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Eye Flu: इलाज में ढिलाई यानि आंखों की रोशनी से खिलवाड़, आई ड्राॅप का धड़ल्ले से हो रहा प्रयोग

Mon, 14 Aug 2023 01:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 14 Aug 2023 01:27 PM IST
सार

मेडिकल कॉलेज के आंख रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार जायसवाल बताते हैं कि शुरुआती दौर में गलत दवा के चलते कई लोगों की कार्निया पर भी इसका असर आ रहा है। इस वजह से लोगों की हालत गंभीर हो जा रही है। इस रोग को हल्के में आंकना बेहद नुकसानदायक हो सकता है।

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Eye Flu Laxity in treatment means playing with eyesight
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आंखों की बीमारी आई फ्लू (कंजक्टिवाइटिस) को हल्के में न लें। अगर इलाज में लापरवाही हुई तो यह खिलवाड़ महंगा पड़ सकता है। आंखों की रोशनी भी जा सकती है। लोग बिना चिकित्सीय सलाह के स्टेरॉयड युक्त आई ड्राॅप का धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। कई लोग इलाज में सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहे हैं। कुछ लोग तो ठीक हो जाने के बाद भी बचाव में आई ड्रॉप ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ऐसा करना सेहत के लिए खतरनाक है। इस वजह मर्ज गंभीर हो जा रही है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में आंखों के गंभीर रोगी पहुंचने लगे हैं।

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एंटेरो वायरस की वजह से फैली आंखों की बीमारी कंजक्टिवाइटिस का प्रभाव पूरे पूर्वांचल में बना हुआ है। उमस भरी गर्मी और हल्की बारिश ने इस बीमारी को तेजी से फैलाया। अब यह बीमारी सोशल मीडिया और नीम-हकीमों के इलाज की वजह से बिगड़ती जा रही है।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेंद्र ठाकुर बताते हैं कि ओपीडी में हर दिन आंखों के 300 से 400 मरीज आ रहे हैं। ग्रामीण इलाके के कई मरीज गंभीर अवस्था में आ रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह सामने आ रही है कि आंख लाल होने पर लोग घर या पड़ोस में इसी रोग से पीड़ित किसी व्यक्ति की दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं। जबकि हर व्यक्ति की समस्या व उसका प्रभाव अलग-अलग है। डॉक्टर आंख की लाली व पीड़ित के उम्र के हिसाब से दवा और दवा का डोज बताते हैं। जबकि, अपने मन से लोग दवा डाल रहे हैं, जिस वजह से आंखों में अधिक सूजन आ रहा है।
 

मेडिकल कॉलेज के आंख रोग विशेषज्ञ डॉ. रामकुमार जायसवाल बताते हैं कि शुरुआती दौर में गलत दवा के चलते कई लोगों की कार्निया पर भी इसका असर आ रहा है। इस वजह से लोगों की हालत गंभीर हो जा रही है। इस रोग को हल्के में आंकना बेहद नुकसानदायक हो सकता है।

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स्टेराॅयड से बाद में हो सकती है दिक्कत
बाजार में करीब 30 कंपनियां अलग-अलग नाम से आई फ्लू की दवा बेच रही हैं। इसमें अधिकांश में ओफ्लाक्सासीन के साथ स्टेराॅयड भी है। स्टेरॉयड के चलते भविष्य में आंखों में दूसरी बीमारियां भी हो सकती हैं, इसलिए आंखों के डॉक्टर इस बात की सलाह दे रहे हैं कि बिना चिकित्सक के परामर्श के कोई भी दवा आंख में न डालें। बाजार के जानकारों का कहना है कि स्टेरॉयड युक्त दवाओं की कीमत अन्य दवाओं से कम है और इसके प्रयोग से आंखों की लाली जल्दी खत्म हो रही है, इसीलिए लोग इसका अधिक उपयोग कर रहे हैं।

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इन बातों का रखें ख्याल

  • आई फ्लू संक्रमित व्यक्ति के तौलिया, बिस्तर, कपड़े आदि का इस्तेमाल दूसरे न करें।
  • संक्रमित होने पर आंखों को रगड़ें नहीं, बल्कि साफ ठंडे पानी से हल्के हाथों से धोएं व साफ कपड़े से सूखा लें।
  • चिकित्सक के परामर्श के बाद ही आंख में कोई ड्रॉप डालें।
  • पड़ोसी, सोशल मीडिया या किसी अन्य की सुनी-सुनाई बातों पर इलाज न करें।
  • सरकारी अस्पतालों में इसका नि:शुल्क इलाज व ड्रॉप उपलब्ध है।
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