यूपी: देवरिया जिले में गबन हुआ करोड़ों का, जांच रुके हो गए एक वर्ष से ज्यादा
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देवरिया जिले की 1189 ग्राम पंचायतों के विकास के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार विभिन्न योजनाओं पर प्रतिवर्ष तकरीबन 150 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन विकास के नाम पर गांवों में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। 20 माह के अंदर 200 से अधिक ग्राम प्रधानों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
इनकी जांच अधिकारियों को सौंपी गई है, लेकिन 151 से अधिक मामलों की जांच एक वर्ष से अधिक समय से लटकी पड़ी है। कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल 12 प्रधानों का पॉवर सीज हुआ, तीन पर केस दर्ज किया गया और दो प्रधानों से वसूली की कार्रवाई चल रही है। जांच में तकरीबन दो करोड़ का गबन पकड़ा गया था।
गांवों में शौचालय निर्माण, मनरेगा, 14वां वित्त, राज्य वित्त एवं आवास आदि कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। मिड-डे मिल की जिम्मेदारी भी ग्राम प्रधानों पर है। सूत्रों के अनुसार प्रति वर्ष पूरे जिले में 1189 गांवों के विकास पर इन योजनाओं के मद में तकरीबन 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
20 माह के आंकड़ों देखें तो 500 गांवों की शिकायतें जिला पंचायत राज अधिकारी, डीएम, मुख्य विकास अधिकारी तक पहुंची हैं। इनमें दो सौ ऐसी शिकायतें हैं, जिनकी जांच जनपद स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई है। ज्यादातर प्रधानों पर गांवों में आवास, शौचालय और पुरानी सड़कों की मरम्मत में हेराफेरी करने के आरोप लगे हैं।
विकास खंडों में आईं शिकायतें
जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दो सालों के अंदर विकास खंड देवरिया सदर की 14, गौरीबाजार की 20, बैतालपुर की 15, देसही देवरिया की 13, तरकुलवा की 14, पथरदेवा की छह, रामपुर कारखाना की छह, लार की नौ, भागलपुर की आठ, भलुअनी की 16, भटनी की सात, रुद्रपुर की आठ, बनकटा की 22, बरहज की आठ, सलेमपुर की 11, भाटपाररानी की 13 ग्राम पंचायतों की शिकायतें आई हैं। इसमें कुछ का निस्तारण हो चुका है और कई लंबित हैं।
जिन मामलों की लटकी है जांच
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक विकास खंड देवरिया सदर की 13, गौरीबाजार की 14, बैतालपुर की 11, देसही देवरिया की 10, तरकुलवा की 13, पथरदेवा की छह, रामपुर कारखाना की पांच, लार की आठ, भागलपुर की आठ, भलुअनी की 15, भटनी की आठ, रुद्रपुर की छह, बनकटा की 13, बरहज की आठ, सलेमपुर की आठ, भाटपाररानी की 11 ग्राम पंचायतों की शिकायतों की जांच 20 माह से अधिक समय से लटकी पड़ी है।
इनमें से सिर्फ डीसी मनरेगा ने सलेमपुर के देउरवा उर्फ शामपुर, रुद्रपुर के सराव बुजुर्ग में त्रिस्तरीय समिति गठित करने का आदेश दिया है। जांच की जिम्मेदारी जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, जिला उद्यान अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, अधीक्षण अभियंता ग्राम्य अभियंत्रण सेवा, जिला सेवा योजन अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त श्रम, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए, जिला कृषि अधिकारी, उप कृषि निदेशक, जिला गन्ना अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, एडीएम प्रशासन, डीसी मनरेगा, भूमि संरक्षण अधिकारी, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, अधीक्षण अभियंता नलकूप, अधीक्षण अभियंता विद्युत आदि को सौंपी गई है।
जिला पंचायत राज अधिकारी आनंद प्रकाश ने कहा कि तकरीबन 200 ग्राम पंचायतों में अनियमितता की शिकायतें मिली हैं। इनमें 12 ग्राम प्रधानों का पॉवर सीज किया जा चुका है। भाटपार के परोहा, बैतालपुर के अकटापार सहित तीन प्रधानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच में दो करोड़ की धांधली सामने आई है। पकहां और देवरिया उर्फ शामपुर गांव के ग्राम प्रधानों से वसूली की कार्रवाई शुरू हो चुकी है। शंकरपुरा, कटियारी सहित 10 गांवों के प्रधानों पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
मुख्य विकास अधिकारी शिव शरणप्पा जीएन ने कहा कि लगभग 151 ग्राम पंचायतों की जांच अधिकारियों ने लंबे समय से लंबित रखी है। ऐसे अधिकारियों से अब स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जवाब के आधार पर इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।