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मरीजों के साथ धोखा: डॉक्टर दिल्ली में, उनके नाम पर मुन्ना भाई चला रहे अस्पताल, कर रहे कमाई
Mon, 19 Jun 2023 12:06 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 19 Jun 2023 12:06 PM IST
सार
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण के दौरान डॉक्टर को मौके पर बुलाया जा रहा है। शपथ पत्र भी लिया जा रहा है। सख्त हिदायत दी गई है कि लोग अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में जरूर बैठें।
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Gorakhpur News
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गोरखपुर जिले में सैकड़ों अस्पताल मुन्ना भाई अपने जुगाड़ तंत्र से चला रहे हैं, जिनमें डॉक्टर अस्पताल में हैं ही नहीं और उनके नाम पर रजिस्ट्रेशन है। ये डॉक्टर किसी और शहर में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और अपने नाम से रजिस्ट्रेशन के एवज में हर माह लाखों रुपये मुन्ना भाई से लेते हैं। इस बात का खुलासा भी हो चुका है।
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इसके बाद भी मुन्ना भाई और एमबीबीएस डॉक्टरों का गठजोड़ फल-फूल रहा है। डॉक्टर मोटी कमाई के फेर में इस गठजोड़ का हिस्सा हैं। तारामंडल, गुलरिहा, खोवा मंडी और भटहट इलाके के 30 से 35 फीसदी अस्पताल इसी तरह चलाए जाने की चर्चा स्वास्थ्य विभाग में है।
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कमीशन के खेल में सिस्टम फेल
इस खेल के एक अहम किरदार एंबुलेंस चालक भी हैं। अस्पताल में इलाज के लिए लाने पर मुन्ना भाई ने उनका कमीशन तय कर रखा है। एंबुलेंस चालक को मरीज के हिसाब से रुपये मिलते हैं। गंभीर सर्जरी वाले मरीजों का रेट सबसे अधिक है। ऐसे मरीज लाने पर एंबुलेंस चालकों को 15 से 20 हजार, छोटी सर्जरी वाले मरीजों के लिए 10 से 12 हजार और सामान्य मरीजों को लाने पर पांच से आठ हजार रुपये तय हैं।
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इसके लिए एंबुलेंस चालक बिहार, पूर्वांचल के आसपास जिलों के कस्बों और ग्रामीण इलाकों के मरीजों को फांसते हैं। अच्छे इलाज का झांसा और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अधिक भीड़ दिखाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में पहुंचा देते हैं।
शपथ पत्र देने का है नियम
अस्पताल के पंजीकरण के दौरान जिस डॉक्टर का नाम रहता है, वह शपथ पत्र देता है। शपथ पत्र में इस बात का जिक्र रहता है कि वह अस्पताल में बैठेगा और मरीजों का इलाज करेगा। इसके अलावा इमरजेंसी में किसी भी समय इलाज के लिए उपलब्ध रहेगा। लेकिन शपथ पत्र देने के बाद भी बड़ी संख्या में डॉक्टर अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में नहीं बैठ रहे हैं।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण के दौरान डॉक्टर को मौके पर बुलाया जा रहा है। शपथ पत्र भी लिया जा रहा है। सख्त हिदायत दी गई है कि लोग अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में जरूर बैठें। अगर जांच के दौरान डॉक्टर नहीं मिलते हैं, तो ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने कहा कि अस्पताल के पंजीकरण के दौरान डॉक्टर को मौके पर बुलाया जा रहा है। शपथ पत्र भी लिया जा रहा है। सख्त हिदायत दी गई है कि लोग अपने नाम से पंजीकृत अस्पतालों में जरूर बैठें। अगर जांच के दौरान डॉक्टर नहीं मिलते हैं, तो ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी।
केस-एक
दिल्ली में रहकर पीजी की कर रहा था तैयारी, यहां लगी थी डिग्री
भटहट स्थित सत्यम हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन मुन्ना भाई ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुनील के नाम से कराया था। गर्भवती की मौत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि डॉ. सुनील दिल्ली में रहकर पीजी की तैयारी में जुटे हैं। इसी के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
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केस-दो
पूर्व सीएमओ के नाम से कर दिया था आवेदन
शहर के तारामंडल के रहने वाले एक मुन्ना भाई ने तो लखनऊ में रहने वाले एक पूर्व सीएमओ के नाम से ही रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल स्वास्थ्य विभाग में भेजी थी। विभाग ने जब फाइल पर पूर्व सीएमओ का नाम देखा, तो जांच शुरू की। पता चला उन्होंने अपना नाम नहीं दिया था। पूर्व सीएमओ ने रजिस्ट्रेशन कराने से मना कर दिया। इसके बाद विभाग ने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया।
भटहट स्थित सत्यम हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन मुन्ना भाई ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुनील के नाम से कराया था। गर्भवती की मौत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो पता चला कि डॉ. सुनील दिल्ली में रहकर पीजी की तैयारी में जुटे हैं। इसी के आधार पर पुलिस ने डॉक्टर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की है।
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केस-दो
पूर्व सीएमओ के नाम से कर दिया था आवेदन
शहर के तारामंडल के रहने वाले एक मुन्ना भाई ने तो लखनऊ में रहने वाले एक पूर्व सीएमओ के नाम से ही रजिस्ट्रेशन के लिए फाइल स्वास्थ्य विभाग में भेजी थी। विभाग ने जब फाइल पर पूर्व सीएमओ का नाम देखा, तो जांच शुरू की। पता चला उन्होंने अपना नाम नहीं दिया था। पूर्व सीएमओ ने रजिस्ट्रेशन कराने से मना कर दिया। इसके बाद विभाग ने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया।