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चिंताजनक: गोरखपुर में बाढ़ और जलभराव से बढ़े इंसेफेलाइटिस के मरीज, 12 लोगों की हो चुकी है मौत
Wed, 06 Oct 2021 05:50 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 06 Oct 2021 05:50 PM IST
सार
विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में इंसेफेलाइटिस के केस में भी बढ़ोतरी हुई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले में बाढ़ और जलभराव की वजह से इंसेफेलाइटिस के मरीज बढ़ गए हैं। इससे स्वास्थ्य महकमा चिंतित है। जनवरी से अब तक गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस के 161 मरीज मिल चुके हैं। इनमें से 12 मरीजों की मौत भी हुई है।
जानकारी के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल मरीजों की संख्या बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में इंसेफेलाइटिस के केस में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले पूरे साल जहां 130 मरीज मिले थे और छह मरीजों की मौत हुई थी। इस बार चार अक्तूबर तक 161 मरीज मिल चुके हैं और 12 मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
चिंता की बात यह है इन मरीजों में 60 से 65 प्रतिशत में स्क्रब टाइफस के मरीज मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से बाढ़ का पानी कम हुआ है उसके अनुसार मामले अभी और बढ़ेंगे। क्योंकि यह बीमारी गंदगी की वजह से होती है। इसके अलावा स्क्रब टाइफस भी एक बड़ा कारण है। बाढ़ के दौरान गाय, भैंस, बकरी और कुत्ते जैसे पालतू जानवर भी पानी के संपर्क में रहे। इनमें चार तहर के बैक्टीरिया पाएं जाते हैं। यह बैक्टीरिया जू (किलनी) में पाए गए हैं। इनमें बोफिलस माइक्रोप्लस, हायलोमा कुमारी रिफिसेफेलस, सैंग्वीनियस और डर्मासेंटर आरोटस नामक बैक्टीरिया मिले हैं। यह चारों बैक्टीरिया बेहद खतरनाक है। स्क्रब टाइफस इन्हीं बैक्टीरिया के कारण होता है।
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मेडिकल कॉलेज में 397 मरीजों का इलाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गोरखपुर व बस्ती मंडल के साथ नेपाल और बिहार के 397 मरीजों का इलाज हुआ है। इनमें से 31 मरीजों की मौत हुई है। चिंता की बात यह है कि मरने वालों में 18 मरीज जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के थे।
बढ़ सकते हैं और मरीज
बाढ़ का पानी जिन इलाकों में कम हो गया है। उन इलाकों में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाके के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। इन इलाकों के लोग पानी को उबाल कर पीएं और साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इंसेफेलाइटिस का खतरा बढ़ सकता है।
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि इस साल कुछ इंसेफेलाइटिस के केस बढ़े हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम रोकथाम में पूरी तरह से लगी है। जिन इलाकों में केस मिले हैं, वहां पर टीम को भेजकर साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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जानकारी के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल मरीजों की संख्या बढ़ी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ का प्रकोप कम होने के बाद संक्रामक बीमारियों में तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में इंसेफेलाइटिस के केस में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले पूरे साल जहां 130 मरीज मिले थे और छह मरीजों की मौत हुई थी। इस बार चार अक्तूबर तक 161 मरीज मिल चुके हैं और 12 मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
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चिंता की बात यह है इन मरीजों में 60 से 65 प्रतिशत में स्क्रब टाइफस के मरीज मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से बाढ़ का पानी कम हुआ है उसके अनुसार मामले अभी और बढ़ेंगे। क्योंकि यह बीमारी गंदगी की वजह से होती है। इसके अलावा स्क्रब टाइफस भी एक बड़ा कारण है। बाढ़ के दौरान गाय, भैंस, बकरी और कुत्ते जैसे पालतू जानवर भी पानी के संपर्क में रहे। इनमें चार तहर के बैक्टीरिया पाएं जाते हैं। यह बैक्टीरिया जू (किलनी) में पाए गए हैं। इनमें बोफिलस माइक्रोप्लस, हायलोमा कुमारी रिफिसेफेलस, सैंग्वीनियस और डर्मासेंटर आरोटस नामक बैक्टीरिया मिले हैं। यह चारों बैक्टीरिया बेहद खतरनाक है। स्क्रब टाइफस इन्हीं बैक्टीरिया के कारण होता है।
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मेडिकल कॉलेज में 397 मरीजों का इलाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गोरखपुर व बस्ती मंडल के साथ नेपाल और बिहार के 397 मरीजों का इलाज हुआ है। इनमें से 31 मरीजों की मौत हुई है। चिंता की बात यह है कि मरने वालों में 18 मरीज जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के थे।
बढ़ सकते हैं और मरीज
बाढ़ का पानी जिन इलाकों में कम हो गया है। उन इलाकों में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाके के लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। इन इलाकों के लोग पानी को उबाल कर पीएं और साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें। अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इंसेफेलाइटिस का खतरा बढ़ सकता है।
सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि इस साल कुछ इंसेफेलाइटिस के केस बढ़े हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम रोकथाम में पूरी तरह से लगी है। जिन इलाकों में केस मिले हैं, वहां पर टीम को भेजकर साफ-सफाई के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।