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गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से नोनियापट्टी के लोगों की बढ़ी बेचैनी
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बाढ़ में घिरे नोनियापट्टी गांव के लोगों ने सामान निकालना शुरू कर दिया है।
- फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से नोनियापट्टी के लोगों की बढ़ी बेचैनी
तमकुहीरोड। बड़ी गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और बाढ़ की आशंका को देखते हुए नोनियापट्टी के ग्रामीण भी अपनी गृहस्थी का सामान समेटने लगे हैं। पूर्व में अपने पक्के मकान नदी की भेंट चढ़ते देख यह ग्रामीण फूस की बची झोपड़ी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में लगे हैं।
एपी बांध पर किलोमीटर 12.000 से पहले नोनियापट्टी गांव में गंडक नदी का पानी घुस जाने और कटान का खतरा बढ़ जाने के बाद यहां के लोग अपनी गृहस्थी का सामान निकालने लगे हैं। इस कार्य में बच्चे, बूढ़े और नौजवान सभी लगे हुए हैं। यह लोग बाढ़ से बचने के लिए बंधे पर शरण ले रहे हैं। लल्लन बैठा, माया देवी, अवधेश, रामप्रवेश, संतलाल, ओसियर, भोला आदि का कहना है कि पहले उनका भी पक्का मकान था, जो दो साल पहले गंडक नदी की भीषण कटान के चलते बाढ़ की भेंट चढ़ गया। उसके बाद पानी हट जाने पर झोपड़ी बनाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। अब जब एक बार फिर उनकी झोपड़ियों में गंडक नदी का पानी घुस गया है और कटान का खतरा मंडराने लगा है तो उनके सामने अब एपी बांध पर शरण लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है।
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तमकुहीरोड। बड़ी गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और बाढ़ की आशंका को देखते हुए नोनियापट्टी के ग्रामीण भी अपनी गृहस्थी का सामान समेटने लगे हैं। पूर्व में अपने पक्के मकान नदी की भेंट चढ़ते देख यह ग्रामीण फूस की बची झोपड़ी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में लगे हैं।
एपी बांध पर किलोमीटर 12.000 से पहले नोनियापट्टी गांव में गंडक नदी का पानी घुस जाने और कटान का खतरा बढ़ जाने के बाद यहां के लोग अपनी गृहस्थी का सामान निकालने लगे हैं। इस कार्य में बच्चे, बूढ़े और नौजवान सभी लगे हुए हैं। यह लोग बाढ़ से बचने के लिए बंधे पर शरण ले रहे हैं। लल्लन बैठा, माया देवी, अवधेश, रामप्रवेश, संतलाल, ओसियर, भोला आदि का कहना है कि पहले उनका भी पक्का मकान था, जो दो साल पहले गंडक नदी की भीषण कटान के चलते बाढ़ की भेंट चढ़ गया। उसके बाद पानी हट जाने पर झोपड़ी बनाकर किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। अब जब एक बार फिर उनकी झोपड़ियों में गंडक नदी का पानी घुस गया है और कटान का खतरा मंडराने लगा है तो उनके सामने अब एपी बांध पर शरण लेने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रह गया है।
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