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32 महिलाओं को बनाया कर्जदार: फर्जी कागजात पर कर्ज दिलाने वाले पांच शातिर गिरफ्तार, ऐसे हड़पे लाखों रुपये

Fri, 10 May 2024 10:06 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: अनुज कुमार Updated Fri, 10 May 2024 10:06 PM IST
सार

पडरौना में फर्जी कागजात पर कर्ज दिलाने वाले पांच शातिर जेल भेज दिए गए हैं। इन लोगों ने महिलाओं को समूह में लोन दिलाकर लाखों रुपये हड़प लिए हैं। इस मामले में आरोहण बैंक के दो कर्मी और एक सीएससी संचालक को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। 

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Five fraudsters who provided loans on fake documents were sent to jail
शातिर सदस्य पुलिस की गिरफ्त में - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोली-भाली महिलाओं को समूह में लोन दिलाकर 60 लाख से अधिक रुपये हड़पने वाले दंपती समेत पांच शातिर को पुलिस ने गिरफ्तार कर बृहस्पतिवार को जेल भेज दिया। इसमें आरोहण बैंक के दो कर्मचारी और एक सीएससी का संचालक युवक शामिल है। गैंग में शामिल पडरौना निवासी सीएससी संचालक युवक केवाईसी कर वोटर कार्ड, आधार कार्ड आदि से कृष्णा पोर्टल एप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर उसे मुख्य आरोपी को मुहैया करता था। इन शातिर आरोपियों की पुलिस काफी समय से तलाश कर रही थी।

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विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही नगर समेत आसपास के गांवों की रहने वाली 32 महिलाओं से दंपती ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर अलग-अलग माइक्रो फाइनेंस कंपनी के वर्करों से मिलकर करीब 60 लाख से अधिक का कर्ज दिलाया है। कम समय में अधिक रुपये देने का झांसा देकर इन महिलाओं से रुपये लेकर दंपती फरार हो गया। कर्ज लेने वाली महिलाओं के घर जब समूह के एजेंट रिकवरी करने पहुंचे तो इसकी जानकारी महिलाओं को हुई। 
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इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। एसपी के आदेश पर विशुनपुरा थाने में दंपती के खिलाफ करीब एक माह पूर्व केस दर्ज किया गया। एसपी धवल जायसवाल ने बताया कि विशुनपुरा थाने की पुलिस व साइबर थाने की संयुक्त टीम ने गगलवा नहर पुल के पास से फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार कर समूह से लाखों रुपयों के लोन का फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग के मुख्य आरोपी अशोक कुमार मद्धेशिया, उसकी पत्नी गुड्डी देवी निवासी दुदही थाना विशुनपुरा, आरोहण बैंक के कर्मी मेहताब आलम निवासी सरया थाना गढ़वाल जनपद बलिया, कर्मी राकेश कुमार निवासी दुर्गापुर दोडीहवां थाना बृजमनगंज जनपद महराजगंज व दीपक केशरी निवासी साहबगंज उत्तरी कोतवाली पडरौना, जनपद कुशीनगर को गिरफ्तार किया गया। 
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पुलिस ने इनके पास से 60 हजार नगद, दो लैपटॉप, 11 अलग-अलग कूटरचित मुहर, पांच कूटरचित दस्तावेज फर्जी हस्ताक्षर व मुहर सहित, पांच मोबाइल फोन, अलग-अलग कंपनियों के 10 एटीएम कार्ड, मूल 49 आधार कार्ड, 189 आधार कार्ड की फोटो कॉपी, अलग-अलग 15 बैंकों के पासबुक, दो चेक, 100 मूल निर्वाचन कार्ड व 54 निर्वाचन कार्ड की फोटो कॉपी, 81 व्यक्तियों के कलर फोटो व आधार कार्ड, एक प्रिंटर, वायरलेस कीबोर्ड, एक लक्जरी कार व दो बाइकें बरामद किया। 

पुलिस की पूछताछ में फर्जीवाड़ा कर रकम हड़पने की कहानी जालसाजों ने बताई। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से न्यायिक अभिरक्षा में आरोपियों को जेल भेज दिया गया।

खुद कर्ज से उबरने के लिए 32 महिलाओं को बना दिया कर्जदार
-समूह की महिलाओं को लोन दिलाकर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के मुख्य आरोपी अशोक मद्धेशिया ने साल 2021-22 में अपनी पत्नी के साथ बड़े पैमाने पर गल्ले का कारोबार शुरू किया। इस कारोबार में दंपती को लाखों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। नतीजा यह रहा कि अशोक और उसकी पत्नी गुड्डी कर्ज के बोझ तले दब गए। 

इस कर्ज से उबरने के लिए दोनों ने मिलकर दुदही कस्बा व आसपास के गांवों की 32 महिलाओं को अपने झांसे में लेकर समूह बना दिया और उन्हें माइक्रो बैंकर्स के जरिये आरोहण बैंक, एसकेएस बैंक (भारत), एस वंदना, मिसलैंड, सेव बैंक, सुकन्या बैंक, आशीर्वाद बैंक, आरबीएल बैंक, उत्कर्ष बैंक, मुथुट माइक्रोफिन, क्रेडिट एक्सिस ग्रामीण लिमिटेड, सत्या, सेव माइक्रो फाइनेंस, स्कन्द्रा बैंक, इंडसइंड बैंक, स्टेन क्रेडिकेयर नेटवर्क लिमिटेड आदि से लोन दिलाया और लोन भरने का विश्वास दिलाकर उनसे 60 लाख से अधिक रुपये हड़प लिए। 

हड़पे गए रुपये को अशोक ने कारोबार में हुए घाटे की भरपाई में लगा दिया। समूह में शामिल महिलाओं को इस बात की जानकारी तब हुई, जब अलग-अलग बैंकों व फाइनेंस कंपनियों के एजेंट उनसे रिकवरी करने पहुंचे। इसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा और दंपती के खिलाफ केस दर्ज किया गया। अशोक के फोन पे से 24 लाख रुपये की जालसाजी कर धोखाधड़ी करने का साक्ष्य पुलिस के हाथ लगा है। अन्य शातिर जालसाजों की संलिप्तता को लेकर पुलिस की जांच चल रही है।

एप से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मुहैया कराता था दीपक
जालसाजों के गैंग में शामिल सीएससी संचालक दीपक केशरी पडरौना के रामकोला रोड पर सीएससी चलाता है। समूह बनाकर महिलाओं के नाम से लोन दिलाने वाले दंपती को दीपक ही कूटरचित दस्तावेज तैयार कर मुहैया कराता था। इसके लिए वह कृष्णा पोर्टल एप का सहारा लेकर वोटर कार्ड, आधार कार्ड आदि का केवाईसी कर कूटरचित दस्तावेज बनाता था। दस्तावेज मुहैया कराने के एवज में दीपक को अच्छी खासी रकम भी मिलती थी।

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