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डीडीयू : पीएचडी में प्रवेश के लिए 15 राज्यों से आए आवेदन
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की बढ़ती अकादमिक प्रतिष्ठा और हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन का प्रभाव पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में दिख रहा है। शोध पात्रता परीक्षा 2025-26 के लिए अब तक लगभग 15 राज्यों के छात्र-छात्राओं ने अब तक आवेदन किया है। नेपाल से भी आवेदन आए हैं।
डीडीयू में रेट-2025 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 21 फरवरी है। आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही आवेदकों की संख्या में भी वृद्धि दिख रही है। इस वर्ष न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अंडमान-निकोबार, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, दिल्ली और मेघालय जैसे सुदूर क्षेत्रों के छात्र भी इस विश्वविद्यालय के शोध कार्यक्रम में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेपाल के अभ्यर्थियों ने भी कई विषयों में आवेदन किया है।
प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष 46 विषयों में 866 फुल टाइम और 55 पार्ट टाइम सीटों के अलावा स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों की 90 सीटों के लिए जारी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस सत्र से इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं और फार्मेसी में भी पीएचडी की शुरुआत की गई है।
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इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि डीडीयू अब केवल एक क्षेत्रीय विश्वविद्यालय नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में उभर रहा है। 15 राज्यों और नेपाल से मिल रहे आवेदन हमारी शैक्षणिक गुणवत्ता और बेहतर रैंकिंग का परिणाम हैं।
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डीडीयू में रेट-2025 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 21 फरवरी है। आवेदन की अंतिम तिथि नजदीक आने के साथ ही आवेदकों की संख्या में भी वृद्धि दिख रही है। इस वर्ष न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि अंडमान-निकोबार, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, दिल्ली और मेघालय जैसे सुदूर क्षेत्रों के छात्र भी इस विश्वविद्यालय के शोध कार्यक्रम में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेपाल के अभ्यर्थियों ने भी कई विषयों में आवेदन किया है।
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प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि इस वर्ष 46 विषयों में 866 फुल टाइम और 55 पार्ट टाइम सीटों के अलावा स्ववित्तपोषित कार्यक्रमों की 90 सीटों के लिए जारी ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस सत्र से इंजीनियरिंग की विभिन्न शाखाओं और फार्मेसी में भी पीएचडी की शुरुआत की गई है।
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इस संबंध में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि डीडीयू अब केवल एक क्षेत्रीय विश्वविद्यालय नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय शोध केंद्र के रूप में उभर रहा है। 15 राज्यों और नेपाल से मिल रहे आवेदन हमारी शैक्षणिक गुणवत्ता और बेहतर रैंकिंग का परिणाम हैं।