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यूपी: यहां मुस्लिम परिवार की भागीदारी से पूरा होता है दशहरा, 250 वर्षों से चली आ रही है ये परंपरा
Mon, 26 Oct 2020 09:26 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, लार (देवरिया)।
संवाद न्यूज एजेंसी, लार (देवरिया)।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 26 Oct 2020 09:26 AM IST
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नीलकंठ का दर्शन कराता मिष्कार मियां का परिवार।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रामनगर गांव में विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए बिना गांव वालों का दशहरा पूरा नहीं होता है। खास बात यह है कि नीलकंठ का दर्शन गांव का ही मुस्लिम परिवार कराता है। करीब 250 वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है।
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जानकारी के अनुसार, विजयादशमी पर नीलकंठ के दर्शन करने की परंपरा रामनगर गांव में सदियों पुरानी है। परंपरा के निर्वहन में सभी समुदाय के लोग साथ होते हैं। हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित संतोष द्विवेदी कहते हैं कि यह परंपरा करीब 250 वर्षों से चल रही है। नीलकंठ पक्षी के दर्शन पूजन के बाद ही गांव में शुभ कार्य आरंभ होते हैं।
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गुलाब यादव ने बताया कि यह हमारी अनूठी परंपरा आपसी समरसता का प्रतीक है। चंद्रवीर यादव ने बताया कि हम सभी ग्रामवासियों का बिना नीलकंठ पक्षी देखे दशहरा शुभ नहीं माना जाता है। इस दिन सुबह से गांव के प्रत्येक घर के पुरुष, महिला और बच्चों को इस पक्षी का दर्शन कराया जाता है। शाम को सभी लोग गांव स्थित हनुमान मंदिर पहुंचते हैं। यहां दोनों समुदाय की मौजूदगी में नीलकंठ पक्षी को उड़ाया जाता है। जिसका सभी लोग दर्शन करते हैं।
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इस अनूठी परंपरा के निर्वहन की जिम्मेदारी गांव के मिष्कार मियां के परिवार की होती है। वह करीब दस दिन पूर्व से इस पक्षी की खोज में निकलते हैं। दशहरे के एक दिन पूर्व गांव पहुंचते हैं। मिष्कार मियां बताते हैं कि यह त्यौहार पशु पक्षियों पर दया दिखाने का भी संदेश देता है।
शिक्षक संजय सिंह ने बताया कि भगवान राम ने रावण के वध से पहले नीलकंठ पक्षी का दर्शन किया था, जिसके बाद उन्हें जीत मिली थी। अमृतराज सिंह ने बताया कि वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को अब इस परंपरा को युवा पीढ़ी उत्साह पूर्वक मना रही है।