गोरखपुर: महायोजना-2031 की मंजूरी के लिए जीडीए बोर्ड की बैठक 22 को, सीएम योगी दे चुके हैं अपनी मंजूरी
गोरखपुर माहयोजना के ड्राफ्ट को मुख्यमंत्री योगी अपनी मंजूरी दे चुके हैं। बीस लाख जनसंख्या को आधार मानकर महायोजना तैयार की गई है।
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गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की नई महायोजना-2031 पर इसी महीने मुहर लग जाएगी। 22 अप्रैल को जीडीए बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें महायोजना 2031 पर चर्चा होगी और मंजूरी दी जाएगी।
बता दें कि माहयोजना का ड्राफ्ट पहले ही तैयार हो चुका है। विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी रजामंदी भी दे चुके हैं। जीडीए बोर्ड की मंजूरी के लिए 22 मार्च को बैठक होनी थी, लेकिन एमएलसी चुनाव की अधिसूचना जारी होने की वजह से टाल दी गई थी।
जीडीए बोर्ड से स्वीकृति के बाद महायोजना के संबंध में लोगों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे और उनका निस्तारण होगा। इसके लिए एक महीने का समय तय होगा। इस दौरान जरूरत पड़ने पर महायोजना में कुछ बदलाव किया जा सकता है। इसके बाद इसे शासन को भेजा जाएगा। शासन से ही इसे लागू किया जाएगा। उम्मीद है कि जून के पहले पखवाड़े तक नई महायोजना वजूद में आ जाए।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बताया कि स्थापना के बाद से अब तक गोरखपुर विकास प्राधिकरण का क्षेत्र सवा दोगुना बढ़ चुका है। 1977 में स्थापना के समय प्राधिकरण की सीमा में 180 राजस्व गांव एवं नगर क्षेत्र मिलाकर 285 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल था। वर्ष 2020 में इस क्षेत्र में 233 नए राजस्व गांव एवं मुंडेरा बाजार, पीपीगंज व पिपराइच नगर पंचायत को जोड़ दिया गया। वर्तमान में विकास क्षेत्र का क्षेत्रफल करीब 642 वर्ग किलोमीटर हो चुका है। वर्तमान में शहर की आबादी करीब 13 लाख है, जबकि नई महायोजना को 20 लाख जनसंख्या को आधार मानकर तैयार किया गया है।
25 कॉलोनियों से धुलेगा अवैध का दाग
गोरखपुर को मेट्रोपॉलिटन सिटी घोषित किया जा चुका है इसलिए महायोजना-2031 को उसी के अनुसार तैयार किया गया है। वर्तमान महायोजना में विनियमितीकरण के रूप में प्रस्तावित 25 कॉलोनियों में भू-उपयोग बदलकर आवासीय कर दिया गया है। इससे इन कॉलोनियों पर से दो दशक से चला आ रहा अवैध का दाग धुल जाएगा।
महायोजना के महत्वपूर्ण प्रस्ताव
- विनियमितीकरण के रूप में प्रस्तावित महानगर की 25 कॉलोनियों में आवासीय भू उपयोग प्रस्तावित किया जा रहा है। इससे करीब 2.5 लाख की जनसंख्या को लाभ होगा।
- शहर में भू-उपयोगों के तहत वर्तमान में कई तरह के विकास हो गए हैं। इनके अनुरूप महायोजना में प्रस्ताव दिया गया है।
- महानगर में जलभराव की समस्या के निदान के लिए जीडीए द्वारा तैयार ड्रेनेज प्लान को महायोजना में समावेशित किया गया है।
- लाइट रेल ट्रांजिट कारीडोर यानी मेट्रो रूट पर बाजार मार्ग का प्रस्ताव किया गया है। यहां व्यावसायिक गतिविधियां हो सकेंगी।
- महराजगंज मार्ग पर नया बस अड्डा प्रस्तावित है। महराजगंज मार्ग जंक्शन, देवरिया मार्ग जंक्शन के पास नवीन ट्रांसपोर्टनगर प्रस्तावित है।
- गोरखपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों, प्रांतीय राजमार्गों एवं रिंग रोड के दोनों ओर महायोजना में पहली बार हाईवे फैसिलिटी जोन की व्यवस्था की गई है। इसके अंतर्गत होटल, मोटल, पेट्रोलपंप, हास्पिटल, शैक्षिक सुविधाएं, वेयरहाउस आदि का निर्माण हो सकेगा।
- कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को ध्यान में रखते हुए कुशीनगर मार्ग पर नई आवासीय योजना के विकास के लिए भू उपयोग का प्रस्ताव।
- राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की ओर से घोषित प्रतिबंधित क्षेत्र 500 मीटर से घटकर 50 मीटर से 120 मीटर होने के कारण रामगढ़ताल क्षेत्र में 500 हेक्टेयर क्षेत्र नियोजित विकास के लिए उपलब्ध हो गया है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (एसडब्ल्यूएम) एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का प्रस्ताव नगरीकरण सीमा के बाहर किया गया है।
- महानगर के प्रमुख मार्गों पर मिश्रित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बाजार स्ट्रीट के रूप में प्रस्ताव किया गया।
- लखनऊ एवं सोनौली मार्ग को जोड़ने वाले रिंग रोड पर औद्योगिक विकास के लिए करीब 700 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव।
- गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे तैयार होने के बाद गोरखपुर लखनऊ, आगरा व दिल्ली से सीधा एक्सप्रेस वे से जुड़ जाएगा।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि महायोजना-2031 का प्रारूप तैयार हो गया है। मंजूरी के लिए 22 अप्रैल को जीडीए बोर्ड की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंजूर होने के बाद आपत्ति व सुझावों के लिए वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। आपत्तियों और सुझावों के अनुसार परिवर्तन के बाद फिर बोर्ड से पास कराया जाएगा। इसके बाद अंतिम प्रकाशन के लिए शासन को भेजा जाएगा। शासन से ही महायोजना-2031 को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद नई महायोजना प्रभावी हो जाएगी।