यूपी: रेलवे का फर्जी नियुक्तिपत्र देकर जालसाजी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार
प्रत्येक युवक से नौकरी के नाम पर पांच से सात लाख रुपये लेते थे। इस मामले में दो आरोपी पहले भी जेल भेजे जा चुके हैं।
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रेलवे में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी नियुक्तिपत्र थमाकर युवकों से पांच से सात लाख ऐंठने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। कैंट पुलिस व आरपीएफ ने बृहस्पतिवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनके पास से फर्जी नियुक्ति पत्र, फर्जी मेडिकल रिपोर्ट, कूटरचित रेलवे की उपस्थिति पंजिका व सात मोबाइल मिले हैं। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि वे युवकों से नौकरी के नाम पर पांच से सात लाख रुपये वसूलते थे। इसके पहले भी गिरोह के दो लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था।
अमर उजाला ने 23 अगस्त 2021 को जालसाजी के इस खेल का पर्दाफाश किया था। जिसके बाद आरपीएफ और कैंट पुलिस ने गोपनीय तरीके से जांच शुरू कर दी थी। सितंबर 2021 में आरपीएफ ने अपनी जांच के दौरान जालसाजी में लिप्त कुछ संदिग्धों की सूचना कैंट पुलिस को दी थी, जिसके बाद दो लोग पकड़े गए थे। पकड़े गए युवकों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर जांच टीम ने रेलवे के विभागों में अपने मुखबिर सक्रिय कर दिए थे।
बृहस्पतिवार को आरपीएफ को सूचना मिली कि आरोपी फर्जी नियुक्ति पत्र लेकर आए हुए हैं। सूचना पर आरपीएफ व कैंट पुलिस ने रेल म्यूजियम के पास से चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान लखनऊ के मानक नगर थाना क्षेत्र के कन्नौसी निवासी नवीन सिंह, गोला इलाके के पंडुरी निवासी नरेंद्र शुक्ला, धुरियापार निवासी मनोज सिंह और रामगढ़ताल निवासी राकेश कुमार के रूप में हुई है। इंस्पेक्टर सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि आरपीएफ और कैंट की संयुक्त टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
मुख्यालय होने के चलते जालसाजी में आसानी
पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय होने के चलते यहां युवकों को अपने झांसे में लेना आसान है। ऐसे में यह गिरोह लंबे समय से युवकों को जालसाजी का शिकार बना रहा था। पकड़े गए युवकों से पूछताछ में पता चला कि वे कई विभागों में आते-जाते थे। ऐसे नेटवर्क फैलाया था कि जिस युवक को झांसे में लेते थे, उसे फर्जी अधिकारी, कर्मचारी से मिलवाते थे ताकी पक्का यकीन हो जाए। विभागों के गेट पर बुलाकर हस्ताक्षर पंजिका पर हस्ताक्षर भी कराते थे।
लखनऊ व दिल्ली तक फैला है नेटवर्क
जालसाजों को नेटवर्क लखनऊ और दिल्ली तक फैला हुआ है। जहां से बड़ी आसानी से दूसरे शहरों से युवकों को फंसाकर लाते हैं। इस नेटवर्क में जुड़े कई और लोग शामिल हैं जिनकी तलाश में आरपीएफ जुटी है। जल्द ही उनकी भी गिरफ्तारी हो सकती है।