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गोरखपुर बीआरडी: जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में आया आईएमए, मांगों को बताया जायज

Wed, 29 Dec 2021 08:47 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Dec 2021 08:47 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज पहुंचे एसोसिएशन के पदाधिकारी, मांगों को बताया जायज। ओपीडी में सीनियर रेजीडेंटों ने मरीजों का किया इलाज।

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Gorakhpur BRD IMA came in support of junior doctors
जूनियर डॉक्टरों ने कैंडल मार्च निकालकर किया प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों ने बुधवार को मरीजों को सहूलियत देते हुए पर्चा काउंटर खुलवा दिया था। सीनियर डॉक्टरों ने ओपीडी में मरीजों का इलाज किया। इस बीच जूनियर डॉक्टर प्राचार्य कक्ष के पास विरोध जताते रहे। उनके समर्थन में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के सदस्य भी आ गए। उन्होंने प्राचार्य कार्यालय पर पहुंचकर प्रदर्शन किया।

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जानकारी के मुताबिक, पीजी की काउंसिलिंग न होने से नाराज प्रथम वर्ष के जूनियर डॉक्टर सोमवार से कार्य बहिष्कार कर रहे हैं। बुधवार को वे ट्रॉमा सेंटर पर इकट्ठा हुए। वे ओपीडी पर्चा काउंटर बंद करवाने की कोशिश किए, लेकिन मरीजों के विरोध और सीनियर डॉक्टरों के आगे आने के बाद वापस चले गए।
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जूनियर डॉक्टर सीनियरों से अनुरोध करते रहे कि वह उनका साथ देते हुए ओपीडी बंद कर दें। लेकिन, उनकी एक न सुनी। सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों की जांच करते रहे। इसकी वजह से मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ा। जूनियर रेजीडेंटों का कहना है कि पीजी की परीक्षा जनवरी में होनी थी जिसे सितंबर में कराया गया।
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इसी माह में परिणाम भी आ गया, लेकिन काउंसिलिंग अब तक नहीं हो सकी। इसकी वजह से जूनियर डॉक्टर प्रथम वर्ष के सामने संकट खड़ा हो गया है। उन्हें प्रथम व द्वितीय वर्ष जूनियर डाक्टरों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। काम का दबाव बढ़ गया है। इस दौरान आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर, डॉ. संजीव गुप्ता मौजूद रहे।

 

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों को समझाया गया कि वे पर्चा काउंटर न बंद कराएं। इस पर वह मान गए हैं। बुधवार को सभी विभागों की ओपीडी में मरीजों की जांच की गई। जो मरीज मंगलवार को वापस कर दिए गए थे उन्हें प्राथमिकता के आधार पर डॉक्टरों ने देखा।

दो हिस्सों में बंटे नर्सिंग होम संचालक

बीआरडी के जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन में नर्सिंग होम संचालक दो हिस्सों में बंट गए हैं। नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. खालिद अब्बासी ने कहा कि इस आंदोलन से मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। आर्थिक रूप से मरीजों का नुकसान हो रहा है। उन्हें इलाज नहीं मिल रहा है।

यह एसोसिएशन हड़ताल में विश्वास नहीं करता। न ही ऐसे किसी आंदोलन को समर्थन नहीं दे रहा है। वहीं, दूसरी तरफ यूपी नर्सिंग होम एसोसिएशन गोरखपुर शाखा के सचिव डॉ. अमित मिश्रा ने कहा कि जूनियर डॉक्टरों की मांग जायज है। उन पर काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। कोविड की तीसरी लहर जनवरी से फरवरी के बीच आ सकती है। कॉलेज व समाज को डॉक्टरों की जरूरत है। ऐसे में एसोसिएशन उनके साथ है।

 

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