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पृथ्वी दिवस विशेष: गोलघर में 30 प्रतिशत तक बढ़ गया प्रदूषण स्तर, जानिए पूरे गोरखपुर का हाल
Fri, 22 Apr 2022 01:03 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 22 Apr 2022 01:03 PM IST
सार
पिछले वर्ष की तुलना में मार्च में पूरे महीने अत्यंत खराब रही हवा की गुणवत्ता, रिहायशी इलाकों में कुछ बेहतर हुई है हवा की गुणवत्ता।
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गोलघर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लगातार बढ़ती जा रही भीड़, अनगिनत गाड़ियों की आवाजाही, ट्रैफिक जाम और गाड़ियों से निकलने वाले धुएं ने शहर के सबसे प्रमुख बाजार गोलघर इलाके को स्वास्थ्य के लिहाज से काफी खतरनाक बना दिया है।
पिछले वर्ष की तुलना में गोलघर इलाके में हवा में प्रदूषण का स्तर 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हालांकि राहत वाली बात यह है कि रियायशी इलाकों में हवा की गुणवत्ता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हुई है।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में संचालित नेशनल एंबीएंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम के सहायक वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ यादव ने बताया कि गोलघर इलाके की हवा में धूएं में मिले बारीक धूलकण, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार इस तरह के वातावरण में रहना सांस संबंधी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है।
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फिजिशियन डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 की मात्रा बढ़ने से सांस संबंधी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक के अलावा कई अन्य बीमारियां की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों को जहां तक संभव हो मास्क पहनना चाहिए।
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पिछले वर्ष की तुलना में गोलघर इलाके में हवा में प्रदूषण का स्तर 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है। हालांकि राहत वाली बात यह है कि रियायशी इलाकों में हवा की गुणवत्ता पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर हुई है।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग में संचालित नेशनल एंबीएंट मॉनिटरिंग प्रोग्राम के सहायक वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ यादव ने बताया कि गोलघर इलाके की हवा में धूएं में मिले बारीक धूलकण, सल्फर डाई आक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा है। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार इस तरह के वातावरण में रहना सांस संबंधी गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है।
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फिजिशियन डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने कहा कि हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 10 की मात्रा बढ़ने से सांस संबंधी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक के अलावा कई अन्य बीमारियां की आशंका बनी रहती है। ऐसे में लोगों को जहां तक संभव हो मास्क पहनना चाहिए।
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