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गोरखपुर में बाढ़: 55 गांव मैरुंड, महज 40 गांवों में बंटी राहत सामग्री, पशुओं के लिए चारे का संकट गहराया
Thu, 09 Sep 2021 02:42 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 09 Sep 2021 02:42 PM IST
सार
बाढ़ विभीषिका झेल रहे सीधेगौर के भरथरी साहनी का कहना है कि बाढ़ में हम लोग तो किसी तरह से जिंदगी जी ले रहे हैं मगर पशुओं के सामने चारे का संकट बना हुआ है।
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गोरखपुर में बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
राप्ती व सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित 55 गांवों को तहसील प्रशासन द्वारा मैरुंड घोषित किया गया है। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता की वजह से मात्र 40 गांवों में ही राहत सामग्री वितरित हो सकी है।
गोनहा, गायघाट, सेमरा खुर्द, सिधेगौर, नवलपुर, मवरटिया, बेसहनी, बेलवा दाखिली, कोइलीखाल, पिपरढाड़ी, पटना मुस्तकिल, आछिडीह, रुदौली, तुर्कवलिया, मझवलिया गांव के लोग आज भी सरकारी राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ से चारों तरफ परेशानियां बढ़ीं हैं। पशुओं के चारे बह गए व खोप में रखे भूसे बाढ़ के पानी से सड़कर नष्ट होने के कारण पशु पालकों के सामने दिक्कत आ गई है।
हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं जिसे पीने को लोग मजबूर हैं। बाढ़ विभीषिका झेल रहे सीधेगौर के भरथरी साहनी का कहना है कि बाढ़ में हम लोग तो किसी तरह से जिंदगी जी ले रहे हैं मगर पशुओं के सामने चारे का संकट बना हुआ है। संजय सिंह का कहना है कि तहसील प्रशासन की लापरवाही से अभी तक लोगों में बाढ़ राहत सामग्री वितरित नहीं हो सकी।
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गायघाट के लालचन्द यादव का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है मगर सरकार के नुमाइंदों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। रंजू देवी का कहना है की हर साल बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल व जानवरों के चारे बह जाते हैं जिससे किसानों के सामने संकट की स्थिति पैदा हो जाती है। उपजिलाधिकारी गोला राजेंद्र बहादुर ने कहा कि अतिशीघ्र बचे गांवों में भी बाढ़ राहत सामग्री का वितरण करा दिया जाएगा।
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गोनहा, गायघाट, सेमरा खुर्द, सिधेगौर, नवलपुर, मवरटिया, बेसहनी, बेलवा दाखिली, कोइलीखाल, पिपरढाड़ी, पटना मुस्तकिल, आछिडीह, रुदौली, तुर्कवलिया, मझवलिया गांव के लोग आज भी सरकारी राहत सामग्री का इंतजार कर रहे हैं। बाढ़ से चारों तरफ परेशानियां बढ़ीं हैं। पशुओं के चारे बह गए व खोप में रखे भूसे बाढ़ के पानी से सड़कर नष्ट होने के कारण पशु पालकों के सामने दिक्कत आ गई है।
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हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं जिसे पीने को लोग मजबूर हैं। बाढ़ विभीषिका झेल रहे सीधेगौर के भरथरी साहनी का कहना है कि बाढ़ में हम लोग तो किसी तरह से जिंदगी जी ले रहे हैं मगर पशुओं के सामने चारे का संकट बना हुआ है। संजय सिंह का कहना है कि तहसील प्रशासन की लापरवाही से अभी तक लोगों में बाढ़ राहत सामग्री वितरित नहीं हो सकी।
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गायघाट के लालचन्द यादव का कहना है कि हर साल बाढ़ आती है मगर सरकार के नुमाइंदों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है। रंजू देवी का कहना है की हर साल बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल व जानवरों के चारे बह जाते हैं जिससे किसानों के सामने संकट की स्थिति पैदा हो जाती है। उपजिलाधिकारी गोला राजेंद्र बहादुर ने कहा कि अतिशीघ्र बचे गांवों में भी बाढ़ राहत सामग्री का वितरण करा दिया जाएगा।