{"_id":"60459f31b1c65b06bd2718d8","slug":"gita-makes-husband-self-sufficient-in-gorakhpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिला दिवस पर विशेष: गीता ने आपदा में तलाशा अवसर, खुद के साथ पति को भी बनाया आत्मनिर्भर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिला दिवस पर विशेष: गीता ने आपदा में तलाशा अवसर, खुद के साथ पति को भी बनाया आत्मनिर्भर
Mon, 08 Mar 2021 09:22 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 08 Mar 2021 09:22 AM IST
सार
- गीता रानी आत्मनिर्भर भारत अभियान का चेहरा बन गईं
- गीता ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और आपदा में अवसर तलाश लिया
विज्ञापन
गीता रानी।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में ब्रह्मपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत रानापार की रहने वाली बीए पास गीता रानी आत्मनिर्भर भारत अभियान का चेहरा बन गईं हैं। कोरोना काल में नौकरी छूटने पर जब पति घर लौट आए तो गीता के परिवार के सामने अचानक मुश्किलें खड़ी हो गईं।
गीता ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और आपदा में अवसर तलाश लिया। उन्होंने ‘चंदा महिला स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता लेकर न केवल परिवार को आर्थिक रूप से संभाला, बल्कि बैंक से दो लाख का ऋण लेकर पति दिनेश कुमार यादव की फर्नीचर की दुकान खुलवा दी।
गीता कहती हैं कि घर का खर्च चलाने और पति को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम रंग लाई। अब पति को दिल्ली-मुंबई नहीं जाना पड़ेगा। वह घर पर रहकर अच्छी कमाई कर सकेंगे। अफसरों और कुछ जागरूक लोगों से राय के बाद बैंक से दो लाख रुपये ऋण लिया था। गांव के पास बरहीं चौराहे पर फर्नीचर की दुकान खुलवा दी है।
विज्ञापन
गीता के मुताबिक उनकी शादी 2005 में हुई थी, लेकिन पढ़ाई जारी रखी। 2008 में स्नातक की डिग्री हासिल की। शादी के बाद पति कमाने बाहर चले गए। कोरोना संकट व लॉकडाउन के बीच वह घर लौटे। इससे चुनौती बढ़ गई। इसी बीच एनआरएलएम के पदाधिकारियों से संपर्क किया और चंदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ गई। बचपन से सिलाई का शौक था, लिहाजा इसे हथियार बनाया।
लॉकडाउन के दौरान मास्क बनाए। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को मास्क उपलब्ध कराया। स्कूल ड्रेस की सिलाई का काम भी मिल गया। इससे समूह व उससे जुड़ी महिलाओं को अच्छी आमदनी हुई। वर्तमान में समूह के पास पुष्टाहार वितरण समेत कई अन्य काम हैं। गीता कहती हैं कि महिलाएं थोड़ा हौसला दिखाएं तो परिवार को संभालने के साथ स्वयं को आत्मनिर्भर बना सकती हैं।
विज्ञापन
गीता ने इसे चुनौती के तौर पर लिया और आपदा में अवसर तलाश लिया। उन्होंने ‘चंदा महिला स्वयं सहायता समूह’ की सदस्यता लेकर न केवल परिवार को आर्थिक रूप से संभाला, बल्कि बैंक से दो लाख का ऋण लेकर पति दिनेश कुमार यादव की फर्नीचर की दुकान खुलवा दी।
विज्ञापन
गीता कहती हैं कि घर का खर्च चलाने और पति को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम रंग लाई। अब पति को दिल्ली-मुंबई नहीं जाना पड़ेगा। वह घर पर रहकर अच्छी कमाई कर सकेंगे। अफसरों और कुछ जागरूक लोगों से राय के बाद बैंक से दो लाख रुपये ऋण लिया था। गांव के पास बरहीं चौराहे पर फर्नीचर की दुकान खुलवा दी है।
विज्ञापन
गीता के मुताबिक उनकी शादी 2005 में हुई थी, लेकिन पढ़ाई जारी रखी। 2008 में स्नातक की डिग्री हासिल की। शादी के बाद पति कमाने बाहर चले गए। कोरोना संकट व लॉकडाउन के बीच वह घर लौटे। इससे चुनौती बढ़ गई। इसी बीच एनआरएलएम के पदाधिकारियों से संपर्क किया और चंदा महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ गई। बचपन से सिलाई का शौक था, लिहाजा इसे हथियार बनाया।
लॉकडाउन के दौरान मास्क बनाए। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को मास्क उपलब्ध कराया। स्कूल ड्रेस की सिलाई का काम भी मिल गया। इससे समूह व उससे जुड़ी महिलाओं को अच्छी आमदनी हुई। वर्तमान में समूह के पास पुष्टाहार वितरण समेत कई अन्य काम हैं। गीता कहती हैं कि महिलाएं थोड़ा हौसला दिखाएं तो परिवार को संभालने के साथ स्वयं को आत्मनिर्भर बना सकती हैं।