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Gorakhpur News: सैंपलिंग से शोध की विश्वसनीयता तक, भारतीय ज्ञान पर भी मंथन
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के सहयोग से आयोजित दस दिवसीय रिसर्च मेथडोलॉजी कोर्स (आरएमसी) के छठे दिन शोध की विभिन्न तकनीकों और भारतीय ज्ञान प्रणाली पर मंथन हुआ। तीन अकादमिक सत्रों में सैंपलिंग की विधियों, शोध मेट्रिक्स और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई।
पहले दो सत्रों में डॉ. धर्मेंद्र कुमार सर्राफ ने शोध में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न सैंपलिंग तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने रैंडम, स्तरीकृत, क्लस्टर, मल्टीस्टेज, कोटा, पर्पसिव, स्नोबॉल और कन्वीनियंस सैंपलिंग की प्रक्रिया और उपयोगिता समझाई। उन्होंने कहा कि सैंपलिंग और नॉन-सैंपलिंग संबंधी त्रुटियों पर नियंत्रण शोध की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है। डॉ. सर्राफ ने शोध के मूल्यांकन में उपयोग होने वाले विभिन्न मेट्रिक्स पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने स्कोपस, वेब ऑफ साइंस, जर्नल इम्पैक्ट फैक्टर, एच-इंडेक्स, जी-इंडेक्स, आई-10 इंडेक्स और ऑल्टमेट्रिक्स की उपयोगिता के बारे में बताया। तीसरे सत्र में प्रो. सुषमा पांडेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में उच्च शिक्षा और शोध में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की।
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पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह और सह-निदेशक डॉ. मीतू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। इस दौरान प्रो. सुनीता दूबे, प्रो. उदय सिंह, डॉ. दुर्गेश पाल, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. ममता चौधरी और डॉ. ज्योति बाला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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पहले दो सत्रों में डॉ. धर्मेंद्र कुमार सर्राफ ने शोध में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न सैंपलिंग तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने रैंडम, स्तरीकृत, क्लस्टर, मल्टीस्टेज, कोटा, पर्पसिव, स्नोबॉल और कन्वीनियंस सैंपलिंग की प्रक्रिया और उपयोगिता समझाई। उन्होंने कहा कि सैंपलिंग और नॉन-सैंपलिंग संबंधी त्रुटियों पर नियंत्रण शोध की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है। डॉ. सर्राफ ने शोध के मूल्यांकन में उपयोग होने वाले विभिन्न मेट्रिक्स पर भी प्रकाश डाला।
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उन्होंने स्कोपस, वेब ऑफ साइंस, जर्नल इम्पैक्ट फैक्टर, एच-इंडेक्स, जी-इंडेक्स, आई-10 इंडेक्स और ऑल्टमेट्रिक्स की उपयोगिता के बारे में बताया। तीसरे सत्र में प्रो. सुषमा पांडेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के संदर्भ में उच्च शिक्षा और शोध में भारतीय ज्ञान प्रणाली की प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने इसके प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाओं और चुनौतियों पर चर्चा की।
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पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह और सह-निदेशक डॉ. मीतू सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में शोधार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान पाया। इस दौरान प्रो. सुनीता दूबे, प्रो. उदय सिंह, डॉ. दुर्गेश पाल, डॉ. अनुपम सिंह, डॉ. ममता चौधरी और डॉ. ज्योति बाला सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।