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गोरखपुर: दस माह बाद भी दो किसानों को नहीं मिला धान का भुगतान, डीएम को लिखा पत्र
Tue, 19 Oct 2021 02:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 19 Oct 2021 02:30 PM IST
सार
अशरफी लाल और अजय कुमार का आरोप है कि एमआई के अचानक चले जाने के कारण उन लोगों को तौलाए गए धान की न तो कोई रसीद दी गई और न कोई प्रमाणपत्र जारी किया गया। उनसे खरीदे गए धान की ऑनलाइन पोर्टल पर फीडिंग भी नहीं हुई।
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धान निकालता किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
धान खरीदारी के दौरान ही विपणन निरीक्षक का उन्नाव से गोरखपुर जनपद मुख्यालय पर ट्रांसफर हो जाने के कारण वहां के दो किसानों से खरीदे गए 99.8 क्विंटल धान की ऑनलाइन फीडिंग नहीं हो सकी। दस माह बीतने के बावजूद भुगतान नहीं होने पर किसानों ने डीएम और आरएफसी गोरखपुर को पत्र लिखकर धान की कीमत दिलाने की मांग की है।
मामला उन्नाव जिले की तहसील हसनगंज के तहत सरकारी क्रय केंद्र सीमऊ का है। इस केंद्र पर इसी साल छह जनवरी को ग्राम दृगपाल खेड़ा निवासी अशरफी लाल 55 क्विंटल और ग्राम हसनपुर बाव पश्चिमी निवासी अजय कुमार 44.8 क्विंटल धान बेचने लाए थे। किसानों के अनुसार यहां तैनात विपणन निरीक्षक (एमआई) राजन सिंह ने उनके धान की तौल कराई। इसी दौरान तत्कालीन जिला खाद्य विपणन अधिकारी पहुंचे और एमआई राजन सिंह को अपने साथ जिला मुख्यालय ले गए। क्रय केंद्र के लोगों ने बताया कि राजन सिंह के विरुद्ध पूर्व में कुछ शिकायतें की गई हैं, इसी सिलसिले में उन्हें मुख्यालय ले जाया गया है।
अशरफी लाल और अजय कुमार का आरोप है कि एमआई के अचानक चले जाने के कारण उन लोगों को तौलाए गए धान की न तो कोई रसीद दी गई और न कोई प्रमाणपत्र जारी किया गया। उनसे खरीदे गए धान की ऑनलाइन पोर्टल पर फीडिंग भी नहीं हुई। इसके बाद दोनों ने एमआई राजन सिंह से कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क किया। हर बार एमआई ने भुगतान कराए जाने का आश्वासन दिया।
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अब उनका फोन स्विच ऑफ हो गया है। दस माह बीतने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर दोनों ने उच्च अधिकारियों से संपर्क किया तो बताया गया कि राजन सिंह का ट्रांसफर गोरखपुर कर दिया गया है। दोनों ही किसानों ने डीएम और आरएफसी गोरखपुर को पत्र लिख कर धान का भुगतान कराने की मांग की है। इस संबंध में राजन सिंह का पक्ष नहीं मिल सका है। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
गोरखपुर आरएफसी मरंजन सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि किसानों से धान खरीद हुई है तो उनका भुगतान कराया जाएगा।
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मामला उन्नाव जिले की तहसील हसनगंज के तहत सरकारी क्रय केंद्र सीमऊ का है। इस केंद्र पर इसी साल छह जनवरी को ग्राम दृगपाल खेड़ा निवासी अशरफी लाल 55 क्विंटल और ग्राम हसनपुर बाव पश्चिमी निवासी अजय कुमार 44.8 क्विंटल धान बेचने लाए थे। किसानों के अनुसार यहां तैनात विपणन निरीक्षक (एमआई) राजन सिंह ने उनके धान की तौल कराई। इसी दौरान तत्कालीन जिला खाद्य विपणन अधिकारी पहुंचे और एमआई राजन सिंह को अपने साथ जिला मुख्यालय ले गए। क्रय केंद्र के लोगों ने बताया कि राजन सिंह के विरुद्ध पूर्व में कुछ शिकायतें की गई हैं, इसी सिलसिले में उन्हें मुख्यालय ले जाया गया है।
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अशरफी लाल और अजय कुमार का आरोप है कि एमआई के अचानक चले जाने के कारण उन लोगों को तौलाए गए धान की न तो कोई रसीद दी गई और न कोई प्रमाणपत्र जारी किया गया। उनसे खरीदे गए धान की ऑनलाइन पोर्टल पर फीडिंग भी नहीं हुई। इसके बाद दोनों ने एमआई राजन सिंह से कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क किया। हर बार एमआई ने भुगतान कराए जाने का आश्वासन दिया।
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अब उनका फोन स्विच ऑफ हो गया है। दस माह बीतने के बाद भी भुगतान नहीं होने पर दोनों ने उच्च अधिकारियों से संपर्क किया तो बताया गया कि राजन सिंह का ट्रांसफर गोरखपुर कर दिया गया है। दोनों ही किसानों ने डीएम और आरएफसी गोरखपुर को पत्र लिख कर धान का भुगतान कराने की मांग की है। इस संबंध में राजन सिंह का पक्ष नहीं मिल सका है। उनका पक्ष आने पर प्रकाशित किया जाएगा।
गोरखपुर आरएफसी मरंजन सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि किसानों से धान खरीद हुई है तो उनका भुगतान कराया जाएगा।