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गीता प्रेस : कल्याण पत्रिका के संपादक राधेश्याम खेमका का निधन, 86 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

Sun, 04 Apr 2021 03:55 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 04 Apr 2021 03:55 PM IST
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Gita Press president of Kalyan Patrika Radheshyam Khemka passed away
मासिक पत्रिका कल्याण के संपादक एवं ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका - फोटो : अमर उजाला।
गीता प्रेस की विश्व प्रसिद्ध मासिक पत्रिका कल्याण के संपादक एवं ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष राधेश्याम खेमका का शनिवार को निधन हो गया। वे 86 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उन्होंने अपनी इच्छा के अनुसार अंतिम सांस काशी के केदारघाट पर ली। रात आठ बजे काशी में गंगा घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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राधेश्याम खेमका अपने पीछे पुत्र राजाराम खेमका, पुत्री राज राजेश्वरी, भतीजों गोपाल खेमका, कृष्ण कुमार खेमका व गणेश कुमार खेमका समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन से गीता प्रेस समेत धर्म-कर्म से जुड़े क्षेत्र के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। गीता प्रेस में दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। इस अवसर पर ट्रस्टी देवी दयाल अग्रवाल, माधव प्रसाद जालान, डॉ. लालमणि तिवारी समेत गीता प्रेस के सभी कर्मयोगी मौजूद रहे।
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38 वर्ष तक रहे कल्याण के संपादक
राधेश्याम खेमका ने वर्ष 1982 में नवंबर व दिसंबर माह के कल्याण का संपादन किया था। इसके बाद वर्ष 1983 के मार्च अंक से कल्याण के संपादक थे। उनकी जीजिविषा का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 86 वर्ष की उम्र में भी अप्रैल 2021 तक के अंकों का उन्होंने संपादन किया। उनके संपादन में कल्याण के 38 वार्षिक विशेषांक, 460 संपादित अंक प्रकाशित हुए। इस दौरान कल्याण की 9 करोड़ 54 लाख 46 हजार प्रतियां प्रकाशित हुईं। पुराणों एवं लुप्त हो रहे संस्कारों एवं कर्मकांड की पुस्तकों का प्रामाणिक संस्करण उनके संपादकत्व में प्रकाशित हुए।
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जीवनभर किया गंगाजल का सेवन
राधेश्याम खेमका बचपन से ही धार्मिक विचार के थे। बचपन से ही वे अपने पिता के साथ माघ मेले के दौरान काशी में एक महीने का कल्पवास रखते थे। पिछले कई दशकों से वे सिर्फ गंगा जल ही पीते थे। कहीं यात्रा पर जाना हुआ तो वे आवश्यकतानुसार गंगाजल लेकर चलते थे। वे धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज के कृपा पात्र थे।
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