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एमएमएमयूटी: आर्थिक मंदी ने अटकाए आईटी कंपनियों में प्लेसमेंट की राह में रोड़े
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इंफोसिस कंपनी 126 विद्यार्थियों की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद भी नहीं कर रही है प्लेसमेंट
विप्रो, एसेंचर, कॉग्निजेंट जैसी आईटी कंपनियों ने भी टाल दी है प्लेसमेंट की योजना
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वैश्विक आर्थिक मंदी ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के विद्यार्थियों के मल्टीनेशनल कंपनियों के प्लेसमेंट में रोड़े अटका दिए हैं। स्थिति यह है कि प्रत्येक वर्ष कैंपस प्लेसमेंट के लिए आने वाली सॉफ्टवेयर कंपनियां विप्रो, एसेंचर, कॉग्निजेंट आदि ने इस बार विश्वविद्यालय से संपर्क ही नहीं किया। वहीं, आईटी कंपनी इंफोसिस 126 विद्यार्थियों के लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बावजूद प्लेसमेंट नहीं दे रही हैं।
यूक्रेन मसले पर चल रहे रूस और नाटो देशों के विवाद की वजह से अफ्रीकन और यूरोपियन देशों में मंदी की स्थिति है। इसका सबसे ज्यादा असर आईटी कंपनियों में नौकरियों पर पड़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के अलावा अफ्रीका और यूरोप के देशों में आईटी कंपनियां नौकरियों में काफी कटौती कर रही हैं। इसका असर भारत की आईटी कंपनियों पर भी पड़ रहा है।
वजह यह है कि ये आईटी कंपनियां अपनी जरूरतें भारत के युवाओं से पूरा करती हैं। विदेशों की तुलना में कम खर्च पर उन्हें भारत में बेहतर विषय विशेषज्ञ मिल जाते हैं। इस वजह से कंपनियां लगातार देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के जरिये युवाओं का चयन करती हैं।
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पिछले एक साल से वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से इन कंपनियों ने न सिर्फ नई भर्तियों पर रोक लगा रखी है बल्कि छंटनी भी कर रही है। इसी का असर है कि एमएमएमयूटी में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद भी 126 विद्यार्थियों को इंफोसिस में नौकरी का इंतजार है।
:: अब तक पार नहीं हो सका कैंपस प्लेसमेंट में 1000 का आंकड़ा
आईटी कंपनियों के नहीं आने की वजह से इस साल अब तक विश्वविद्यालय में कैंपस प्लेसमेंट का आंकड़ा 1000 के पार नहीं पहुंच सका है। अब तक सिर्फ 880 विद्यार्थियों का विभिन्न कंपनियों में चयन हो सका है, जबकि पिछले साल 1023 विद्यार्थियों को नौकरी मिल चुकी थी।
कोट
वैश्विक मंदी का असर है कि इस बार विश्वविद्यालय में आईटी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं आ रही हैं। इंफोसिस ने विश्वविद्यालय के 126 विद्यार्थियों की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू करने के बाद भी ऑफर लेटर नहीं दे रही हैं। इन विद्यार्थियों की नौकरी को कंपनी ने पाइपलाइन में डाल रखा है। वहीं, इस साल विप्रो, एसेंचर आदि आईटी कंपनियां ने कैंपस प्लेसमेंट के लिए संपर्क नहीं किया है।
- वीके द्विवेदी, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल चेयरमैन, एमएमएमयूटी
वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट के मामले में आईटी कंपनियों की स्थिति सबसे खराब
सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेश रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में मंदी की आशंका के बीच कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। एक आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार खासकर आईटी सेक्टर की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। हालांकि बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों ने छंटनी नहीं की है, परंतु, हायरिंग स्लो (प्लेसमेंट) कर दी है। वित्त वर्ष 2023 में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में शीर्ष तीन भारतीय आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और एचसीएल टेक ने अपने साथ 65 फीसदी कम कर्मचारियों को जोड़ा है। इन तीनों कंपनियों ने जहां वित्त वर्ष 2022 में 1.97 लाख लोगों को नौकरी दी थी, वहीं वित्त वर्ष 2023 में यह आंकड़ा केवल 68,886 पर आ टिका है। अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग संकट और मंदी की आशंकाओं से कंपनियों ने कम प्लेसमेंट किया है।
