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खुशखबर: नवंबर में लाया जाएगा गिद्ध का पहला जोड़ा, यहां बन रहा है 'जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र'

Mon, 28 Jun 2021 01:14 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 28 Jun 2021 01:14 PM IST
सार

पांच एकड़ में बन रहे ‘जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र’ का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वन विभाग का दावा है कि केंद्र को बनने में तीन साल लगेंगे।

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first pair of vultures will be brought to breeding center in November Gorakhpur
जीपीएस लगा गिद्ध। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महराजगंज जिले के फरेंदा तहसील के भारी-बैसी गांव में गिद्धों के संरक्षण और प्रजनन के लिए बनाए जा रहे केंद्र में इस साल नवंबर में गिद्धों का पहला जोड़ा आ जाएगा। पांच एकड़ में बन रहे ‘जटायु संरक्षण और प्रजनन केंद्र’ का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। वन विभाग का दावा है कि केंद्र को बनने में तीन साल लगेंगे। निर्माण के दौरान ही केंद्र में गिद्धों के सुरक्षित प्रजनन की तैयारी कराई जाएगी।  

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गिद्ध प्रजनन केंद्र का निर्माण वनारोपण निधि प्रबंधन व योजना प्राधिकरण (कैंपा) के तहत कराया जा रहा है। केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद अक्तूबर में 80 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है। इस केंद्र के निर्माण पर कुल 1.60 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।
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इसे हरियाणा के पिंजौर में स्थापित जटायु संरक्षण व प्रजनन केंद्र की तर्ज पर बनाया जा रहा है। गिद्धों की घटती आबादी बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार ने इस केंद्र को बनाने का फैसला लिया था। निर्माण के बाद केंद्र में गिद्धों के नौ जोड़े रखे जाएंगे। इसके अलावा आसपास के गद्धिों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बनेगा।
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शर्मिले होते हैं गिद्ध
जानकार बताते हैं कि गिद्ध दीर्घायु होते हैं, लेकिन पांच से छह साल की आयु में प्रजनन योग्य हो जाते हैं। एक बार में एक से दो अंडे देते हैं। गिद्ध काफी शर्मिला पक्षी है। अपने प्रवास या खानपान में खलल नहीं चाहता। पशुओं का सड़ा मांस इसका भोजन है।


डीएफओ अविनाश कुमार ने कहा कि तीन साल में केंद्र तैयार हो जाएगा। नवंबर में गिद्धों का पहला जोड़ा आ जाएगा। निर्माण के दौरान प्रजनन केंद्र में गिद्धों के सुरक्षित प्रजनन की तैयारी कराई जाएगी। गिद्धों के पंजों में सेटेलाइट ट्रासमिशन लगाया जाएगा। इससे उन पर हमेशा नजर रखी जा सकेगी।


 

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