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जीडीए : विस्तारित क्षेत्र में अब आसानी से पास होंगे नक्शे
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- 233 गांवों और तीन नगर पंचायतों को मिली बड़ी राहत, जीडीए बोर्ड की 131वीं बैठक में लिए गए कई अहम फैसले
गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तार क्षेत्र में शामिल तीन नगर पंचायतों और 233 नए राजस्व गांवों में अब नक्शा स्वीकृत कराने का रास्ता साफ हो गया है। शासन की ओर से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को जीडीए बोर्ड ने अंगीकृत कर लिया है। इससे उन क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति दी जा सकेगी, जहां अभी तक महायोजना तैयार नहीं है। सोमवार को कमिश्नर एवं जीडीए अध्यक्ष इंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में हुई प्राधिकरण बोर्ड की 131वीं बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
बैठक में सबसे पहले पिछली यानी 130वीं बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की पुष्टि की गई। इसके बाद सचिव ने 131वीं बैठक के एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं को बोर्ड के समक्ष रखा। विस्तार क्षेत्र में नक्शा स्वीकृति के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा के बाद शासन की एसओपी को लागू करने पर सहमति बनी। इसके दायरे में पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायत के साथ 233 नए राजस्व ग्राम शामिल हैं। एकीकृत मंडलीय कार्यालय निर्माण योजना के तहत सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास बनाए जाएंगे। इसके लिए उप श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश, गोरखपुर कार्यालय के पीछे स्थित 4000 वर्गमीटर भूमि का भू-उपयोग कार्यालय तथा सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक सुविधा से बदलकर आवासीय करने के प्रस्ताव को जीडीए बोर्ड ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। बोर्ड ने प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
गोरखपुर महायोजना प्रभावी होने के बाद आर्किटेक्ट, विकासकर्ताओं और आम लोगों की ओर से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण और आपत्तियां दी गई थीं। बोर्ड की बैठक में इन पर विस्तार से चर्चा की गई। संबंधित प्रस्तावों को शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि महायोजना के प्रावधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। बैठक के दौरान प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, नगर आयुक्त अजय जैन, सचिव प्रखर उत्तम सहित बोर्ड के सदस्य मौजूद रहे।
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खोराबार योजना में अब रुद्राक्ष और मानसरोवर एनक्लेव
खोराबार आवासीय योजना में निर्माणाधीन बहुमंजिली आवासीय परियोजनाओं का नामकरण भी किया गया। ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या आठ पर निर्माणाधीन ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवनों का नाम रुद्राक्ष एनक्लेव रखा गया है। वहीं, भूखंड संख्या सात पर निर्माणाधीन मिनी एमआईजी और एमआईजी भवनों का नाम मानसरोवर एनक्लेव होगा। जीडीए की बहुमंजिली योजना कुश्मी एनक्लेव का नाम बदलकर नवनाथ एनक्लेव करने पर भी बोर्ड ने सहमति दी।
ताल रिंग रोड और कई कॉलोनियां नगर निगम को होंगी हस्तांतरित
जीडीए की ओर से विकसित गोरक्ष एनक्लेव, पत्रकारपुरम, पत्रकारपुरम विस्तार और राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के साथ पैडलेगंज से आरकेबीके तक ताल रिंग रोड और पैडलेगंज से नया सवेरा फेज-1 तक की सड़क को अनुरक्षण के लिए नगर निगम को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। नगर निगम को 10 दिन के भीतर संयुक्त निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
रामगढ़ताल में फव्वारा चलाने के निर्देश
रामगढ़ताल को साफ रखने और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सुंदरीकरण एवं विकास कार्यों की समीक्षा की गई। बोर्ड ने जेटी पर स्थित फव्वारे का संचालन शुरू कराने के निर्देश दिए। नया सवेरा फेज-1 के प्रवेश द्वार के सामने सड़क पर भी प्रवेश द्वार की एकरूपता के अनुरूप निर्माण पर विचार करने को कहा गया।
ठेकेदारों के पंजीकरण का रास्ता साल में दो बार खुलेगा
