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सफेद पट्टी के अभाव में हादसे के शिकार हो सकते हैं वाहन चालक, कोहरे के बीच मददगार होता है ये संकेत
Sun, 13 Dec 2020 12:35 PM IST
vivek shukla
टीपी शाही, गोरखपुर।
टीपी शाही, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 13 Dec 2020 12:35 PM IST
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घने कोहरे में वाहन चालकों की ‘मददगार’ सड़कों से गायब
- फोटो : अमर उजाला।
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सड़कों के बीच में और किनारे पर सफेद पट्टी नहीं होने या धुंधली हो जाने से धुंध में हादसों की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा कोहरा घना होने पर चालकों को वाहन चलाने में दिक्कत हो रही है। कोहरे के बीच अंदाजे से वाहन चलाने से गति तो धीमी हो ही जाती है, हादसे की भी आशंका बनी रहती है। संबंधित विभागों को ठंड का मौसम शुरू होने से पहले सफेद पट्टी बना देना चाहिए, लेकिन विभाग बजट और नियमों का हवाला देकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग की तरफ से सड़कों के बीच में थर्मल प्लास्टिक पेंट से सेंटर लाइन खींची जाती है। जबकि सड़क के दोनों किनारे पर रेज लाइन बनाई जाती है। सेंटर लाइन वाहन चालक के लिए बीच में चलने का संकेत देती है। कोहरे में यह लाइन वाहन चालक के लिए मार्गदर्शक का काम करती है।
इसी सफेद पट्टी के सहारे चालक अपने वाहन को चलाता है। वहीं, रेज लाइन से यह संकेत होता है कि लाइन के बाद किनारे वाहन नहीं ले जाना है। इस समय अधिकतर सड़कों की यह लाइनें धुंधली हो गई हैं या मिट गई हैं। इसके अलावा जहां सड़क नई बनाई गई है, वहां पर लाइन बनाई ही नहीं गई है। ऐसी हालत में सड़क में जहां पर कट होता है वहां पर हादसे की आशंका अधिक हो जाती है।
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बीते शुक्रवार सुबह कालेसर में फोर लेन पर बने गोलंबर के डिवाइडर पर एक वाहन चढ़ गया। वाहन क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इस जगह पर सफेद पट्टी दिख रही है लेकिन इतनी धुंधली हो गई है कि धुंध में वह चालक की कोई मदद नहीं कर सकती।
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जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग की तरफ से सड़कों के बीच में थर्मल प्लास्टिक पेंट से सेंटर लाइन खींची जाती है। जबकि सड़क के दोनों किनारे पर रेज लाइन बनाई जाती है। सेंटर लाइन वाहन चालक के लिए बीच में चलने का संकेत देती है। कोहरे में यह लाइन वाहन चालक के लिए मार्गदर्शक का काम करती है।
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इसी सफेद पट्टी के सहारे चालक अपने वाहन को चलाता है। वहीं, रेज लाइन से यह संकेत होता है कि लाइन के बाद किनारे वाहन नहीं ले जाना है। इस समय अधिकतर सड़कों की यह लाइनें धुंधली हो गई हैं या मिट गई हैं। इसके अलावा जहां सड़क नई बनाई गई है, वहां पर लाइन बनाई ही नहीं गई है। ऐसी हालत में सड़क में जहां पर कट होता है वहां पर हादसे की आशंका अधिक हो जाती है।
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बीते शुक्रवार सुबह कालेसर में फोर लेन पर बने गोलंबर के डिवाइडर पर एक वाहन चढ़ गया। वाहन क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। इस जगह पर सफेद पट्टी दिख रही है लेकिन इतनी धुंधली हो गई है कि धुंध में वह चालक की कोई मदद नहीं कर सकती।
डिवाइडर की पट्टियां भी पड़ीं धुंधली
धुंध में सड़कों के बीच और किनारे पर बनाई गई सफेद पट्टी साबित होती है वाहन चालकों की मार्गदर्शक
- फोटो : अमर उजाला।
यदि किसी सड़क के बीच में डिवाइडर बनाया गया है तो उसके दोनों तरफ से काले-पीले और सफेद पेंट से पुताई होनी चाहिए। ऐसा होने से रात में और धुंध पड़ने पर वाहन चालक को पता चलता रहता है कि सामने डिवाइडर है। वाहन को उससे इधर या उधर नहीं ले जाना है। इस तरह हादसा होने से बचता है। अधिकतर सड़कों में डिवाइडर पर बनाए गए यह संकेतक धुंधले पड़ गए हैं।
चौराहों पर भी संकेतक खराब
चौराहों पर लगाए जाने वाले संकेतक भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। कई चौराहों पर यह लगे दिख जाते हैं लेकिन सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस वजह से भी कोहरे में और रात में हादसे की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, शहरी क्षेत्र में लाल-हरा जैसे संकेत देने वाला कैट आई भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। यदि कहीं लगा है तो सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।
चौराहों पर भी संकेतक खराब
