गोरखपुर: राप्तीनगर में एसटीपी लगाएगा जीडीए, 26 करोड़ रुपये होंगे खर्च
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि शहर के राप्तीनगर क्षेत्र में एसटीपी लगाया जाएगा। यह प्लांट इस क्षेत्र के मोहल्लों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन करेगा। इसपर करीब 26 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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राप्तीनगर क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों से निकलने वाले नालियों के गंदे पानी के शोधन के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) 10 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करने जा रहा है। यह प्लांट मानबेला में लगाया जाएगा। कुछ मोहल्लों के घरों से निकलने वाले घरों के गंदे पानी की सफाई के लिए यह शहर का पहला एसटीपी होगा। इसे लगाने में करीब 26 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
शहर के भीतर अभी रामगढ़ताल में गिरने वाले गंदे पानी के शोधन के लिए जल निगम ने दो एसटीपी लगा रखे हैं। जीडीए के मुताबिक मानबेला में प्रस्तावित इस एसटीपी की कार्ययोजना अगले पांच साल में बसने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इससे करीब 20 हजार घरों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित किया जा सकेगा।
मानबेला क्षेत्र में जीडीए की 316 एकड़ जमीन है। इसमें से मानबेला गांव में 186.60 एकड़, पोखरभिंडा में 14.62 एकड़, हामिदपुर में 17.11 एकड़, मिर्जापुर में 12.68 एकड़, फत्तेपुर में 73.94 एकड़, सलेमपुर में 11.14 एकड़ जमीन जीडीए ने अधिग्रहीत की है। इस पूरे क्षेत्रफल के 25 प्रतिशत पर आबादी बसी है।
इस क्षेत्र में जीडीए की राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पत्रकारपुरम एवं पत्रकारपुरम विस्तार आवासीय योजना विकसित की गई है। राप्तीनगर में आवास बनने लगे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना में 1120 लोगों को कब्जा दिया जा चुका है। भविष्य में यहां और भी ग्रुप हाउसिंग एवं भूखंड वाली योजनाएं शुरू की जाएंगी।
तैयार किया जा रहा आरएफपी
सहायक अभियंता जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि मोविंग बेस्ड बायोलाजिकल रिएक्टर (एमबीबीआर) तकनीकी से कम क्षेत्रफल में स्थापित होने वाले इस एसटीपी से इन घरों से निकलने वाले गंदे पानी को शोधित किया जा सकेगा। इसके लिए रिक्वेस्ट फार प्रपोजल (आरएफपी) तैयार किया जा रहा है। जो कंपनी इसे लगाएगी, उसे 10 साल तक अनुरक्षण भी करना होगा।
इस पूरे क्षेत्र की सीवर लाइन को इससे जोड़ा जाएगा। इसमें तृतीयक शोधन होगा। यानी सीवेज से नाइट्रेट व फास्फेट भी पूरी तरह से निकल जाएगा। अगले तीन साल में यह प्लांट संचालित होने लगेगा। शोधन के बाद निकलने वाले पानी से सिंचाई की जाएगी और इसमें ऐसी तकनीक होगी, जिससे ठोस अपशिष्ट से खाद भी बन सके।
लेक व्यू अपार्टमेंट में प्लांट
इससे पहले जीडीए ने तारामंडल स्थित लेक व्यू अपार्टमेंट में 120 केएलडी का प्लांट लगाया है। इस पूरे क्षेत्र से बरसात का पानी निकालने के लिए चिलुआताल तक नाला बनाया जाएगा।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि शहर के राप्तीनगर क्षेत्र में एसटीपी लगाया जाएगा। यह प्लांट इस क्षेत्र के मोहल्लों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी का शोधन करेगा। इसपर करीब 26 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।