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गोरखपुर : 14 साल बाद बेगुनाह साबित हुए डॉ. बीएन दास, जेल से रिहा, पत्नी की हत्या का था आरोप

Tue, 19 Apr 2022 02:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Tue, 19 Apr 2022 02:31 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने माना बेगुनाह, सोमवार को गोरखपुर जेल से किए गए रिहा। चौरीचौरा के रहने वाले डॉ. बीएन दास पर दूसरी पत्नी की हत्या का था आरोप। 

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Dr. BN Das proved innocent after 14 years, released from jail
सांकेतिक फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

दूसरी पत्नी की इंजेक्शन देकर हत्या के आरोप में जेल में बंद चौरीचौरा निवासी डॉ. बीएन दास सोमवार को गोरखपुर जेल से रिहा हो गए। वह 14 साल से जेल में बंद थे। जिला कोर्ट ने डॉक्टर दास को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उन्हें बेगुनाह पाया और रिहा करने का आदेश दिया था। जेल में रिहाई की कॉपी पहुंचने के बाद सोमवार को डॉक्टर रिहा कर दिया गया। 

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 जानकारी के मुताबिक, मूलरूप से बांसगांव के मामखोर निवासी डॉ. बीएन दास चौरीचौरा क्षेत्र में प्रैक्टिस करते थे। यहीं पर उन्होंने चंद्रा हॉस्पिटल के नाम से नर्सिंग होम खोला था। डॉक्टर दास शादीशुदा थे, लेकिन उन्होंने ब्रह्मपुर की रहने वाली चंद्रकला पाठक से दूसरी शादी कर ली। पहली पत्नी राजकुमारी देवी गांव में ही रहती हैं, उनसे डॉक्टर के पांच बच्चे हैं।
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दूसरी पत्नी चंद्रकला से भी दो बच्चे हुए। वर्ष 2008 में चंद्रकला की मौत हो गई। चंद्रकला के भाई मोनू पाठक ने डॉक्टर बीएन दास पर बहन की हत्या का आरोप लगाया। उनका आरोप था कि डॉक्टर दास उनकी बहन को स्लो प्वाइजन का इंजेक्शन दे रहे थे, जिससे उनकी मौत हो गई। चौरीचौरा पुलिस ने डॉक्टर दास पर हत्या का केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।
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जिला कोर्ट ने 2009 में डॉक्टर को हत्या में दोषी मानते हुए उम्रकैद और तीन हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ डॉक्टर ने हाईकोर्ट में अपील की और करीब 14 साल बाद डॉक्टर बीएन दास बाइज्जत बरी हो गए। कोर्ट का आदेश सोमवार को जेल पहुंचने पर उन्हें रिहा कर दिया गया।


डॉ. दास ने कहा कि न्याय की जीत होती है। बस, इस बात का दुख है कि 14 साल तक बिना किसी गलती के उन्हें सजा काटनी पड़ी। इससे वह अपने बच्चों की देखभाल नहीं कर पाए।

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