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ऑक्सीजन बचाने की तैयारी: गोरखपुर जिले के 18 प्रतिष्ठानों के बगीचे रोकेंगे प्रदूषण, इस पद्धति का लिया जा रहा सहारा
Fri, 01 Apr 2022 12:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:55 PM IST
सार
मियावाकी पद्धति एक जापानी वनीकरण विधि है। इसमें पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है। पौधे सूर्य का प्रकाश प्राप्त कर ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं। पद्धति के अनुसार पौधों के तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है। जिनकी ऊंचाई पेड़ बनने पर अलग-अलग होती है।
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बगीचा
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिला पर्यावरण समिति ने जिले में 18 ऐसे प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया है, जहां वायु प्रदूषण की मात्रा अधिक है। इन प्रतिष्ठानों में मियावाकी पद्धति से सघन पौधरोपण कर बगीचा तैयार किया जाएगा। आगे चलकर प्रतिष्ठानों के ये बगीचे, शहर के वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में काफी उपयोगी साबित होंगे। जिले के जिन प्रतिष्ठानों में वायु प्रदूषण की मात्रा अधिक मिली है, उसमें से नौ प्रतिष्ठान गीडा से हैं।
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नौ प्रतिष्ठान सहजनवां, सरदारनगर, बरगदवा आदि क्षेत्रों से हैं। इन प्रतिष्ठानों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड, यूपी स्टेट सुगर कार्पोरेशन लिमिटेड पिपराइच, मदन मोहन मालवीय प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इन प्रतिष्ठानों के परिसर में मियावाकी पद्धति से पौधे लगाए जाएंगे, ताकि पौधे वातावरण में फैली दूषित गैसों को अवशोषित कर अधिक से अधिक आक्सीजन का उत्सर्जन करें। इससे शहर की हवा शुद्ध होगी।
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हालांकि, दो महीने पहले ही समिति ने प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र लिखकर, इन विभागों को मियावाकी पद्धति से बगीचा बनाने की जानकारी दी थी। लेकिन, प्रतिष्ठानों की तरफ से अभी पहल शुरू नहीं हो सकी है। वन विभाग ने अब रेंज के अधिकारियों को जिम्मा सौंपा है। चार प्रतिष्ठानों में सर्वे कर रिपोर्ट तैयार कर ली गई है।
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डीएफओ विकास यादव ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग को पत्र भेजकर 18 प्रतिष्ठानों के प्रदूषण की जानकारी दी गई थी। अगर इसमें लापरवाही हुई तो प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के लिए लिखा जा सकता है।
जानिए, क्या है मियावाकी पद्धति
मियावाकी पद्धति एक जापानी वनीकरण विधि है। इसमें पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है। पौधे सूर्य का प्रकाश प्राप्त कर ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं। पद्धति के अनुसार पौधों के तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है। जिनकी ऊंचाई पेड़ बनने पर अलग-अलग होती है। जैसे कि एक पेड़ खजूर का लगाया जाएगा, तो दूसरा पेड़ नीम, शीशम आदि का होगा। वहीं तीसरा पौधा किसी भी तरह की फुलवारी का हो सकता है। इसमें खास बात यह रहती है कि एक पेड़ ऊंचाई वाला तथा दूसरा कम ऊंचाई वाला तथा तीसरा घनी छायादार पौधा चुना जाता है। इन तीनों पौधों को थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल पर लगाया जाता है। इस पद्धति से पौधों का तेजी से विकास होता है। ऑक्सीजन का उत्सर्जन अधिक होता है।
ये हैं 18 विभाग, जिन्हें भेजा गया पत्र
इंडिया ग्लाईकाल्स लिमिटेड गीडा, अंबे प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड यूनिट-1, यूनिट-2 गीडा, फेथफुल कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड गीडा, रूंगटा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड गीडा, गैलेंट इस्पात लिमिटेड गीडा, नाईन प्राइवेट लिमिटेड गीडा, दी महाबीर जूट मिल्स लिमिटेड सहजनवां, गोरखपुर रिसोर्सेज लिमिटेड सहजनवां, हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड, एशियन फर्टिलाइजर्स लिमिटेड सरदारनगर, वीएन डयर्स एंड प्रासेसर्स प्राइवेट लिमिटेड बरगदवा, जय लक्ष्मी साल्वेंट्स प्राइवेट लिमिटेड औद्योगिक क्षेत्र, यूपी स्टेट शुगर कार्पोरेशन लिमिटेड पिपराइच, आशुतोष शिक्षा एवं सेवा संस्थान गीडा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।
मियावाकी पद्धति एक जापानी वनीकरण विधि है। इसमें पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है। पौधे सूर्य का प्रकाश प्राप्त कर ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं। पद्धति के अनुसार पौधों के तीन प्रजातियों की सूची तैयार की जाती है। जिनकी ऊंचाई पेड़ बनने पर अलग-अलग होती है। जैसे कि एक पेड़ खजूर का लगाया जाएगा, तो दूसरा पेड़ नीम, शीशम आदि का होगा। वहीं तीसरा पौधा किसी भी तरह की फुलवारी का हो सकता है। इसमें खास बात यह रहती है कि एक पेड़ ऊंचाई वाला तथा दूसरा कम ऊंचाई वाला तथा तीसरा घनी छायादार पौधा चुना जाता है। इन तीनों पौधों को थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल पर लगाया जाता है। इस पद्धति से पौधों का तेजी से विकास होता है। ऑक्सीजन का उत्सर्जन अधिक होता है।
ये हैं 18 विभाग, जिन्हें भेजा गया पत्र
इंडिया ग्लाईकाल्स लिमिटेड गीडा, अंबे प्रोसेसर्स प्राइवेट लिमिटेड यूनिट-1, यूनिट-2 गीडा, फेथफुल कामर्शियल प्राइवेट लिमिटेड गीडा, रूंगटा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड गीडा, गैलेंट इस्पात लिमिटेड गीडा, नाईन प्राइवेट लिमिटेड गीडा, दी महाबीर जूट मिल्स लिमिटेड सहजनवां, गोरखपुर रिसोर्सेज लिमिटेड सहजनवां, हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड, एशियन फर्टिलाइजर्स लिमिटेड सरदारनगर, वीएन डयर्स एंड प्रासेसर्स प्राइवेट लिमिटेड बरगदवा, जय लक्ष्मी साल्वेंट्स प्राइवेट लिमिटेड औद्योगिक क्षेत्र, यूपी स्टेट शुगर कार्पोरेशन लिमिटेड पिपराइच, आशुतोष शिक्षा एवं सेवा संस्थान गीडा, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।