चौराहों पर लगाए जाने वाले संकेतक भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। कई चौराहों पर यह लगे दिख जाते हैं लेकिन सही ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। इस वजह से भी कोहरे में और रात में हादसे की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, शहरी क्षेत्र में लाल-हरा जैसे संकेत देने वाला कैट आई भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। यदि कहीं लगा है तो सही ढंग से काम नहीं कर रहा है।
लोनिवि के दफ्तर की सड़क पर धुंधली पड़ी है पट्टी
अधिकतर सड़कों पर धुंधली पड़ी हैं सेंटर व रेज लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
लोक निर्माण विभाग का जिस सड़क पर कार्यालय है और विभाग के मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता बैठते हैं, उस सड़क पर ही सफेद पट्टी दिखाई नहीं दे रही है। जबकि यह सड़क शहर की प्रमुख सड़कों में से एक है। इसी तरह कचहरी चौक से शास्त्री चौक तक जाने वाली सड़क की भी सफेद पट्टी धुंधली हो गई है।
छह माह में धुंधली पड़ जाती है सफेद पट्टी
प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि सड़क के निर्माण के बजट में ही सेंटर व रेज लाइन बनाने खर्च भी समाहित होता है। वहीं, सड़क पर पैच बनाने के लिए हर साल बजट मिलता है, लेकिन लाइन बनाने या कैट आई के लिए धन की व्यवस्था नहीं होती है। थर्मो प्लास्टिक के पेंट की मियाद छह महीने होती है। इसके बाद वह मिटने लगती है और उसकी चमक कम हो जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को कोई मदद नहीं मिलती। दूसरी तरफ, जब दोबारा सड़क की मरम्मत का कार्य होता है तब जाकर पेंट के लिए बजट स्वीकृत होता है। जबकि सर्दी के मौसम में जब कोहरा पड़ता है तो यही लाइन वाहन चालकों के लिए मददगार साबित होती है।
छह माह में धुंधली पड़ जाती है सफेद पट्टी
प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि सड़क के निर्माण के बजट में ही सेंटर व रेज लाइन बनाने खर्च भी समाहित होता है। वहीं, सड़क पर पैच बनाने के लिए हर साल बजट मिलता है, लेकिन लाइन बनाने या कैट आई के लिए धन की व्यवस्था नहीं होती है। थर्मो प्लास्टिक के पेंट की मियाद छह महीने होती है। इसके बाद वह मिटने लगती है और उसकी चमक कम हो जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को कोई मदद नहीं मिलती। दूसरी तरफ, जब दोबारा सड़क की मरम्मत का कार्य होता है तब जाकर पेंट के लिए बजट स्वीकृत होता है। जबकि सर्दी के मौसम में जब कोहरा पड़ता है तो यही लाइन वाहन चालकों के लिए मददगार साबित होती है।
निर्माणाधीन सड़कों पर नहीं बनाई जाती सफेद पट्टी
लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता बीबी श्रीवास्तव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग या एनएचएआई जिन सड़कों का निर्माण कराता है उस पर सफेद पट्टी बनाने का प्रावधान नहीं है। जब इनका निर्माण पूरा हो जाता है तब सफेद पट्टी बनाई जाती है। जनपद में इस समय प्रमुख मार्गों का निर्माण कराया जा रहा है। गोरखपुर-देवरिया फोरलेन और गोरखपुर-महराजगंज फोरलेन का निर्माण लोक निर्माण विभाग करा रहा है। इसी तरह से गोरखपुर-वाराणसी मार्ग का निर्माण एनएचएआई करा रहा है। निर्माणाधीन होने की वजह से इन सड़कों पर सेंटर या रेज लाइन नहीं बनाई जा सकती। जब सड़क पूरी तरह से बन जाएगी तब जाकर लाइन बनाने का कार्य किया जाएगा।
सवाल : निर्माणाधीन सड़क पर पट्टी नहीं बना सकते तो उसे यातायात के लिए क्यों खोलते हैं?
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि निर्माणाधीन सड़कों पर सफेद पट्टी नहीं बनाई जा सकती। ऐसे में जिन सड़कों को लोनिवि ने बनाया है या मरम्मत किया है उस पर वह पट्टी नहीं बनाता है। सवाल यह है कि ऐसी सड़कों को वह यातायात के लिए क्यों खोल देता है? सफेद पट्टी न केवल कोहरे के लिए बल्कि रात में वाहन चलाने के लिए भी जरूरी मददगार होती है। ऐसी हालत में यदि इन सड़कों पर यातायात चल रहा है तो घने कोहरे और रात में हादसे की आशंका बढ़ जाती है। हादसे न भी हों तब भी वाहन चालकों को असुविधा तो होती ही है।
सवाल : निर्माणाधीन सड़क पर पट्टी नहीं बना सकते तो उसे यातायात के लिए क्यों खोलते हैं?
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि निर्माणाधीन सड़कों पर सफेद पट्टी नहीं बनाई जा सकती। ऐसे में जिन सड़कों को लोनिवि ने बनाया है या मरम्मत किया है उस पर वह पट्टी नहीं बनाता है। सवाल यह है कि ऐसी सड़कों को वह यातायात के लिए क्यों खोल देता है? सफेद पट्टी न केवल कोहरे के लिए बल्कि रात में वाहन चलाने के लिए भी जरूरी मददगार होती है। ऐसी हालत में यदि इन सड़कों पर यातायात चल रहा है तो घने कोहरे और रात में हादसे की आशंका बढ़ जाती है। हादसे न भी हों तब भी वाहन चालकों को असुविधा तो होती ही है।