए दिखे थे। पुलिस जांच में जुटी थी। जांच से पता चला कि कार को बिहार होते हुए नगालैंड भेजा गया था। शनिवार को ये कूड़ाघाट के पास आए थे, तब पुलिस ने पकड़ लिया। खलूल रहमान ने बताया कि वह असम में एक गैरेज में काम करता था। शेख मुबारक दिखावे के लिए दर्जी का काम करता था।
जेल में हुई थी दोस्ती
वर्ष 2019 में खलूल रहमान, कार चोरी के आरोप में जेल गया था। असम की जेल में उसकी मुलाकात रामप्रताप सिंह से हुई थी। जेल से छूटने के बाद दोनों गलत तरीके से रुपये कमाने में जुट गए। यहां उनकी मुलाकात नगालैंड के दीमापुर निवासी वाहन चोर गैंग के सरगना शब्बीर उर्फ डेविड से हुई। इसके बाद वे कार चोरी की वारदात करने लगे। इससे उन्हें मोटी कमाई होने लगी।
शब्बीर ने सिखाई थी वाहन चोरी की बारीकी
एसपी सिटी ने बताया कि शब्बीर ने मणिपुर ले जाकर आरोपियों को गाड़ियों चुराने की बारीकी सिखाई थी। एक सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध कराया। इस सॉफ्टवेयर की कीमत करीब तीन लाख है, जिसे हर तीन माह पर अपडेट कराना पड़ता है। खलूल रहमान ने शेख मुबारक उर्फ मुन्ना से गाड़ी चोरी करने की बात बताई तो उसने कहा कि वह बिहार का है, वह अक्सर गोरखपुर आता जाता है। गोरखपुर में हुंडई कंपनी की गाड़ियां ज्यादा हैं। आसानी से चोरी की घटना को अंजाम दिया जा सकेगा। इसके बाद वे अपनी कार से गोरखपुर आते थे। गोरखपुर आने से पहले अपनी गाड़ी का नंबर बदल देते थे, जो रजिस्ट्रेशन नंबर लगाते थे, वह दूसरी कार का होता था। ओएलएक्स पर बिकने वाली कारों का रजिस्ट्रेशन नंबर वे अपनी कार पर इस्तेमाल करते थे।
बाईपास से लेकर जाते थे चोरी की कार
चोरी के बाद आरोपी गाड़ियों में लगे जीपीएस व एलसीडी को निकाल देते थे और टोल प्लाजा से बचने के लिए बाईपास के रास्ते होकर देवरिया, बिहार होते हुए नगालैंड जाते थे।
विदेश में भी बेचते थे कार
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि कार को नगालैंड के दीमापुर निवासी गैंग के सरगना शब्बीर को देते थे। शब्बीर इन गाड़ियों को अपने साथी कृष सेमा के माध्यम से म्यांमार, भूटान पहुंचाता था, जिसके एवज में वहां से इन्हें अच्छी खासी रकम मिलती है। गोरखपुर के रामगढ़ताल व मोहद्दीपुर से चोरी हुई कार म्यांमार पहुंच चुकी है। नंदानगर से चोरी की गई कार को जल्द ही भूटान भेजा जाना था, लेकिन तब तक वे लोग पकड़े गए और गाड़ी को पुलिस ने बरामद कर लिया।