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विप्रो, एसेंचर, कॉग्निजेंट जैसी आईटी कंपनियों ने भी टाल दी है प्लेसमेंट की योजना
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। वैश्विक आर्थिक मंदी ने मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के विद्यार्थियों के मल्टीनेशनल कंपनियों के प्लेसमेंट में रोड़े अटका दिए हैं। स्थिति यह है कि प्रत्येक वर्ष कैंपस प्लेसमेंट के लिए आने वाली सॉफ्टवेयर कंपनियां विप्रो, एसेंचर, कॉग्निजेंट आदि ने इस बार विश्वविद्यालय से संपर्क ही नहीं किया। वहीं, आईटी कंपनी इंफोसिस 126 विद्यार्थियों के लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बावजूद प्लेसमेंट नहीं दे रही हैं।
यूक्रेन मसले पर चल रहे रूस और नाटो देशों के विवाद की वजह से अफ्रीकन और यूरोपियन देशों में मंदी की स्थिति है। इसका सबसे ज्यादा असर आईटी कंपनियों में नौकरियों पर पड़ रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण के एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के अलावा अफ्रीका और यूरोप के देशों में आईटी कंपनियां नौकरियों में काफी कटौती कर रही हैं। इसका असर भारत की आईटी कंपनियों पर भी पड़ रहा है।
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वजह यह है कि ये आईटी कंपनियां अपनी जरूरतें भारत के युवाओं से पूरा करती हैं। विदेशों की तुलना में कम खर्च पर उन्हें भारत में बेहतर विषय विशेषज्ञ मिल जाते हैं। इस वजह से कंपनियां लगातार देश के प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी संस्थानों में कैंपस प्लेसमेंट के जरिये युवाओं का चयन करती हैं।
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पिछले एक साल से वैश्विक आर्थिक मंदी की वजह से इन कंपनियों ने न सिर्फ नई भर्तियों पर रोक लगा रखी है बल्कि छंटनी भी कर रही है। इसी का असर है कि एमएमएमयूटी में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के बाद भी 126 विद्यार्थियों को इंफोसिस में नौकरी का इंतजार है।
:: अब तक पार नहीं हो सका कैंपस प्लेसमेंट में 1000 का आंकड़ा
आईटी कंपनियों के नहीं आने की वजह से इस साल अब तक विश्वविद्यालय में कैंपस प्लेसमेंट का आंकड़ा 1000 के पार नहीं पहुंच सका है। अब तक सिर्फ 880 विद्यार्थियों का विभिन्न कंपनियों में चयन हो सका है, जबकि पिछले साल 1023 विद्यार्थियों को नौकरी मिल चुकी थी।
कोट
वैश्विक मंदी का असर है कि इस बार विश्वविद्यालय में आईटी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए नहीं आ रही हैं। इंफोसिस ने विश्वविद्यालय के 126 विद्यार्थियों की लिखित परीक्षा और इंटरव्यू करने के बाद भी ऑफर लेटर नहीं दे रही हैं। इन विद्यार्थियों की नौकरी को कंपनी ने पाइपलाइन में डाल रखा है। वहीं, इस साल विप्रो, एसेंचर आदि आईटी कंपनियां ने कैंपस प्लेसमेंट के लिए संपर्क नहीं किया है।
- वीके द्विवेदी, ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल चेयरमैन, एमएमएमयूटी
वैश्विक स्तर पर प्लेसमेंट के मामले में आईटी कंपनियों की स्थिति सबसे खराब
सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेश रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में मंदी की आशंका के बीच कंपनियां कर्मचारियों की छंटनी कर रही हैं। एक आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार खासकर आईटी सेक्टर की बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। हालांकि बड़ी भारतीय आईटी कंपनियों ने छंटनी नहीं की है, परंतु, हायरिंग स्लो (प्लेसमेंट) कर दी है। वित्त वर्ष 2023 में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में शीर्ष तीन भारतीय आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इंफोसिस और एचसीएल टेक ने अपने साथ 65 फीसदी कम कर्मचारियों को जोड़ा है। इन तीनों कंपनियों ने जहां वित्त वर्ष 2022 में 1.97 लाख लोगों को नौकरी दी थी, वहीं वित्त वर्ष 2023 में यह आंकड़ा केवल 68,886 पर आ टिका है। अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग संकट और मंदी की आशंकाओं से कंपनियों ने कम प्लेसमेंट किया है।