Doctors Day: पर्दे के पीछे रहकर निभाई पूरी जिम्मेदारी, 20 लाख से अधिक कोरोना सैंपल की जांच
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह बताते हैं कि जब पहली लहर की शुरुआत हुई थी तो वायरस के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। पहले सैंपल की जांच में पूरी टीम डरी हुई थी। पहला पॉजिटिव केस मिलने पर काफी डर भी था, लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना की दस्तक ने लोगों को इस कदर डरा दिया था कि जरा सा जुकाम होने पर लोग तनाव में आ जाते थे। लोगों के जेहन में एक ही बात आती थी कि संक्रमण का मतलब सीधा मौत के मुंह में जाना। इन सबके बीच कोरोना जांच की जिम्मेदारी सबसे बड़ी थी। अनजान वायरस की जांच के लिए कोई तैयार नहीं था। लेकिन, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने जांच करने का फैसला लिया और जांच शुरू की।
यहां की टीम कोरोना की पहली लहर से लेकर अब तक 20 लाख सैंपल की जांच कर चुकी है। जांच के दौरान यहां की पूरी टीम संक्रमित भी हुई, लेकिन हौसला नहीं खोया। इसके बाद भी सतत जांच की प्रक्रिया जारी रखी। वहीं, कोरोना महामारी के बीच गर्भवतियों के लिए बड़ी मुसीबतें आईं। सुरक्षित प्रसव कराकर जज्चा और बच्चा को स्वस्थ रखना बड़ी चुनौती थी, जिसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने बखूबी किया। इसका असर यह रहा है कि कोरोना संक्रमित गर्भवती के बच्चे संक्रमण का शिकार तो हुए, लेकिन उनकी जान नहीं गई।
कोरोना के बीच ब्लैक फंगस सहित नियमित मरीजों की भी करते रहे जांच
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह बताते हैं कि जब पहली लहर की शुरुआत हुई थी तो वायरस के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं थी। पहले सैंपल की जांच में पूरी टीम डरी हुई थी। पहला पॉजिटिव केस मिलने पर काफी डर भी था, लेकिन जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ता गया, वैसे-वैसे जिम्मेदारियां भी बढ़ गईं। पूरी टीम 20 लाख कोरोना सैंपल की जांच अब तक कर चुकी है।
दूसरी लहर के बाद ब्लैक फंगस के मामले बढ़े तो एक बार फिर चुनौतियां सामने आ र्गइं, लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी और फंगस की जांच का भी जिम्मा उठाया, जिसकी बदौलत 300 से अधिक मरीजों की पहचान की गई। इन सबके बीच एचआईवी, स्वाइन फ्लू, टीबी, एईएस, सहित नियमित जांच की जिम्मेदारी भी टीम पर रही, जिसे बखूबी निभाया गया। टीम में डॉ जयेश पांडेय, डॉ अंकुर चौधरी, विवेक गौड़, प्रतिमा त्रिपाठी, हिमांशु विष्ठ, ज्योति कुमार, उमेश, देवेंद्र, बृजपाल, चंडी, अंबरीश, अभिषेक, शैलेश, नवीन, सुधा आदि शामिल रहीं।
283 कोरोना संक्रमित गर्भवतियों का कराया प्रसव
कोरोना की पहली लहर में जब सब कुछ बंद हो गया था। उस दौरान सबसे अधिक दिक्कतें गर्भवतियों को थीं। बच्चों के साथ खुद को संक्रमित होने से बचाना था। इन सबके बीच बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने जान जोखिम में डालकर कोरोना संक्रमित गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव कराया। पहली लहर से लेकर अब तक 283 कोरोना संक्रमित गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव टीम करा चुकी है।
विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि सुरक्षित प्रसव कराना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, जिसे पूरी टीम ने बेहद सावधानी पूर्वक किया। इसका असर यह हुआ कि प्रसव सुरक्षित हुए। हालांकि इन सबके बीच चार से पांच नवजात कोरोना संक्रमित भी हुए, लेकिन उन्हें ज्यादा खतरा नहीं हुआ। प्रसव कराने वाली टीम में डॉ सुधीर गुप्ता से लेकर डॉ अनीता सिंह अन्य जूनियर रेजीडेंट भी शामिल रहे।