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लॉकडाउन में मछली पालकों पर लगा कोरोना का ग्रहण, इस वजह से परेशान हो रहे हैं लोग
Thu, 07 May 2020 05:08 PM IST
vivek shukla
टीपी शाही/अमर उजाला, गोरखपुर।
टीपी शाही/अमर उजाला, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 07 May 2020 05:08 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में किसानों की आय दुगनी करने के लिए सरकार मत्स्य पालन और पशुपालन पर जोर दे रही है। अधिकतम किसानों ने मत्स्य पालन का काम किया है। वहीं ग्रामीण तालाबों में लोगों ने मछली पालन किया है।
प्रमुख सचिव गृह ने 29 अप्रैल को एक आदेश जारी कर कहा कि मत्स्य पालन और पशुधन पर किसी प्रकार का रोक नहीं रहेगा। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर तालाबों में जाल डालने पर प्रतिबंध है। हालांकि यही सीजन है जिसमें लोग मछलियां बेचकर धन अर्जित करते हैं। मछली पालने वाले लोगों ने अपनी जो पूंजी लगाए हैं उसे निकालते हैं।
स्थानीय स्तर पर देहात क्षेत्रों में लगने वाली मछली मंडी पर बैन होने के कारण तालाबों में जाल नहीं पड़ रही है। इस संबंध में जिला मत्स्य पालन अधिकारी एके शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग के नाते मछली मारने पर प्रतिबंध है।
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उन्होंने स्वीकार किया कि प्रमुख सचिव गृह का आदेश है लेकिन जिला अधिकारी ने स्थानीय स्तर पर रोक लगाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तालाब में जाल डालने पर 10 से 15 लोग लगते हैं ऐसे में सोशल डिस्टेंस संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को एक मांगपत्र लिखकर दे चुके हैं कि तालाबों में जाल डालकर मछली निकालने की इजाजत दी जाए और स्थानीय स्तर पर लगने वाली मंडियों से रोक हटाई जाए। जिससे मत्स्य पालक अपनी मशीन या मंडियों में ले जाकर बेच सकें।
ऐसे में सभी को जिलाधिकारी के आदेश का इंतजार किया जा रहा है सभी लोगों के मन में यह सवाल उठा रहे हैं कि जब शहर में चिकन की होम डिलीवरी हो सकती है तो मछली बेचने में भी प्रशासन की तरफ से छूट मिलनी चाहिए।
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प्रमुख सचिव गृह ने 29 अप्रैल को एक आदेश जारी कर कहा कि मत्स्य पालन और पशुधन पर किसी प्रकार का रोक नहीं रहेगा। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर तालाबों में जाल डालने पर प्रतिबंध है। हालांकि यही सीजन है जिसमें लोग मछलियां बेचकर धन अर्जित करते हैं। मछली पालने वाले लोगों ने अपनी जो पूंजी लगाए हैं उसे निकालते हैं।
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स्थानीय स्तर पर देहात क्षेत्रों में लगने वाली मछली मंडी पर बैन होने के कारण तालाबों में जाल नहीं पड़ रही है। इस संबंध में जिला मत्स्य पालन अधिकारी एके शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सोशल डिस्टेंसिंग के नाते मछली मारने पर प्रतिबंध है।
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उन्होंने स्वीकार किया कि प्रमुख सचिव गृह का आदेश है लेकिन जिला अधिकारी ने स्थानीय स्तर पर रोक लगाया है। उन्होंने कहा कि किसी भी तालाब में जाल डालने पर 10 से 15 लोग लगते हैं ऐसे में सोशल डिस्टेंस संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी को एक मांगपत्र लिखकर दे चुके हैं कि तालाबों में जाल डालकर मछली निकालने की इजाजत दी जाए और स्थानीय स्तर पर लगने वाली मंडियों से रोक हटाई जाए। जिससे मत्स्य पालक अपनी मशीन या मंडियों में ले जाकर बेच सकें।
ऐसे में सभी को जिलाधिकारी के आदेश का इंतजार किया जा रहा है सभी लोगों के मन में यह सवाल उठा रहे हैं कि जब शहर में चिकन की होम डिलीवरी हो सकती है तो मछली बेचने में भी प्रशासन की तरफ से छूट मिलनी चाहिए।