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नेत्रदान कर दूसरों की जिदंगी में ला सकते हैं उजाला 

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jun 2020 07:50 PM IST
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Eye donation can bring light to the lives of others
विश्व नेत्रदान दिवस आज  ---------- नेत्रदान कर दूसरों की जिदंगी में ला सकते हैं उजाला  शहर के तीन लोगों ने छह लोगों की जिदंगी में दिया है उजाला  अमर उजाला ब्यूरो  गोरखपुर। जिले के 200 ऐसे लोग हैं, जिनकी जिदंगी में अंधेरा है। उन्हें इंतजार है ऐसे दरियादिल लोगों की जो अपनी आंखें दान दे सकें। इन लोगों ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आंखों के लिए रजिस्ट्रेशन भी कराए हैं। लेकिन अब तक इन्हें कोई मददगार नहीं मिला है। जबकि मेडिकल कॉलेज में 520 लोगों ने नेत्रदान के लिए शपथ पत्र भी भरा है। लेकिन इनमें केवल दो लोगों ने नेत्रदान दिए है। इससे चा लोगों की जिदंगी में उजाला आया है। जबकि एक निजी अस्पताल में भी सूर्यकुंड के एक व्यक्ति ने नेत्रदान किया था। इसके बाद दो लोगों की जिदंगी रोशन हुई। कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन हुआ। इस बीच न तो ऑपरेशन हो सके और न ही किसी ने नेत्रदान के लिए शपथ पत्र भरा। लेकिन लॉडाउन से पहेल कईयों ने शपथ पत्र भरा भी तो कॉलेज प्रशासन को उनकी मौत की सूचना ही नहीं मिली। इसकी वजह से उनकी आंखों का उपयोग नहीं हो सका।  --------- इन लोगों ने किया है दूसरों की जिदंगी में उजाला नेत्रदान करने वालों की बात करें तो मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एचएन चौधरी, शाहपुर की कनकलता त्रिपाठी ने मेडिकल कॉलेज में और सूर्यकुंड निवासी प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. परमानंद श्रीवास्तव ने एक निजी अस्पताल में नेत्रदान किया था। इनकी वजह से छह लोगों की जिदंगी में हमेशा के लिए उजाला आ गया।  ----------------------------------------------- नेत्रदान के लिए जो भी इच्छुक हैं। वह शपथ पत्र भरने से पहले अपने परिवार को इसके लिए राजी अवश्य करें। क्योंकि मृत्यु के बाद परिवार के लोग सूचना ही नहीं देते हैं। ऐसे में उनके शपथ पत्र भरने का कोई अर्थ ही नहीं निकल पाता। नेत्र दान में आंख नहीं निकाली जाती बल्कि केवल कार्निया ही निकाली जाती है।  डॉ. रामकुमार जायसवाल, विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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