जीडीए में सिविल और विद्युतीकरण कार्यों के लिए ठेकेदारों का पंजीकरण अब साल में दो बार मार्च और सितंबर में खोला जाएगा। इससे सभी श्रेणियों के ठेकेदारों को समान अवसर मिलने के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।
पुराने जीडीए भवनों का होगा पुनर्विकास
जर्जर और पुराने जीडीए परिसंपत्तियों के पुनर्विकास के लिए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) और जीडीए के माध्यम से शून्य वित्तीय भार के आधार पर काम कराने को सैद्धांतिक सहमति दी गई। बोर्ड ने विस्तृत विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस (मूलभूत सिद्धांत-2025) के अनुसार अनिस्तारित संपत्तियों के किए गए पुनर्मूल्यांकन पर भी बोर्ड ने चर्चा की। अब प्रत्येक संपत्ति का अलग-अलग विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट और प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रेक्षागृह का किराया हुआ कम
योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के बड़े और छोटे हॉल का किराया घटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। बड़े हॉल का किराया 4.13 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये और छोटे हॉल का किराया 2.24 लाख रुपये से घटाकर 47,200 रुपये किया गया है। प्रथम तल के दो छोटे हॉल को भी किराये पर देने की अनुमति दी गई। वहीं कैंटीन स्पेस और लाइब्रेरी हॉल को पीपीपी मॉडल पर देने का निर्णय लिया गया।
जीडीए में कामकाज की निगरानी होगी मजबूत, रिकॉर्ड होंगे डिजिटल
प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। बोर्ड ने अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने और जनता को सेवाएं जल्द उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचीबद्ध कार्यों को कराए जाने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी। इसके तहत काम में तेजी लाने और आम लोगों को सेवाएं जल्द उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। बोर्ड ने जीडीए के पुराने अभिलेखों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और डिजिटलीकरण से जुड़े कार्यों को ईओआई के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया ताकि योग्य संस्थाओं को अवसर मिल सके और कार्य पारदर्शी तरीके से कराया जा सके।
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गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विस्तार क्षेत्र में शामिल तीन नगर पंचायतों और 233 नए राजस्व गांवों में अब नक्शा स्वीकृत कराने का रास्ता साफ हो गया है। शासन की ओर से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को जीडीए बोर्ड ने अंगीकृत कर लिया है। इससे उन क्षेत्रों में भी भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृति दी जा सकेगी, जहां अभी तक महायोजना तैयार नहीं है। सोमवार को कमिश्नर एवं जीडीए अध्यक्ष इंद्र विक्रम सिंह की अध्यक्षता में हुई प्राधिकरण बोर्ड की 131वीं बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
बैठक में सबसे पहले पिछली यानी 130वीं बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की पुष्टि की गई। इसके बाद सचिव ने 131वीं बैठक के एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं को बोर्ड के समक्ष रखा। विस्तार क्षेत्र में नक्शा स्वीकृति के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा के बाद शासन की एसओपी को लागू करने पर सहमति बनी। इसके दायरे में पिपराइच, पीपीगंज और मुंडेरा बाजार नगर पंचायत के साथ 233 नए राजस्व ग्राम शामिल हैं। एकीकृत मंडलीय कार्यालय निर्माण योजना के तहत सिंचाई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आवास बनाए जाएंगे। इसके लिए उप श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश, गोरखपुर कार्यालय के पीछे स्थित 4000 वर्गमीटर भूमि का भू-उपयोग कार्यालय तथा सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक सुविधा से बदलकर आवासीय करने के प्रस्ताव को जीडीए बोर्ड ने सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी। बोर्ड ने प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
