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Gorakhpur News: शहर में अवैध तरीके से संचालित गोल्ड अस्पताल सीज, अभी कई और रडार पर- ये है कारण

Wed, 24 Jul 2024 03:29 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Wed, 24 Jul 2024 03:29 PM IST
सार

अमर उजाला ने सोमवार के अंक में एक बार फिर मरीज माफिया के सक्रिय होने का खेल उजागर किया था। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से हर माह 50 से 55 मरीज लापता होने के खुलासे को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने मामले की गोपनीय सूचना एकत्रित कराई। मंगलवार रात में 11 बजे एडीएम (सिटी) और एसपी (सिटी) की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को मेडिकल कॉलेज के पास गोल्ड अस्पताल की जांच के लिए भेजा।

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Gold Hospital being run illegally in Gorakhpur has been sealed
रात में टीम ने अस्पताल पर जाकर सील किया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मरीज माफिया नेटवर्क पर चोट करते हुए प्रशासन ने मंगलवार को अवैध रूप से चल रहे एक और निजी अस्पताल को सील कर दिया। लखनऊ में पंजीकृत डॉक्टर के नाम से चल रहे गोल्ड अस्पताल में भर्ती नौ मरीजों को मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में शिफ्ट किया गया।

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अमर उजाला ने सोमवार के अंक में एक बार फिर मरीज माफिया के सक्रिय होने का खेल उजागर किया था। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल से हर माह 50 से 55 मरीज लापता होने के खुलासे को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने मामले की गोपनीय सूचना एकत्रित कराई।
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मंगलवार रात में 11 बजे एडीएम (सिटी) और एसपी (सिटी) की अगुवाई में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को मेडिकल कॉलेज के पास गोल्ड अस्पताल की जांच के लिए भेजा। जांच में पता चला कि अस्पताल में नौ मरीज भर्ती हैं, लेकिन जो डॉक्टर अस्पताल का संचालन कर रहा है, उसका पंजीकरण लखनऊ का है। अस्पताल में कुछ और भी कमियां मिलीं। चर्चा है कि इसी अस्पताल में कुछ
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दिन पहले आशा कार्यकर्ताओं की बैठक हुई थी। इस पर दूसरे गुट ने पहुंचकर वहां हंगामा किया था। बात खुली तो पता लगा कि यहां ग्रामीण क्षेत्र से आशा कार्यकर्ताओं के जरिए मरीजों को लाया जाता है। इनमें से अधिकांश गर्भवती होती हैं।

प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल जाने के दौरान उन्हें सस्ता इलाज का झांसा देकर यहां भर्ती कराया जाता है। सीएमओ ने जांच के आदेश भी दिए, लेकिन रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं हुई। कार्रवाई के बाद से अन्य अस्पतालों में भी हड़कंप मचा हुआ है


डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि अस्पताल को सील कराकर जांच के आदेश दिए गए हैं। पता लगा है कि वहां के डॉक्टर का पंजीकरण लखनऊ में है। बिना पंजीकरण के वह यहां कैसे इतने समय से प्रैक्टिस कर रहा था, इसकी भी जांच कराई जाएगी। अब हर सप्ताह निजी अस्पतालों की जांच होगी।
 

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