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गोरखपुर: समाज के उत्थान के लिए यहां 10 वर्षों से हो रहा है गायत्री महायज्ञ, जानिए क्या है खासियत
Sun, 04 Jul 2021 04:31 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 04 Jul 2021 04:31 PM IST
सार
हर माह के प्रथम रविवार को होता है गायत्री महायज्ञ।
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एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
समाज के उत्थान के लिए गोरखपुर शहर के गणेशपुरम में पिछले 10 सालों से हर माह के प्रथम रविवार को एक कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन होता है।
गायत्री परिवार रचनात्मक ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी एवं जिला युवा समन्वयक दीना नाथ सिंह ने बताया कि अगस्त 2010 से माह के प्रथम रविवार को सुबह नौ बजे से एक कुंडीय गायत्री यज्ञ आयोजित होता है। समाज हित एवं समाज उत्थान के लिए यज्ञ किया जाता है।
जिसमें गायत्री परिवार के युवाओं द्वारा समाज में मंत्र एवं मंत्रलेखन एवं विचार क्रांति अभियान से जन-जन को जोड़ने का कार्य किया जाता है और वह युवा 29 दिन साधना का अभ्यास करते हैं ततपश्चात 30वें दिन रचनात्मक ट्रस्ट के कार्यालय गणेशपुरम राप्तीनगर पर मासिक यज्ञ में अपनी पूर्णाहुति करते हैं और भोजन प्रसाद ग्रहण करते है।
बताया कि जो भी युवा सदस्य गायत्री परिवार से जुड़े हैं वह यज्ञ के माध्यम से पूर्ण रूप से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। बताया कि इस यज्ञ कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का अनुदान नहीं लिया जाता है।
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ट्रस्टी ने बताया कि ‘यज्ञ’ का अर्थ आग में घी डालकर मंत्र पढ़ना नहीं होता। यज्ञ का अर्थ है शुभ कर्म, श्रेष्ठ कर्म सतकर्म एवं वेदसम्मत कर्म। सकारात्मक भाव से ईश्वर-प्रकृति तत्वों से किए गए आह्वान से जीवन की प्रत्येक इच्छा पूरी होती है। मांगो, विश्वास करो और फिर पा लो। यही है यज्ञ का रहस्य है।
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गायत्री परिवार रचनात्मक ट्रस्ट के मुख्य ट्रस्टी एवं जिला युवा समन्वयक दीना नाथ सिंह ने बताया कि अगस्त 2010 से माह के प्रथम रविवार को सुबह नौ बजे से एक कुंडीय गायत्री यज्ञ आयोजित होता है। समाज हित एवं समाज उत्थान के लिए यज्ञ किया जाता है।
जिसमें गायत्री परिवार के युवाओं द्वारा समाज में मंत्र एवं मंत्रलेखन एवं विचार क्रांति अभियान से जन-जन को जोड़ने का कार्य किया जाता है और वह युवा 29 दिन साधना का अभ्यास करते हैं ततपश्चात 30वें दिन रचनात्मक ट्रस्ट के कार्यालय गणेशपुरम राप्तीनगर पर मासिक यज्ञ में अपनी पूर्णाहुति करते हैं और भोजन प्रसाद ग्रहण करते है।
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बताया कि जो भी युवा सदस्य गायत्री परिवार से जुड़े हैं वह यज्ञ के माध्यम से पूर्ण रूप से सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। बताया कि इस यज्ञ कार्यक्रम में किसी भी प्रकार का अनुदान नहीं लिया जाता है।
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ट्रस्टी ने बताया कि ‘यज्ञ’ का अर्थ आग में घी डालकर मंत्र पढ़ना नहीं होता। यज्ञ का अर्थ है शुभ कर्म, श्रेष्ठ कर्म सतकर्म एवं वेदसम्मत कर्म। सकारात्मक भाव से ईश्वर-प्रकृति तत्वों से किए गए आह्वान से जीवन की प्रत्येक इच्छा पूरी होती है। मांगो, विश्वास करो और फिर पा लो। यही है यज्ञ का रहस्य है।