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गोरखपुर महायोजना प्रभावी होने के बाद आर्किटेक्ट, विकासकर्ताओं और आम लोगों की ओर से कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण और आपत्तियां दी गई थीं। बोर्ड की बैठक में इन पर विस्तार से चर्चा की गई। संबंधित प्रस्तावों को शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि महायोजना के प्रावधानों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। बैठक के दौरान प्राधिकरण उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, नगर आयुक्त अजय जैन, सचिव प्रखर उत्तम सहित बोर्ड के सदस्य मौजूद रहे।
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खोराबार योजना में अब रुद्राक्ष और मानसरोवर एनक्लेव
खोराबार आवासीय योजना में निर्माणाधीन बहुमंजिली आवासीय परियोजनाओं का नामकरण भी किया गया। ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या आठ पर निर्माणाधीन ईडब्ल्यूएस और एलआईजी भवनों का नाम रुद्राक्ष एनक्लेव रखा गया है। वहीं, भूखंड संख्या सात पर निर्माणाधीन मिनी एमआईजी और एमआईजी भवनों का नाम मानसरोवर एनक्लेव होगा। जीडीए की बहुमंजिली योजना कुश्मी एनक्लेव का नाम बदलकर नवनाथ एनक्लेव करने पर भी बोर्ड ने सहमति दी।
ताल रिंग रोड और कई कॉलोनियां नगर निगम को होंगी हस्तांतरित
जीडीए की ओर से विकसित गोरक्ष एनक्लेव, पत्रकारपुरम, पत्रकारपुरम विस्तार और राप्तीनगर विस्तार आवासीय योजना के साथ पैडलेगंज से आरकेबीके तक ताल रिंग रोड और पैडलेगंज से नया सवेरा फेज-1 तक की सड़क को अनुरक्षण के लिए नगर निगम को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव मंजूर किया गया। नगर निगम को 10 दिन के भीतर संयुक्त निरीक्षण कर आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
रामगढ़ताल में फव्वारा चलाने के निर्देश
रामगढ़ताल को साफ रखने और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सुंदरीकरण एवं विकास कार्यों की समीक्षा की गई। बोर्ड ने जेटी पर स्थित फव्वारे का संचालन शुरू कराने के निर्देश दिए। नया सवेरा फेज-1 के प्रवेश द्वार के सामने सड़क पर भी प्रवेश द्वार की एकरूपता के अनुरूप निर्माण पर विचार करने को कहा गया।
ठेकेदारों के पंजीकरण का रास्ता साल में दो बार खुलेगा
जीडीए में सिविल और विद्युतीकरण कार्यों के लिए ठेकेदारों का पंजीकरण अब साल में दो बार मार्च और सितंबर में खोला जाएगा। इससे सभी श्रेणियों के ठेकेदारों को समान अवसर मिलने के साथ प्रतिस्पर्धा बढ़ने की उम्मीद है।
पुराने जीडीए भवनों का होगा पुनर्विकास
जर्जर और पुराने जीडीए परिसंपत्तियों के पुनर्विकास के लिए राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम लिमिटेड (एनबीसीसी) और जीडीए के माध्यम से शून्य वित्तीय भार के आधार पर काम कराने को सैद्धांतिक सहमति दी गई। बोर्ड ने विस्तृत विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। आदर्श कास्टिंग गाइडलाइंस (मूलभूत सिद्धांत-2025) के अनुसार अनिस्तारित संपत्तियों के किए गए पुनर्मूल्यांकन पर भी बोर्ड ने चर्चा की। अब प्रत्येक संपत्ति का अलग-अलग विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद रिपोर्ट और प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रेक्षागृह का किराया हुआ कम
योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के बड़े और छोटे हॉल का किराया घटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। बड़े हॉल का किराया 4.13 लाख रुपये से घटाकर 1.30 लाख रुपये और छोटे हॉल का किराया 2.24 लाख रुपये से घटाकर 47,200 रुपये किया गया है। प्रथम तल के दो छोटे हॉल को भी किराये पर देने की अनुमति दी गई। वहीं कैंटीन स्पेस और लाइब्रेरी हॉल को पीपीपी मॉडल पर देने का निर्णय लिया गया।
जीडीए में कामकाज की निगरानी होगी मजबूत, रिकॉर्ड होंगे डिजिटल
प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। बोर्ड ने अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने और जनता को सेवाएं जल्द उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सूचीबद्ध कार्यों को कराए जाने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी। इसके तहत काम में तेजी लाने और आम लोगों को सेवाएं जल्द उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। बोर्ड ने जीडीए के पुराने अभिलेखों के संरक्षण, पुनर्स्थापन और डिजिटलीकरण से जुड़े कार्यों को ईओआई के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पर्याप्त प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया ताकि योग्य संस्थाओं को अवसर मिल सके और कार्य पारदर्शी तरीके से कराया जा सके।