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UP News: वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने में दक्ष होंगे दरोगा, पूछताछ का भी बढ़ेगा ज्ञान
Wed, 07 Sep 2022 11:48 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 07 Sep 2022 11:48 AM IST
सार
एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि फोरेंसिक प्रशिक्षण के लिए एम्स के मेडिको लीगल विभाग से करार हुआ है। सहमति बन गई है, हर शनिवार व रविवार को 30-30 दरोगाओं को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। उनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अगला बैच भेजा जाएगा। इससे दरोगा कई बारीकियों को सीख लेंगे, जिसका फायदा विवेचना में भी मिलेगा।
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एसपी सिटी डॉ. कृष्ण कुमार विश्नोई। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले के वैज्ञानिक साक्ष्यों को जुटाने और पूछताछ में दरोगाओं को और माहिर बनाया जाएगा। इसके लिए गोरखपुर पुलिस ने एम्स के मेडिको लीगल विभाग से करार कर लिया है। तीस-तीस दरोगाओं का बैच बनाकर शनिवार और रविवार को फोरेंसिक की ट्रेनिंग दी जाएगी।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई की पहल पर 10 सितंबर से इसकी शुरुआत की जाएगी। एसपी सिटी के मुताबिक, प्रशिक्षण की कमी होने की वजह से मौका-ए-वारदात पर जरूरी साक्ष्य नहीं ले पाते हैं। पूछताछ में किन सवालों को शामिल करना चाहिए, यह भी जानकारी जरूरी है।
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अब एम्स की मेडिको लीगल टीम पुलिस लाइंस के व्हाइट हाउस में आएगी। वहीं प्रशिक्षण के अलग-अलग सत्र चलेंगे। शहर के 30-30 दरोगाओं को बैच बनाया जा रहा है। प्रशिक्षण का सिलसिला चलता रहेगा। एक बैच का प्रशिक्षण पूरा होगा तो दूसरा आएगा।
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इन बिंदुओं पर बढ़ जाएगी जानकारी की बारीकियां
- घटनास्थल पर कैसे और क्या साक्ष्य लेना चाहिए, इसकी जानकारी होगी।
- महिलाओं के साथ होने वाले अपराध में यह भूमिका और बढ़ जाती है।
- नमूनों को कैसे संरक्षित किया जाता है, बारीकी से समझेंगे।
- वारदात के बाद घटनास्थल पर किन-किन बिंदुओं पर जांच करनी चाहिए।
- मौका-ए-वारदात पर घटना के हिसाब से मौजूद लोगों व घरवालों से क्या सवाल पूछना चाहिए।
- डूबने, हैंगिंग या फिर हत्या के बाद शव को लटकाया गया, इसे कैसे मौके पर ही समझ लें।
- वारदात के हिसाब से ही मौके पर साक्ष्य जुटाना, फिर क्या जांच को भेजना चाहिए।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा कि फोरेंसिक प्रशिक्षण के लिए एम्स के मेडिको लीगल विभाग से करार हुआ है। सहमति बन गई है, हर शनिवार व रविवार को तीस-तीस दरोगाओं को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। उनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अगला बैच भेजा जाएगा। इससे दरोगा कई बारीकियों को सीख लेंगे, जिसका फायदा विवेचना में भी मिलेगा।